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कोरोना का मात देने के बाद पोस्ट कोविड सिंड्रोम से मरीज हार रहे हैं जिंदगी की जंग
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कोरोना को मात देने के बाद मरीजों में पोस्ट कोविड सिंड्रोम से जिंदगी की जंग हार रहे हैं। कोरोना से ठीक होने के बाद हार्ट अटैक जैसे बीमारियों से मौत हो रही हैं, उसे पोस्ट कोविड सिंड्रोम का नाम दिया गया है। अस्पताल प्रशासन के पास इनका रिकॉर्ड नहीं होता परंतु जिले में अब तक ऐसी कई मरीजों की मौत हो चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना से ठीक हो चुके अधिकांश मरीजों को थकान, कमजोरी, सांस फूलना और ठीक से नींद न आने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बहुत से लोगों को तो इतनी कमजोरी हो जाती है कि उन्हें रोजमर्रा के काम में भी दिक्कत महसूस होने लगती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि कोरोना के मरीजों में एक बड़ी समस्या पल्मोनरी फाइब्रोसिस की है। इसमें फेफड़ों की ऑक्सीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है। ऐसे मरीजों को सांस फूलने की परेशानी लंबे समय तक रह सकती है।
30 फीसदी गंभीर मरीजों के बन रहे हैं खून के थक्के
सर गंगाराम अस्पताल के बोर्ड ऑफ एडवाइजर डॉ. प्रदीप भारद्वाज ने बताया कि
पल्मोनरी एम्बोलिज्म दूसरी समस्या है जिसका सामना कोविड-19 से ठीक हो
चुके मरीजों को करना पड़ रहा है। फेफड़े की धमनियों में ब्लॉकेज हो जाते है
जिससे फेफड़े तक खून के संचार में बाधा उत्पन्न हो जाती है। डॉ. भारद्धाज ने
बताया कि महामारी के शुरू में लग रहा था कि कोरोना वायरस श्वसन तंत्र को
संक्रमित कर रहा है। मगर अब मरीजों में खून के थक्कों को देखकर कहा जा
सकता है कि वायरस खून की नसों पर भी हमला कर रहा है। यह बहुत गंभीर
समस्या है जिसके परिणाम घातक हो सकते है। कोरोना वायरस से गंभीर रूप से बीमार 30 फीसदी तक मरीजों को खून के थक्कों के बनने की स्थिति सामने आ रही है जो जानलेवा है।
60वर्ष से अधिक उम्र को ज्यादा:
शीला मल्टी स्पेशलिस्ट अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक एवं एमडी डॉ. प्रशांत जांगड़ा ने बताया कि पोस्ट कोविड पल्मोनरी फाइब्रोसिस एक ऐसी स्थिति है, जिसमें कोविड संक्रमण के कारण फेफड़ों के नाजुक हिस्सों को नुकसान पहुंचता है और फेफड़ों में झिल्ली बन जाती है। फेफड़े कम एक्टिव रह जाते है जिससे ऑक्सीजन और कार्बन-डाइऑक्साइड एक्सचेंज होना कम हो जाता है। अगर सही तरह से इलाज न हो तो जिंदगी भर फेफड़ों संबंधी परेशानी रह सकती है। जो मरीज मोटापा, फेफड़ों की बीमारी, डायबिटीज इत्यादि से पीड़ित होने के अलावा कोरोना संक्रमण की चपेट में आ चुके है और लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रह चुके हैं, उन्हें पल्मोनरी फाइब्रोसिस का खतरा ज्यादा है। यह समस्या ज्दातर 60 साल से अधिक आयु के मरीजों (जो कोविड पश्चात नेगेटिव हो चुके है) में देखने को मिलती है लेकिन युवा मरीजों में भी हो सकती है।
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पल्मोनरी फाइब्रोसिस समस्या में करें ब्रिदिंग एक्सरसाइज
