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अधिकारी विकास कार्यों की गति के साथ उनकी मॉनटिरिंग पर फोकस करें ः उपायुक्त
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पंचायत विभाग के अधिकारियों की बैठक लेते उपायुक्त अजय कुमार। संवाद
- फोटो : Narnol
नई पंचायतों के गठन तक विकास कार्यों की पूरी जिम्मेदारी अधिकारियों के कंधों पर हैं। अधिकारी विकास कार्यों की गति के साथ-साथ उसकी मॉनिटरिंग पर भी विशेष फोकस रखें। हर कार्य की निर्धारित समय पर मंजूरी लें और उसकी पूरी निगरानी करने के बाद सरकार के नियमों अनुसार उसका भुगतान किया जाए। नियमों की अनदेखी करके अगर किसी ने भुगतान किया तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। कोई भी भुगतान स्वीकृति तथा वर्क ऑर्डर के नहीं होना चाहिए। यह निर्देश उपायुक्त अजय कुमार ने वीरवार को लघु सचिवालय में आयोजित पंचायती विभाग के अधिकारियों की बैठक में दिए।
उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि हरियाणा सरकार विकास कार्यों की गति के साथ-साथ गुणवत्ता पर भी विशेष फोकस रखती है। अगर किसी ठेकेदार ने बिना वर्क ऑर्डर के कार्य किया है तो उसको किसी भी सूरत में भुगतान नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पंचायतों के गठन तक सारा जिम्मा अधिकारियों पर है। राज्य सरकार ने संबंधित बीडीपीओ को 25 हजार रुपये तक के कार्यों की पावर दी है। इससे अधिक 10 लाख रुपये तक की विकास कार्यों की मंजूरी संबंधित एसडीएम से मिलेगी। 20 लाख रुपये तक की मंजूरी जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी देंगे तथा 20 लाख से अधिक के विकास कार्यों की मंजूरी केवल सरकार से लेनी होगी।
उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो भी कार्य हो उसकी एमबी अच्छी तरह से भरी जाए। उसमें यह भी सुनिश्चित किया जाए कि एमबी भरते समय तारीख जरूर डाली जाए। उन्होंने कहा कि बिना वर्क ऑर्डर जारी किए कोई भी कार्य मान्य नहीं होगा। सरकार के नियम अनुसार सभी प्रकार के प्रोसीजर फॉलो करने के बाद ही वर्क ऑर्डर जारी होगा। उसके बाद अधिकारी उस काम की पूरी निगरानी रखेंगे। कार्य की गुणवत्ता पर किसी भी प्रकार का समझौता मंजूर नहीं होगा। किसी भी फर्म को भुगतान तभी किया जाएगा जब इन सभी पैमाने पर कार्य खरा उतरेगा। डीसी ने कहा कि वित्त वर्ष के अंत में एक साथ किसी भी प्रकार का भुगतान नहीं होना चाहिए। विकास कार्यों से संबंधित जो भी भुगतान है वह साथ-साथ जारी रहे। इस दौरान यह सुनिश्चित किया जाए कि उसमें नियमों की पालना हो।
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उन्होंने बताया कि इस संबंध में सीएम विंडो आदि पर आने वाली शिकायतों को भी जल्द से जल्द निपटाया जाए। ऐसे मामलों में एक्शन टेकन रिपोर्ट भेजते समय सारी डिटेल भेजी जाए ताकि गलत शिकायत का सरकार को तुरंत जवाब भेजा जा सके।
ग्रामीण क्षेत्रों की समस्या के समाधान के लिए ग्राम दर्शन पोर्टल का प्रयोग करें नागरिक
ग्रामीण क्षेत्र के विकास कार्यों में ग्रामीणों की सीधी भागीदारी के लिए हरियाणा सरकार ने ग्राम दर्शन पोर्टल शुरू किया गया है। इस पोर्टल में विकास कार्यों संबंधी कोई भी प्रस्ताव सीधे सरकार को दिया जा सकता है। साथ ही लोग गांव के विकास कार्य संबंधित शिकायत भी इसमें दे सकते हैं।
उपायुक्त ने बताया कि इस पोर्टल पर केवल वही आवेदक शिकायत दर्ज कर सकता है जिसका परिवार पहचान पत्र होगा। ग्रामीणों को अगर विकास कार्यों से जुड़ी कोई शिकायत है या फिर कोई सुझाव देना है तो किसी कार्यालय के चक्कर काटने की और अन्य कहीं जाने की जरूरत नहीं। लैपटॉप या मोबाइल के माध्यम से इस पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं। ग्रामीणों के विकास कार्यों संबंधी सुझाव और शिकायतों के लिए ऑनलाइन पोर्टल ग्राम दर्शन लांच किया है। ग्रामीणों द्वारा दिए गए सुझावों के आधार पर भविष्य की विकास योजनाओं का खाका भी तैयार होगा। ग्राम दर्शन पोर्टल पर की जाने वाली शिकायतों को सीएम विंडो के साथ लिंक किया गया है ताकि शिकायतों का दोहराव न हो। ग्रामीणों द्वारा दिया गया सुझाव और मांग सीधे सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, विधायक और सांसद को दिखाई देंगे। सभी जनप्रतिनिधियों को उनके अधिकार क्षेत्र के ही सुझाव डैशबोर्ड पर दिखाई देंगे। इसके बाद संबंधित जनप्रतिनिधि अपनी संस्तुति के साथ आवेदन को आगे बढ़ा सकेंगे। उन्होंने ग्रामीणों से आह्वान किया कि वे इस ग्राम दर्शन पोर्टल का अधिक से अधिक उपयोग करें। तकनीकी के इस युग में राज्य के नागरिकों को यह बहुत उपयोगी पोर्टल मिला है।
