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नोटिस के विरोध में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गरजीं
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Mon, 09 May 2016 11:36 PM IST
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महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जिला के गिरते लिंगानुपात के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को जिम्मेवार ठहराते हुए 69 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को नोटिस दिए जाने के विरोध में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने सोमवार को शहर में जोरदार प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री और उपायुक्त के नाम एक ज्ञापन एसपी कार्यालय सहायक सुदेश पुनियां को सौंपा। इससे पूर्व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं की एक बैठक यूनियन की प्रधान संतोष ढिल्लो की अध्यक्षता में चितवन वाटिका में हुई। प्रदर्शन में सैकड़ों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं ने भाग लिया।
संतोष ढिल्लो ने बताया कि भ्रूण हत्या जैसे कृत्य के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कतई भी जिम्मेवार नहीं है बल्कि अल्ट्रासाउंड मशीन, चिकित्सक व स्वास्थ्य विभाग इसका जिम्मेवार है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता केवल गर्भवती महिला जो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को गर्भवती होने की सूचना देती है। उसका रजिस्ट्रेशन करती है यदि कोई महिला गर्भवती होने की सूचना नहीं देती और भ्रूण हत्या करवाती है। उसकी जानकारी कार्यकर्ताओं को कैसे हो सकती है। वहीं कुछ मामले आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के संज्ञान में होते हैं तो वे अपने उच्चाधिकारियों को इससे अवगत करवाती है, परंतु इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो पाती है। इसमें कार्यकर्ताओं का कोई लापरवाही नहीं है। इस मौके पर राज्य महासचिव पुष्पा दलाल, संगठन सचिव रोशनी देवी, आल इंडिया यूटीयूसी के जिला प्रधान कामरेड शेर सिंह, सचिव सुभाष चंद एडवोकेट, संयुक्त कर्मचारी मंच के महासचिव मास्टर सूबे सिंह आदि ने भी संबोधित किया।
यह है पूरा मामला
कुछ दिन पूर्व उपायुक्त संजीव कुमार ने जिले में बालिकाओं की निरंतर घट रही संख्या को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों की बैठक ली थी। इसमें कई गांवों के आंकड़ों की समीक्षा के बाद उपायुक्त ने संबंधित विभाग अधिकारियों को इस ओर सख्त से सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए थे। वहीं उपायुक्त ने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को भी सेवा समाप्त करने का नोटिस दिया था।
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उपायुक्त के आदेश पर हुई कार्रवाई
जिले के घटते लिंगानुपात की समीक्षा करने पर पाया गया कि कई आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के तो ऐसे गांव भी हैं, जहां तीन माह से एक भी लड़की ने जन्म नहीं लिया है। उपायुक्त के निर्देशानुसार महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी अनीता हुड्डा की ओर जिला महेंद्रगढ़ की 69 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नोटिस जारी कर तीन दिन के अंदर-अंदर अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया था। वहीं जवाब न देने की सूरत में एकतरफा कार्यवाही करते हुए सेवाएं समाप्त करने का फैसला लिया जाएगा।
प्रशासन के संज्ञान में आने के बाद भी नहीं होती कार्रवाई
