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जर्जर भवनों में प्ले स्कूल: मासूमों पर मंडरा रहा खतरे का साया
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नारनौल। अगर आपके लाडले प्रदेश सरकार द्वारा बनाए गए प्ले स्कूलों में पढ़ते हैं तो उनकी जान को खतरा हो सकता है। क्योंकि जिले के कुछ प्ले स्कूल जर्जर भवनों में चल रहे हैं। प्रदेश सरकार ने नई शिक्षा नीति के तहत भले ही प्ले स्कूल बना दिए हों, लेकिन इनको शुरू करने से पहले कोई तैयारी नहीं की गई। स्कूलों में बिजली, पानी, शौचालय तथा भवन जैसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं हैं। अमर उजाला टीम ने नारनौल शहर के वार्ड नंबर 18 और 20 के प्ले स्कूलों का जायजा लिया। वार्ड नंबर 18 में एक कमरे में ही प्ले स्कूल चल रहा है वह भी कमरा जर्जर है। इससे दरारें हैं। बारिश में पानी भी टपकता है। वार्ड नंबर 20 के प्ले स्कूल को प्राथमिक स्कूल में शिफ्ट कर दिया गया है। स्कूल का भवन जर्जर है। सिलिंग से प्लास्टर गिरता है और दरारें हैं। प्ले स्कूल स्टाफ ने बताया कि तीन बार इस भवन को कंडम घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद प्ले स्कूल को प्राथमिक स्कूल में शिफ्ट कर दिया गया। अगर कोई अनहोनी होती है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?
वहीं आंगनबाड़ी केंद्रों में बने अधिकतर प्ले स्कूलों में न तो बिजली और न ही पानी है। 45 डिग्री सेल्सियस तापमान में बच्चे झुलसने को मजबूर हैं। अभी बिजली एवं पानी की व्यवस्था होने में कितना समय लगे, इसका भी कोई जवाब किसी के पास नहीं है। स्कूलों के अंदर शौचालय तक नहीं है, जिन स्कूलों में शौचालय है तो वहां पानी की टंकी से कनेक्शन नहीं हैं। सीडीपीओ सरला यादव ने बताया कि आठ से दस वर्ष पहले महिला बाल विकास विभाग की ओर से बिजली मीटर लगाए गए थे। मीटर तो लग गए थे, लेकिन कनेक्शन तक नहीं हुआ था। विभाग की ओर से बिल जारी होने लग गए थे। उसके बाद सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर बिजली मीटर कटा दिए।
बाक्स:
मिट्टी में खेल कर लौट रहे घर
सरकार की ओर से बनाए गए प्ले स्कूलों में बच्चों के खेलने के लिए खिलौने तक नहीं पहुंचे हैं। बच्चे केवल मिट्टी में खेलकर ही घर चले जा रहे हैं। एक महीने के दौरान स्कूूूलों में केवल प्लास्टिक की मेज कुर्सियां पहुंची हैं। जिले के प्ले स्कूलों में प्रवेश का दौर जारी रही है। पिछले एक महीने के दौरान सभी प्ले स्कूलों में लगभग 850 विद्यार्थी प्रवेश ले चुके हैं।
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वर्जन
142 स्कूलों में से 36 स्कूलों के लिए वॉल पेंटिंग के लिए पैसा आया है। पेंटिंग भी उन्हीं प्ले स्कूलों में कराई जाएगी जो राजकीय स्कूल परिसर में बने हैं। रिपेयरिंग के लिए सभी खंडों से लिस्ट मांगी गई है। जैसे ही लिस्ट आएगी हम विभाग को भेज देंगे। अभी स्कूल खुले हैं तो धीरे-धीरे ही व्यवस्था हो पाएगी।- संगीता यादव, डीडीपीओ।
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वर्जन
जर्जर प्ले स्कूल होने का मामला संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा है तो मुख्यमंत्री मनोहर लाल के समक्ष यह मुद्दा उठाएंगे। सरकार से समस्या दूर के लिए बजट जारी कराएंगे।- रामबिलास शर्मा, पूर्व मंत्री।
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वहीं आंगनबाड़ी केंद्रों में बने अधिकतर प्ले स्कूलों में न तो बिजली और न ही पानी है। 45 डिग्री सेल्सियस तापमान में बच्चे झुलसने को मजबूर हैं। अभी बिजली एवं पानी की व्यवस्था होने में कितना समय लगे, इसका भी कोई जवाब किसी के पास नहीं है। स्कूलों के अंदर शौचालय तक नहीं है, जिन स्कूलों में शौचालय है तो वहां पानी की टंकी से कनेक्शन नहीं हैं। सीडीपीओ सरला यादव ने बताया कि आठ से दस वर्ष पहले महिला बाल विकास विभाग की ओर से बिजली मीटर लगाए गए थे। मीटर तो लग गए थे, लेकिन कनेक्शन तक नहीं हुआ था। विभाग की ओर से बिल जारी होने लग गए थे। उसके बाद सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर बिजली मीटर कटा दिए।
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मिट्टी में खेल कर लौट रहे घर
सरकार की ओर से बनाए गए प्ले स्कूलों में बच्चों के खेलने के लिए खिलौने तक नहीं पहुंचे हैं। बच्चे केवल मिट्टी में खेलकर ही घर चले जा रहे हैं। एक महीने के दौरान स्कूूूलों में केवल प्लास्टिक की मेज कुर्सियां पहुंची हैं। जिले के प्ले स्कूलों में प्रवेश का दौर जारी रही है। पिछले एक महीने के दौरान सभी प्ले स्कूलों में लगभग 850 विद्यार्थी प्रवेश ले चुके हैं।
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142 स्कूलों में से 36 स्कूलों के लिए वॉल पेंटिंग के लिए पैसा आया है। पेंटिंग भी उन्हीं प्ले स्कूलों में कराई जाएगी जो राजकीय स्कूल परिसर में बने हैं। रिपेयरिंग के लिए सभी खंडों से लिस्ट मांगी गई है। जैसे ही लिस्ट आएगी हम विभाग को भेज देंगे। अभी स्कूल खुले हैं तो धीरे-धीरे ही व्यवस्था हो पाएगी।- संगीता यादव, डीडीपीओ।
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वर्जन
जर्जर प्ले स्कूल होने का मामला संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा है तो मुख्यमंत्री मनोहर लाल के समक्ष यह मुद्दा उठाएंगे। सरकार से समस्या दूर के लिए बजट जारी कराएंगे।- रामबिलास शर्मा, पूर्व मंत्री।