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उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि हरियाणा सरकार विकास कार्यों की गति के साथ-साथ गुणवत्ता पर भी विशेष फोकस रखती है। अगर किसी ठेकेदार ने बिना वर्क ऑर्डर के कार्य किया है तो उसको किसी भी सूरत में भुगतान नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पंचायतों के गठन तक सारा जिम्मा अधिकारियों पर है। राज्य सरकार ने संबंधित बीडीपीओ को 25 हजार रुपये तक के कार्यों की पावर दी है। इससे अधिक 10 लाख रुपये तक की विकास कार्यों की मंजूरी संबंधित एसडीएम से मिलेगी। 20 लाख रुपये तक की मंजूरी जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी देंगे तथा 20 लाख से अधिक के विकास कार्यों की मंजूरी केवल सरकार से लेनी होगी।
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उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो भी कार्य हो उसकी एमबी अच्छी तरह से भरी जाए। उसमें यह भी सुनिश्चित किया जाए कि एमबी भरते समय तारीख जरूर डाली जाए। उन्होंने कहा कि बिना वर्क ऑर्डर जारी किए कोई भी कार्य मान्य नहीं होगा। सरकार के नियम अनुसार सभी प्रकार के प्रोसीजर फॉलो करने के बाद ही वर्क ऑर्डर जारी होगा। उसके बाद अधिकारी उस काम की पूरी निगरानी रखेंगे। कार्य की गुणवत्ता पर किसी भी प्रकार का समझौता मंजूर नहीं होगा। किसी भी फर्म को भुगतान तभी किया जाएगा जब इन सभी पैमाने पर कार्य खरा उतरेगा। डीसी ने कहा कि वित्त वर्ष के अंत में एक साथ किसी भी प्रकार का भुगतान नहीं होना चाहिए। विकास कार्यों से संबंधित जो भी भुगतान है वह साथ-साथ जारी रहे। इस दौरान यह सुनिश्चित किया जाए कि उसमें नियमों की पालना हो।
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उन्होंने बताया कि इस संबंध में सीएम विंडो आदि पर आने वाली शिकायतों को भी जल्द से जल्द निपटाया जाए। ऐसे मामलों में एक्शन टेकन रिपोर्ट भेजते समय सारी डिटेल भेजी जाए ताकि गलत शिकायत का सरकार को तुरंत जवाब भेजा जा सके।
ग्रामीण क्षेत्रों की समस्या के समाधान के लिए ग्राम दर्शन पोर्टल का प्रयोग करें नागरिक
ग्रामीण क्षेत्र के विकास कार्यों में ग्रामीणों की सीधी भागीदारी के लिए हरियाणा सरकार ने ग्राम दर्शन पोर्टल शुरू किया गया है। इस पोर्टल में विकास कार्यों संबंधी कोई भी प्रस्ताव सीधे सरकार को दिया जा सकता है। साथ ही लोग गांव के विकास कार्य संबंधित शिकायत भी इसमें दे सकते हैं।
उपायुक्त ने बताया कि इस पोर्टल पर केवल वही आवेदक शिकायत दर्ज कर सकता है जिसका परिवार पहचान पत्र होगा। ग्रामीणों को अगर विकास कार्यों से जुड़ी कोई शिकायत है या फिर कोई सुझाव देना है तो किसी कार्यालय के चक्कर काटने की और अन्य कहीं जाने की जरूरत नहीं। लैपटॉप या मोबाइल के माध्यम से इस पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं। ग्रामीणों के विकास कार्यों संबंधी सुझाव और शिकायतों के लिए ऑनलाइन पोर्टल ग्राम दर्शन लांच किया है। ग्रामीणों द्वारा दिए गए सुझावों के आधार पर भविष्य की विकास योजनाओं का खाका भी तैयार होगा। ग्राम दर्शन पोर्टल पर की जाने वाली शिकायतों को सीएम विंडो के साथ लिंक किया गया है ताकि शिकायतों का दोहराव न हो। ग्रामीणों द्वारा दिया गया सुझाव और मांग सीधे सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, विधायक और सांसद को दिखाई देंगे। सभी जनप्रतिनिधियों को उनके अधिकार क्षेत्र के ही सुझाव डैशबोर्ड पर दिखाई देंगे। इसके बाद संबंधित जनप्रतिनिधि अपनी संस्तुति के साथ आवेदन को आगे बढ़ा सकेंगे। उन्होंने ग्रामीणों से आह्वान किया कि वे इस ग्राम दर्शन पोर्टल का अधिक से अधिक उपयोग करें। तकनीकी के इस युग में राज्य के नागरिकों को यह बहुत उपयोगी पोर्टल मिला है।