अटेली खंड की प्रधान कृष्णा देवी, नारनौल प्रधान सुरेश देवी, नांगल चौधरी प्रधान बिमला, सविता, माया देवी, संतोष ढिल्लो आदि ने बताया कि वे अपना कार्य पूरी इमानदारी व लग्न से करती है। वहीं इस प्रकार की कोई भी सूचना उन्हें मिलती है तो वे तुरंत इसकी सूचना अपने उच्चाधिकारियों को देती है, लेकिन सूचना देने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो पाती। उन्होंने बताया कि वे लगातार प्रयासरत है कि जिले में लड़कियों की संख्या बढ़े, परंतु इसके लिए प्रशासन को भी सहयोग करना होगा।
कार्यकर्ता की प्रमुख मांगे
जिले के घटते लिंगानुपात व भ्रूण हत्या के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कतई जिम्मेवार नहीं है। इसलिए 69 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नहीं हटाया जाए, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को नियमित कर्मचारी का दर्ज दिया जाए तब तक कार्यकर्ता का न्यूनतम वेतन 18 हजार तथा सहायिका को दस हजार रुपये किया जाए, गर्मी व सर्दियों में छुट्टियां लागू की जाए, विभागीय प्रमोशन लागू करने, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के पास पूरा व साफ सुथरा राशन केंद्रों तक पहुंचाया जाए, आंगनबाड़ी केंद्रों पर बिजली, पानी, शौचालय व पंखे आदि को प्रबंधन किया जाए तथा आंगनबाड़ी केंद्रों का किराया बढ़ाया जाने की मांग रखी।
वर्करों की मांगों को नहीं मानी तो होगा आंदोलन
आंगनबाड़ी यूनियन की राज्य महासचिव पुष्पा दलाल ने कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही उनकी मांगों को नहीं माना तो जोरदार आंदोलन किया जाएगा। इसी कड़ी में 11 मई को गुड़गांव तथा 9 अगस्त को करनाल में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं की विशाल रैली आयोजित की जाएगी। अगर सरकार इसके बाद भी नहीं जागी तो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता 2 सितंबर को पूरे प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्र बंद कर हड़ताल पर रहेगी।
इन गांवों में तीन माह में एक भी लड़की नहीं
जिले के कई ऐसे गांव हैं जहां पर जनवरी से मार्च तक एक भी लड़की पैदा नहीं हुई। इनमें पालड़ी पनिहार में 7 लड़के, सरेली में 5 लड़के, इस्लामपुरा 5, तोताहेड़ी में 5, खातिवास में 5, मोहलड़ा में 5, बडग़ांव में 5, नंगला में 4, जांजडिय़ावास में 4 लड़के शामिल हैं। इन गांवों में जनवरी से मार्च तक एक भी लड़की पैदा नहीं हुई।
इन गांवों के आंकड़े भी चौंकाने वाले
लिंगानुपात में जिले के कई गांवों में आंकड़े चौंकाने वाले हैं। इन गांवों में बहुत कम लड़कियां पैदा हुई हैं। इनमें महेंद्रगढ़ के एक वार्ड में 11 लड़के एक लड़की, नारनौल के वार्ड बीस में 7-1, कांटी में 13-2, बेवल में 12-2, गोठड़ी में 6-1, ताजीपुर में 6-1, आकोदा में 6-1, नीरपुर 6-1, खातोदड़ा में 5-1, महेंद्रगढ़ के वार्ड 7 में 5-1, कुंजपुरा में 5-1, नावा में 9-2, महेंद्रगढ़ के वार्ड पांच में 9-2, ढाणी रावता में 8-2, डालनवास मेंय 11-3, मोहनपुर में 7-2, जाखनी में 7-2, डाढौत 9-3, सिहमा में 9-3, भोड़ी में 9-3, श्यामपुरा में 11-4, सिरोही भाली में 13-5, कोरिया-वास में 12-5, बवानियां में 12-5, खेड़ी में 14-6, पटीकरा में 12-6, कनीना में 21-13 का अनुपात है।
इन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिला नोटिस
महिला एवं बालच विकास विभाग की कार्यक्रम अधिकारी की ओर जिले की 69 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नोटिस दिया गया है। इनमें गांव कांटी की निर्मल शर्मा, निर्मला, भागवती, ममता, पूनम व शारदा शामिल हैं। इसी प्रकार गांव खेड़ी की संतोष, शशिकांता, सुशीला, रोशनी व परमेश्वरी, गांव केवल की सरोज, मुन्नी, अनीता व केला, कनीना में जागो, मुन्नी, अनीता, संजोगिता, राजवंती, धनवंती, शकुंतला, ममता, अनीता व सुरेश, गांव बवानियां की पूनम, बिमला, शरणकौर, सुशीला व मुन्नी, महेंद्रगढ़ के वार्ड दो की शीला, वार्ड 11 की कृष्णा, 12 की राजरानी, गांव नावा की सरोज बाला, अनीता, सुरेश व सुनीता, श्यामपुरा की कविता, पालड़ी पनिहार की सुमन, जांजडिय़ावास की मंजूबाला, ढाडौत की सुरेश, दर्शना, गांव डालनवास की शीला देवी, वंदना, सरोज, राजश्री व लक्ष्मी, तोताहेड़ी की इंद्रावती व रेश्मी, सिरोही बहाली की गुलाब, कमला, कमला, कृष्णा व सावित्री, गांव इस्लामपुरा की कृष्णा व मनीषा, ढाणी रावता की कमला व नीरज, गांव सरेहली की अनीता व निषा, कोरियावास की बिमला, मौसमी, सविता, सुनीता व सुशीला, नारनौल के वार्ड नंबर 20 की मीना, सुमंत, उषा व चंद्रकला शामिल हैं।
