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Mahendragarh-Narnaul News: शामलात भूमि पर कब्जे को नियमित कराने के लिए सालभर से आए महज 27 आवेदन
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फोटो नंबर- 07सरजीत चौधरी, गांव- बुढवाल
नारनौल। जानकारी के अभाव में शामलात भूमि पर कब्जे को नियमित कराने के लिए सालभर में जिले से केवल 27 आवेदन आए हैं। कई आवेदन केवल पंचायत स्तर पर ही लंबित चल रहे हैं। वहीं नारनौल खंड से अभी तक एक भी आवेदन बीडीपीओ कार्यालय में सबमिट नहीं हुआ है और करीब 30 से 40 आवेदन ग्राम पंचायत स्तर पर लंबित चल रहे है।
इस बारे में ग्रामीणों ने बताया कि उनके पास योजना के तहत आवेदन प्रक्रिया, अंतिम तिथि, दस्तावेजों और शर्तों की उचित जानकारी नहीं थी। वहीं योजना का संचालन सुस्त रवैये से किया गया है। इस कारण कई लोग योजना के तहत पात्र होते हुए भी अंतिम तिथि तक आवेदन नहीं कर पाए।
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शर्तें पूरी न होना भी कम आवेदन का कारण
इस योजना के पात्र वही लोग थे जिनके मकान पंचायती भूमि पर 31 मार्च 2004 या उससे पहले के बने हैं। निर्मित व खुला क्षेत्र मिलाकर 500 वर्ग गज से अधिक नहीं होना चाहिए। जमाबंदी, खसरा गिरदावरी, साइट प्लान, फोटो व कब्जे का 20 साल पुराना सबूत जैसे बिजली बिल व कोई कानूनी दस्तावेज शामिल है। अनिवार्य शर्तें पूरी नहीं होने के कारण भी योजना के तहत अनुमान की तुलना में कम आवेदन आए हैं।
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सभी गांवों में मुनादी कराने का दावा
नारनौल खंड से अंतिम तिथि बीत जाने के बाद भी एक भी आवेदन बीडीपीओ कार्यालय में सबमिट नहीं हुआ है। नारनौल बीडीपीओ रेणुलता यादव ने बताया कि योजना के बारे में लोगों तक जानकारी पहुंचाने के लिए सभी गांवों में मुनादी करवाई गई थी और विज्ञापन के जरिए जानकारी भी दी गई थी। वहीं अनिवार्य शर्तों व दस्तावेजों की जानकारी के लिए पर्चे भी चस्पा किए गए थे। उन्होंने बताया कि नारनौल खंड से अभी करीब 35 से 40 आवेदन पंचायत स्तर पर लंबित है।
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कहां से आए कितने आवेदन
योजना के तहत नारनौल खंड से शून्य, नांगल चौधरी खंड से 13, सतनाली खंड से 6, कनीना खंड से 6 और अटेली खंड से 2 आवेदन जिला पंचायत कार्यालय में जमा किए गए हैं।
बॉक्स
गांव में योजना के बारे में कोई मुनादी नहीं कराई गई और न ही आवश्यक दस्तावेजों व अनिवार्य शर्तों के बारे में जानकारी मिली। जिस कारण निर्धारित अंतिम तिथि तक आवेदन नहीं कर पाए।-सरजीत चौधरी, गांव बुढवाल
बॉक्स
अनिवार्य शर्तों व दस्तावेजों की उचित जानकारी नहीं थी। वहीं ग्राम पंचायत व प्रशासन की ओर से भी सुस्त रवैया अपनाया गया। इस कारण आवेदन नहीं कर पाए।-श्योराम रावत, गांव रायमलिकपुर
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वर्जन :
योजना के तहत जो आवेदन आए है, उनकी जांच का कार्य किया जा रहा है। इसके बाद आवेदन उच्च विभाग भेजे जाएंगे।-प्रमोद कुमार, डीडीपीओ, नारनौल
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इस बारे में ग्रामीणों ने बताया कि उनके पास योजना के तहत आवेदन प्रक्रिया, अंतिम तिथि, दस्तावेजों और शर्तों की उचित जानकारी नहीं थी। वहीं योजना का संचालन सुस्त रवैये से किया गया है। इस कारण कई लोग योजना के तहत पात्र होते हुए भी अंतिम तिथि तक आवेदन नहीं कर पाए।
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शर्तें पूरी न होना भी कम आवेदन का कारण
इस योजना के पात्र वही लोग थे जिनके मकान पंचायती भूमि पर 31 मार्च 2004 या उससे पहले के बने हैं। निर्मित व खुला क्षेत्र मिलाकर 500 वर्ग गज से अधिक नहीं होना चाहिए। जमाबंदी, खसरा गिरदावरी, साइट प्लान, फोटो व कब्जे का 20 साल पुराना सबूत जैसे बिजली बिल व कोई कानूनी दस्तावेज शामिल है। अनिवार्य शर्तें पूरी नहीं होने के कारण भी योजना के तहत अनुमान की तुलना में कम आवेदन आए हैं।
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सभी गांवों में मुनादी कराने का दावा
नारनौल खंड से अंतिम तिथि बीत जाने के बाद भी एक भी आवेदन बीडीपीओ कार्यालय में सबमिट नहीं हुआ है। नारनौल बीडीपीओ रेणुलता यादव ने बताया कि योजना के बारे में लोगों तक जानकारी पहुंचाने के लिए सभी गांवों में मुनादी करवाई गई थी और विज्ञापन के जरिए जानकारी भी दी गई थी। वहीं अनिवार्य शर्तों व दस्तावेजों की जानकारी के लिए पर्चे भी चस्पा किए गए थे। उन्होंने बताया कि नारनौल खंड से अभी करीब 35 से 40 आवेदन पंचायत स्तर पर लंबित है।
कहां से आए कितने आवेदन
योजना के तहत नारनौल खंड से शून्य, नांगल चौधरी खंड से 13, सतनाली खंड से 6, कनीना खंड से 6 और अटेली खंड से 2 आवेदन जिला पंचायत कार्यालय में जमा किए गए हैं।
बॉक्स
गांव में योजना के बारे में कोई मुनादी नहीं कराई गई और न ही आवश्यक दस्तावेजों व अनिवार्य शर्तों के बारे में जानकारी मिली। जिस कारण निर्धारित अंतिम तिथि तक आवेदन नहीं कर पाए।-सरजीत चौधरी, गांव बुढवाल
बॉक्स
अनिवार्य शर्तों व दस्तावेजों की उचित जानकारी नहीं थी। वहीं ग्राम पंचायत व प्रशासन की ओर से भी सुस्त रवैया अपनाया गया। इस कारण आवेदन नहीं कर पाए।-श्योराम रावत, गांव रायमलिकपुर
वर्जन :
योजना के तहत जो आवेदन आए है, उनकी जांच का कार्य किया जा रहा है। इसके बाद आवेदन उच्च विभाग भेजे जाएंगे।-प्रमोद कुमार, डीडीपीओ, नारनौल