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प्रतिदिन 6400 लीटर दूध उत्पादन के साथ पालड़ी पनिहारा महेंद्रगढ़ में पहले पायदान पर

Thu, 07 Oct 2021 12:09 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 07 Oct 2021 12:09 AM IST
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Paldi Panihara at the first position in Mahendragarh with 6400 liters of milk production per day
गांव पालड़ी पनिहारा रोजाना 6400 लीटर दूध उत्पादन के साथ जिलेभर में प्रथम स्थान पर है। ग्रामीणों द्वारा प्रतिदिन 800 लीटर दूध की आपूर्ति शहर में की जाती है। प्रत्येक माह 1,92,000 लीटर दूध का उत्पादन किया जा रहा है। गांव के 300 परिवारों ने पशु पालन को आजीविका बनाया है। दूध एवं दुग्ध उत्पादों की बिक्री से होने वाली आमदनी इनके परिवारों पर निर्भर हैं।
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गांव वर्ष 2013 से 2015 तक लगातार तीन वर्ष मुर्राह गांव घोषित हुआ था। दूध उत्पादन में पहले पायदान पर पहुंचने के लिए ग्रामीण पिछले 20 वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों ने स्वयं के प्रयासों से 30 लाख रुपये का चंदा एकत्रित कर पशु अस्पताल का भी निर्माण करा पशु पालन एवं डेयरी विभाग को सौंपा। इसके बाद सरकार द्वारा भी 40 लाख रुपये की लागत से अस्पताल का दूसरा भवन भी तैयार किया गया। नस्ल सुधार को लेकर ग्रामीणों की अधिक रचि के चलते 20 वर्षों के संघर्ष में गांव में आज अच्छी गुणवत्ता के पशु प्रत्येक घर में हैं।
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वर्ष 2008 से ही ग्रामीणों की नस्ल सुधार में ज्यादा दिलचस्पी रही है जिसकी शुरूआत उन्होंने कृत्रिम गर्भाधान से की। पिछले 12 वर्षों में पशु पालकों ने 9008 बार पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान कराया है।
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पशु विज्ञान केंद्र महेंद्रगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में जिला की 19 प्रगतिशील पशु पालक महिलाओं को 3 हजार रुपये का पुरस्कार दिया गया था जिसमें गांव पालड़ी पनिहारा की तीन महिला पशु पालक भी शामिल थी। ग्रामीणों ने पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखते हुए दो एकड़ में बने पशु अस्पताल में 1400 पौधे लगाए थे जो आज पेड़ बन चुके हैं। समय-समय पर ग्रामीण पशु अस्पताल में विकास कार्य भी लगातार कराते आ रहे हैं।
ग्रामीणों के लंबे प्रयासों से नस्ल सुधार हुआ है। अधिकांश पशु पालक कृत्रिम गर्भाधान कराते हैं जिससे नस्ल सुधार हुआ। गांव में 1100 के लगभग पशु हैं जिनमें से 400 दुधारू भैंस हैं जो औसतन 16 लीटर दूध प्रतिदिन देती हैं। -डॉ. मनोज यादव, पशु चिकित्सा अधिकारी ।

गांव के पशुपालक पिछले 20 वर्षों से नस्ल सुधार को लेकर जागरूक हैं। कृत्रिम गर्भाधान से गांव में पशुओं की नस्ल में काफी बड़े स्तर पर सुधार हुआ है। पशुपालक पशुओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देते हैं। दूध उत्पादन में जिले में यह गांव अव्वल है। - डॉ. सुरेंद्र सिंह, जीवीएच पालड़ी-पनिहारा।
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