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संतोष ढिल्लो ने बताया कि भ्रूण हत्या जैसे कृत्य के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कतई भी जिम्मेवार नहीं है बल्कि अल्ट्रासाउंड मशीन, चिकित्सक व स्वास्थ्य विभाग इसका जिम्मेवार है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता केवल गर्भवती महिला जो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को गर्भवती होने की सूचना देती है। उसका रजिस्ट्रेशन करती है यदि कोई महिला गर्भवती होने की सूचना नहीं देती और भ्रूण हत्या करवाती है। उसकी जानकारी कार्यकर्ताओं को कैसे हो सकती है। वहीं कुछ मामले आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के संज्ञान में होते हैं तो वे अपने उच्चाधिकारियों को इससे अवगत करवाती है, परंतु इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो पाती है। इसमें कार्यकर्ताओं का कोई लापरवाही नहीं है। इस मौके पर राज्य महासचिव पुष्पा दलाल, संगठन सचिव रोशनी देवी, आल इंडिया यूटीयूसी के जिला प्रधान कामरेड शेर सिंह, सचिव सुभाष चंद एडवोकेट, संयुक्त कर्मचारी मंच के महासचिव मास्टर सूबे सिंह आदि ने भी संबोधित किया।
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कुछ दिन पूर्व उपायुक्त संजीव कुमार ने जिले में बालिकाओं की निरंतर घट रही संख्या को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों की बैठक ली थी। इसमें कई गांवों के आंकड़ों की समीक्षा के बाद उपायुक्त ने संबंधित विभाग अधिकारियों को इस ओर सख्त से सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए थे। वहीं उपायुक्त ने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को भी सेवा समाप्त करने का नोटिस दिया था।
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जिले के घटते लिंगानुपात की समीक्षा करने पर पाया गया कि कई आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के तो ऐसे गांव भी हैं, जहां तीन माह से एक भी लड़की ने जन्म नहीं लिया है। उपायुक्त के निर्देशानुसार महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी अनीता हुड्डा की ओर जिला महेंद्रगढ़ की 69 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नोटिस जारी कर तीन दिन के अंदर-अंदर अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया था। वहीं जवाब न देने की सूरत में एकतरफा कार्यवाही करते हुए सेवाएं समाप्त करने का फैसला लिया जाएगा।
प्रशासन के संज्ञान में आने के बाद भी नहीं होती कार्रवाई
अटेली खंड की प्रधान कृष्णा देवी, नारनौल प्रधान सुरेश देवी, नांगल चौधरी प्रधान बिमला, सविता, माया देवी, संतोष ढिल्लो आदि ने बताया कि वे अपना कार्य पूरी इमानदारी व लग्न से करती है। वहीं इस प्रकार की कोई भी सूचना उन्हें मिलती है तो वे तुरंत इसकी सूचना अपने उच्चाधिकारियों को देती है, लेकिन सूचना देने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो पाती। उन्होंने बताया कि वे लगातार प्रयासरत है कि जिले में लड़कियों की संख्या बढ़े, परंतु इसके लिए प्रशासन को भी सहयोग करना होगा।
कार्यकर्ता की प्रमुख मांगे
