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Mahendragarh-Narnaul News: नए कानूनों से न्यायपालिका पर कम होगा भार... शीघ्र मिलेगा न्याय, पुलिस व्यवस्था में होगा सुधार
Tue, 02 Jul 2024 12:27 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Tue, 02 Jul 2024 12:27 AM IST
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फोटो संख्या:62- अधिवक्ता आलौक खैरवाल--स्रोत--संवाद
महेंद्रगढ़। केंद्र सरकार की ओर से लागू किए गए नए आपराधिक कानून से लोगों को त्वरित न्याय की उम्मीद जगी है। महिला एवं बाल अपराधों पर अंकुश लगाने की दिशा में लोग भी सरकार के नए कानूनों को मील का पत्थर मान रहे हैं।
कानूनों में क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में 1860 में बनी आईपीसी की जगह अब भारतीय न्याय संहिता, 1898 में बनी सीआरपीसी की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और 1872 के इंडियन एविडेंस एक्ट की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम के रूप में नए कानून लागू हो गए हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि पहले लोगों के केस पर तारीख पर तारीख मिलने से न्याय की प्रक्रिया बड़ी जटिल एवं लंबी होती थी, लेकिन अब तय समय में न्याय मिलने से लोगों को भी राहत मिलेगी। इसके अलावा शिकायत मिलने पर एफआईआर दर्ज करने, जांच पूरी करने, अदालत के संज्ञान लेने, दस्तावेज दाखिल करने और ट्रायल पूरा होने के बाद फैसला सुनाने तक की समय सीमा निर्धारित करना कानूनों को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।
कोई भी नागरिक अपराध के सिलसिले में कहीं भी जीरो एफआईआर दर्ज करा सकेगा। एफआईआर होने के 15 दिनों के भीतर उसे ओरिजिनल जूरिडिक्शन यानी जहां का मामला है वहां भेजना होगा। केंद्र सरकार ने जो नियम लागू किए वह आमजन की काफी परेशानियों का समाधान करने वाले हैं। लंबे समय से चल रहे कानूनों में संशोधन समय की मांग थी। केंद्र सरकार का यह फैसला न्याय प्रणाली को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।
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-अधिवक्ता आलोक खैरवाल
इस कानून के तहत महिला और बच्चों के विरुद्ध मामले को प्राथमिकता दी गई है। पहले न्याय के लिए चक्कर लगाने पड़ते थे। लेकिन अब महिलाओं व बच्चों को न्याय के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। केंद्र सरकार की ओर से नए कानून सरल बना दिया है। वहीं महिला एवं बाल अपराधों पर यह नए कानून काफी हद तक अंकुश लगाने में कारगर साबित हो सकते हैं।
-अधिवक्ता संजीव सैनी
पुराने कानून में बदलाव करके बनाया गया नया कानून अब न्याय प्रक्रिया को और सुगम बनाएगा। नया कानून को आसान व सुगम तथा समय सीमा में होने से लोगों को भी बड़ी राहत मिली है। इन कानून के तहत लोगों को जल्द ही न्याय मिल सकेगा। दुष्कर्म व पॉक्सो मामले की जांच दो माह में की जाएगी। पीड़ित को 90 दिन में रिपोर्ट दी जाएगी जो सराहनीय है।
-वरिष्ठ अधिवक्ता सतवीर सिंह यादव
केंद्र सरकार के नए कानून आमजन को राहत प्रदान करने वाले हैं। इसमें अपराध से लेकर अपराधी तक के हितों को ध्यान में रखा गया है। समय सीमा निर्धारित होने से थानों व न्यायालयों की भागदौड़ कम होगी। महिला एवं बाल अपराधों के प्रति गहरी संवेदनशीलता दिखाई गई है। इससे लोगों को जल्द ही न्याय मिल जाएगा। इसके अलावा एक से ज्यादा चोरी करने के आरोपी को पांच साल की सजा का प्रावधान दिया गया है व पीड़ित को एफआईआर निशुल्क देने सहित अन्य दायरे का भी सरलीकरण होने से हर वर्ग को राहत मिलेगी।