सम्मत अस्पताल वरिष्ठ चिकित्सक एवं एमडी डॉ. श्रद्धा मिनोचा ने बताया कि
जिन मरीजों को पल्मोनरी फाइब्रोसिस की समस्या है, उनके लिए ब्रिदिंग एक्सरसाइज बहुत काम आती है। ऐसे मरीजों के लिए फेफड़ों पर बिना कोई अतिरिक्त दबाव डाले आराम से गहरी सांसे लेना और धीरे-धीरे छोड़ना बहुत लाभदायक होता है। हालांकि जिन मरीजों की स्थिति गंभीर होती है, उनके लिए चेस्ट फिजियोथेरेपी की जरूरत पड़ती है। इन थेरेपी की मदद से फेफड़ों में जमा बलगम को बाहर निकालने में काफी मदद मिलती है।
उपाय:
संक्रमण ठीक होने के बाद भी मरीज को कुछ दिनों तक ऑक्सीजन पर रखें
खून पतला करने के लिए चिकित्सक द्वारा दी गई दवाइयां समय पर लें।
चिकित्सक को समय-समय पर रिपोर्ट बताते रहना चाहिए।
भोजना का ध्यान रखना चाहिए
प्रतिदिन योग, प्राणायाम करते रहना चाहिए।
स्वास्थ्य मंत्री ने किया ट्वीट, सरकारी अस्पतालों में बनेंगे स्पेशल वार्ड:
पोस्ट कोविड सिंड्रोम के लिए अस्पताल प्रशासन के पास कोई रिकॉर्ड नहीं हैं। प्रशासन की ओर से केवल कोविड 19 का रिकॉर्ड ही बनाया जा रहा है। इसके अलावा स्पेशल वार्ड भी नहीं बनाए गए। रविवार को स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने ट्विटर पर पोस्ट डालकर प्रदेश के अस्पतालों में स्पेशल वार्ड बनाने के बारे में कहा है। उन्होंने ट्विटर पर लिख है कि पोस्ट कोरोना इंफेक्सन से निपटने के लिए सरकारी अस्पतालों में स्पेशल वार्ड बनेंगे।
यह पोस्ट कोविड कंपलिकेशनस हैं और इसका कोई रिकॉर्ड नहीं होता। हमारे पास केवल कोविड से हुई मौत के डाटा ही हैं।
-अशोक कुमार, सिविल सर्जन, महेंद्रगढ़।
केस:1
कृष्णा कॉलोनी में लगभग 62 वर्षीय अधेेड़ कोरोना पॉजिटिव था। कई दिन तक वह नारनौल निजी अस्पताल में रहा। उसकी कोविड रिपोर्ट नेगेटिव आ गई थी। उसके बाद उसको सांस की दिक्कत हो गई थी। एक सप्ताह पहले उसकी मौत हो गई थी।
केस: 2
खादी भंडार के पास लगभग 55 वर्षीय महिला कोरोना पॉजिटिव थी जिसका इलाज रेवाड़ी निजी अस्पताल में चल रहा था। उसकी रिपोर्ट नेगेटिव आ गई थी। तीन-चार दिन पहले उसकी गुरुग्राम के निजी अस्पताल में मौत हो गई।
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30 फीसदी गंभीर मरीजों के बन रहे हैं खून के थक्के
सर गंगाराम अस्पताल के बोर्ड ऑफ एडवाइजर डॉ. प्रदीप भारद्वाज ने बताया कि
पल्मोनरी एम्बोलिज्म दूसरी समस्या है जिसका सामना कोविड-19 से ठीक हो
चुके मरीजों को करना पड़ रहा है। फेफड़े की धमनियों में ब्लॉकेज हो जाते है
जिससे फेफड़े तक खून के संचार में बाधा उत्पन्न हो जाती है। डॉ. भारद्धाज ने
बताया कि महामारी के शुरू में लग रहा था कि कोरोना वायरस श्वसन तंत्र को
संक्रमित कर रहा है। मगर अब मरीजों में खून के थक्कों को देखकर कहा जा
सकता है कि वायरस खून की नसों पर भी हमला कर रहा है। यह बहुत गंभीर
समस्या है जिसके परिणाम घातक हो सकते है। कोरोना वायरस से गंभीर रूप से बीमार 30 फीसदी तक मरीजों को खून के थक्कों के बनने की स्थिति सामने आ रही है जो जानलेवा है।
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60वर्ष से अधिक उम्र को ज्यादा:
शीला मल्टी स्पेशलिस्ट अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक एवं एमडी डॉ. प्रशांत जांगड़ा ने बताया कि पोस्ट कोविड पल्मोनरी फाइब्रोसिस एक ऐसी स्थिति है, जिसमें कोविड संक्रमण के कारण फेफड़ों के नाजुक हिस्सों को नुकसान पहुंचता है और फेफड़ों में झिल्ली बन जाती है। फेफड़े कम एक्टिव रह जाते है जिससे ऑक्सीजन और कार्बन-डाइऑक्साइड एक्सचेंज होना कम हो जाता है। अगर सही तरह से इलाज न हो तो जिंदगी भर फेफड़ों संबंधी परेशानी रह सकती है। जो मरीज मोटापा, फेफड़ों की बीमारी, डायबिटीज इत्यादि से पीड़ित होने के अलावा कोरोना संक्रमण की चपेट में आ चुके है और लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रह चुके हैं, उन्हें पल्मोनरी फाइब्रोसिस का खतरा ज्यादा है। यह समस्या ज्दातर 60 साल से अधिक आयु के मरीजों (जो कोविड पश्चात नेगेटिव हो चुके है) में देखने को मिलती है लेकिन युवा मरीजों में भी हो सकती है।
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पल्मोनरी फाइब्रोसिस समस्या में करें ब्रिदिंग एक्सरसाइज
सम्मत अस्पताल वरिष्ठ चिकित्सक एवं एमडी डॉ. श्रद्धा मिनोचा ने बताया कि
जिन मरीजों को पल्मोनरी फाइब्रोसिस की समस्या है, उनके लिए ब्रिदिंग एक्सरसाइज बहुत काम आती है। ऐसे मरीजों के लिए फेफड़ों पर बिना कोई अतिरिक्त दबाव डाले आराम से गहरी सांसे लेना और धीरे-धीरे छोड़ना बहुत लाभदायक होता है। हालांकि जिन मरीजों की स्थिति गंभीर होती है, उनके लिए चेस्ट फिजियोथेरेपी की जरूरत पड़ती है। इन थेरेपी की मदद से फेफड़ों में जमा बलगम को बाहर निकालने में काफी मदद मिलती है।
उपाय:
संक्रमण ठीक होने के बाद भी मरीज को कुछ दिनों तक ऑक्सीजन पर रखें
खून पतला करने के लिए चिकित्सक द्वारा दी गई दवाइयां समय पर लें।
चिकित्सक को समय-समय पर रिपोर्ट बताते रहना चाहिए।
भोजना का ध्यान रखना चाहिए
प्रतिदिन योग, प्राणायाम करते रहना चाहिए।
स्वास्थ्य मंत्री ने किया ट्वीट, सरकारी अस्पतालों में बनेंगे स्पेशल वार्ड:
पोस्ट कोविड सिंड्रोम के लिए अस्पताल प्रशासन के पास कोई रिकॉर्ड नहीं हैं। प्रशासन की ओर से केवल कोविड 19 का रिकॉर्ड ही बनाया जा रहा है। इसके अलावा स्पेशल वार्ड भी नहीं बनाए गए। रविवार को स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने ट्विटर पर पोस्ट डालकर प्रदेश के अस्पतालों में स्पेशल वार्ड बनाने के बारे में कहा है। उन्होंने ट्विटर पर लिख है कि पोस्ट कोरोना इंफेक्सन से निपटने के लिए सरकारी अस्पतालों में स्पेशल वार्ड बनेंगे।
यह पोस्ट कोविड कंपलिकेशनस हैं और इसका कोई रिकॉर्ड नहीं होता। हमारे पास केवल कोविड से हुई मौत के डाटा ही हैं।
-अशोक कुमार, सिविल सर्जन, महेंद्रगढ़।
केस:1
कृष्णा कॉलोनी में लगभग 62 वर्षीय अधेेड़ कोरोना पॉजिटिव था। कई दिन तक वह नारनौल निजी अस्पताल में रहा। उसकी कोविड रिपोर्ट नेगेटिव आ गई थी। उसके बाद उसको सांस की दिक्कत हो गई थी। एक सप्ताह पहले उसकी मौत हो गई थी।
केस: 2
खादी भंडार के पास लगभग 55 वर्षीय महिला कोरोना पॉजिटिव थी जिसका इलाज रेवाड़ी निजी अस्पताल में चल रहा था। उसकी रिपोर्ट नेगेटिव आ गई थी। तीन-चार दिन पहले उसकी गुरुग्राम के निजी अस्पताल में मौत हो गई।