जिले के घटते लिंगानुपात व भ्रूण हत्या के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कतई जिम्मेवार नहीं है। इसलिए 69 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नहीं हटाया जाए, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को नियमित कर्मचारी का दर्ज दिया जाए तब तक कार्यकर्ता का न्यूनतम वेतन 18 हजार तथा सहायिका को दस हजार रुपये किया जाए, गर्मी व सर्दियों में छुट्टियां लागू की जाए, विभागीय प्रमोशन लागू करने, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के पास पूरा व साफ सुथरा राशन केंद्रों तक पहुंचाया जाए, आंगनबाड़ी केंद्रों पर बिजली, पानी, शौचालय व पंखे आदि को प्रबंधन किया जाए तथा आंगनबाड़ी केंद्रों का किराया बढ़ाया जाने की मांग रखी।
वर्करों की मांगों को नहीं मानी तो होगा आंदोलन
आंगनबाड़ी यूनियन की राज्य महासचिव पुष्पा दलाल ने कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही उनकी मांगों को नहीं माना तो जोरदार आंदोलन किया जाएगा। इसी कड़ी में 11 मई को गुड़गांव तथा 9 अगस्त को करनाल में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं की विशाल रैली आयोजित की जाएगी। अगर सरकार इसके बाद भी नहीं जागी तो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता 2 सितंबर को पूरे प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्र बंद कर हड़ताल पर रहेगी।
इन गांवों में तीन माह में एक भी लड़की नहीं
जिले के कई ऐसे गांव हैं जहां पर जनवरी से मार्च तक एक भी लड़की पैदा नहीं हुई। इनमें पालड़ी पनिहार में 7 लड़के, सरेली में 5 लड़के, इस्लामपुरा 5, तोताहेड़ी में 5, खातिवास में 5, मोहलड़ा में 5, बडग़ांव में 5, नंगला में 4, जांजडिय़ावास में 4 लड़के शामिल हैं। इन गांवों में जनवरी से मार्च तक एक भी लड़की पैदा नहीं हुई।
इन गांवों के आंकड़े भी चौंकाने वाले
लिंगानुपात में जिले के कई गांवों में आंकड़े चौंकाने वाले हैं। इन गांवों में बहुत कम लड़कियां पैदा हुई हैं। इनमें महेंद्रगढ़ के एक वार्ड में 11 लड़के एक लड़की, नारनौल के वार्ड बीस में 7-1, कांटी में 13-2, बेवल में 12-2, गोठड़ी में 6-1, ताजीपुर में 6-1, आकोदा में 6-1, नीरपुर 6-1, खातोदड़ा में 5-1, महेंद्रगढ़ के वार्ड 7 में 5-1, कुंजपुरा में 5-1, नावा में 9-2, महेंद्रगढ़ के वार्ड पांच में 9-2, ढाणी रावता में 8-2, डालनवास मेंय 11-3, मोहनपुर में 7-2, जाखनी में 7-2, डाढौत 9-3, सिहमा में 9-3, भोड़ी में 9-3, श्यामपुरा में 11-4, सिरोही भाली में 13-5, कोरिया-वास में 12-5, बवानियां में 12-5, खेड़ी में 14-6, पटीकरा में 12-6, कनीना में 21-13 का अनुपात है।
इन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिला नोटिस
महिला एवं बालच विकास विभाग की कार्यक्रम अधिकारी की ओर जिले की 69 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नोटिस दिया गया है। इनमें गांव कांटी की निर्मल शर्मा, निर्मला, भागवती, ममता, पूनम व शारदा शामिल हैं। इसी प्रकार गांव खेड़ी की संतोष, शशिकांता, सुशीला, रोशनी व परमेश्वरी, गांव केवल की सरोज, मुन्नी, अनीता व केला, कनीना में जागो, मुन्नी, अनीता, संजोगिता, राजवंती, धनवंती, शकुंतला, ममता, अनीता व सुरेश, गांव बवानियां की पूनम, बिमला, शरणकौर, सुशीला व मुन्नी, महेंद्रगढ़ के वार्ड दो की शीला, वार्ड 11 की कृष्णा, 12 की राजरानी, गांव नावा की सरोज बाला, अनीता, सुरेश व सुनीता, श्यामपुरा की कविता, पालड़ी पनिहार की सुमन, जांजडिय़ावास की मंजूबाला, ढाडौत की सुरेश, दर्शना, गांव डालनवास की शीला देवी, वंदना, सरोज, राजश्री व लक्ष्मी, तोताहेड़ी की इंद्रावती व रेश्मी, सिरोही बहाली की गुलाब, कमला, कमला, कृष्णा व सावित्री, गांव इस्लामपुरा की कृष्णा व मनीषा, ढाणी रावता की कमला व नीरज, गांव सरेहली की अनीता व निषा, कोरियावास की बिमला, मौसमी, सविता, सुनीता व सुशीला, नारनौल के वार्ड नंबर 20 की मीना, सुमंत, उषा व चंद्रकला शामिल हैं।