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Mahendragarh-Narnaul News: शहादत माटी कलश यात्रा का स्वागत करने के लिए उमड़े लोग

Mon, 03 Nov 2025 12:11 AM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Mon, 03 Nov 2025 12:11 AM IST
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People gathered to welcome the Martyrdom Mati Kalash Yatra.
फोटो संख्या:67- शहर के सब्जी मंडी रोड पर रेलांगला शहादत माटी कलश यात्रा निकालते आयोजक--स्रोत -आ
महेंद्रगढ़। वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध में शहीद हुए 110 वीर जवानों की याद में अहीर धाम से लाई गई शहादत माटी कलश यात्रा रविवार को 18 राज्यों से होती हुई महेंद्रगढ़ पहुंची। इस दौरान कलश यात्रा का स्वागत करने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़ पड़े।
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अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा के तत्वावधान में निकाली गई इस यात्रा का नगर में जगह-जगह भव्य अभिनंदन किया गया। शहर के राव तुलाराम चौक के समीप स्थित पाल पैलेस में यात्रा के अभिनंदन और शहीदों को नमन करने के लिए श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता रेजांगला युद्ध के प्रत्यक्ष गवाह बेवल निवासी हवलदार गजे सिंह ने की। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कहा कि रेजांगला के ये वीर सदा अमर रहेंगे और उनके बलिदान की यह शहादत माटी आने वाली पीढ़ियों को सदैव राष्ट्रप्रेम और साहस की प्रेरणा देती रहेगी।
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श्रद्धांजलि सभा के बाद कलश यात्रा शहर के प्रमुख बाजारों बालाजी चाैक, सब्जी मंडी, भगवान परशुराम चाैक, मसानी चाैक, गाोशाला राेड से होती हुई माजरा चुंगी (रेजांगला चौक) पहुंची, जहां से गांव झुक में यात्रा का समापन हुआ।
मार्ग में अनेक सामाजिक, धार्मिक संगठनों एवं व्यापारियों ने पुष्पवर्षा कर यात्रा का अभिनंदन किया और शहादत माटी कलश को नमन किया। पूर्व मंत्री प्रो. रामविलास शर्मा ने श्री परशुराम भवन के पास कलश यात्रा का भव्य स्वागत किया।
सभा में वक्ताओं ने अहीर रेजिमेंट के गठन की मांग की। इस पर मुख्यातिथि सांसद धर्मवीर सिंह और विधायक कंवर सिंह यादव ने समर्थन देते हुए मांग को आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया। इस दौरान रेजांगला युद्ध और उसके शौर्यगाथा पर आधारित प्रदर्शनी लगाई गई।
यात्रा के प्रदेश संयोजक राव रमेश पायलट व बलवान फौजी ने कहा कि रेजांगला बैटल में 124 वीर जवानों में से 110 शहीद हो गए थे और चार सैनिक युद्धबंदी बना लिए गए थे। इनमें 60 जवान हरियाणा के थे, जिनमें रेवाड़ी जिले के 26 और महेंद्रगढ़ जिले के 16 वीर जवान शामिल थे।
यह युद्ध विश्व सैन्य इतिहास की सबसे दुर्लभतम लड़ाइयों में से एक मानी जाती है। केवल 124 भारतीय जवानों ने लगभग 3,500 चीनी सैनिकों का सामना किया। चूशूल (रेजांगला) क्षेत्र की विकट परिस्थितियों जहां तापमान माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक जाता है और ऑक्सीजन का स्तर मात्र 25 से 40 प्रतिशत रहता है। इसके बावजूद इन मैदानी अहीर जवानों ने अदम्य साहस दिखाया।

उन्होंने अंतिम सांस और अंतिम गोली तक लड़ते हुए देश की सीमाओं की रक्षा की। इस अद्वितीय पराक्रम के लिए भारत सरकार ने एक परमवीर चक्र, आठ वीर चक्र और चार सेना मेडल प्रदान किए। इतिहासकारों और सैन्य जनरलों का मत है कि रेजांगला के सभी 124 जवान परमवीर थे। इस मौके पर महासभा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश यादव, महिला विंग की प्रमुख साध्वी पुष्पा शास्त्री सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
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