-अधिवक्ता राजीव, बार प्रधान महेंद्रगढ़
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कानूनों में क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में 1860 में बनी आईपीसी की जगह अब भारतीय न्याय संहिता, 1898 में बनी सीआरपीसी की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और 1872 के इंडियन एविडेंस एक्ट की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम के रूप में नए कानून लागू हो गए हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि पहले लोगों के केस पर तारीख पर तारीख मिलने से न्याय की प्रक्रिया बड़ी जटिल एवं लंबी होती थी, लेकिन अब तय समय में न्याय मिलने से लोगों को भी राहत मिलेगी। इसके अलावा शिकायत मिलने पर एफआईआर दर्ज करने, जांच पूरी करने, अदालत के संज्ञान लेने, दस्तावेज दाखिल करने और ट्रायल पूरा होने के बाद फैसला सुनाने तक की समय सीमा निर्धारित करना कानूनों को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।
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कोई भी नागरिक अपराध के सिलसिले में कहीं भी जीरो एफआईआर दर्ज करा सकेगा। एफआईआर होने के 15 दिनों के भीतर उसे ओरिजिनल जूरिडिक्शन यानी जहां का मामला है वहां भेजना होगा। केंद्र सरकार ने जो नियम लागू किए वह आमजन की काफी परेशानियों का समाधान करने वाले हैं। लंबे समय से चल रहे कानूनों में संशोधन समय की मांग थी। केंद्र सरकार का यह फैसला न्याय प्रणाली को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।
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-अधिवक्ता आलोक खैरवाल
इस कानून के तहत महिला और बच्चों के विरुद्ध मामले को प्राथमिकता दी गई है। पहले न्याय के लिए चक्कर लगाने पड़ते थे। लेकिन अब महिलाओं व बच्चों को न्याय के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। केंद्र सरकार की ओर से नए कानून सरल बना दिया है। वहीं महिला एवं बाल अपराधों पर यह नए कानून काफी हद तक अंकुश लगाने में कारगर साबित हो सकते हैं।
-अधिवक्ता संजीव सैनी
पुराने कानून में बदलाव करके बनाया गया नया कानून अब न्याय प्रक्रिया को और सुगम बनाएगा। नया कानून को आसान व सुगम तथा समय सीमा में होने से लोगों को भी बड़ी राहत मिली है। इन कानून के तहत लोगों को जल्द ही न्याय मिल सकेगा। दुष्कर्म व पॉक्सो मामले की जांच दो माह में की जाएगी। पीड़ित को 90 दिन में रिपोर्ट दी जाएगी जो सराहनीय है।
-वरिष्ठ अधिवक्ता सतवीर सिंह यादव
केंद्र सरकार के नए कानून आमजन को राहत प्रदान करने वाले हैं। इसमें अपराध से लेकर अपराधी तक के हितों को ध्यान में रखा गया है। समय सीमा निर्धारित होने से थानों व न्यायालयों की भागदौड़ कम होगी। महिला एवं बाल अपराधों के प्रति गहरी संवेदनशीलता दिखाई गई है। इससे लोगों को जल्द ही न्याय मिल जाएगा। इसके अलावा एक से ज्यादा चोरी करने के आरोपी को पांच साल की सजा का प्रावधान दिया गया है व पीड़ित को एफआईआर निशुल्क देने सहित अन्य दायरे का भी सरलीकरण होने से हर वर्ग को राहत मिलेगी।
-अधिवक्ता राजीव, बार प्रधान महेंद्रगढ़

फोटो संख्या:62- अधिवक्ता आलौक खैरवाल--स्रोत--संवाद

फोटो संख्या:62- अधिवक्ता आलौक खैरवाल--स्रोत--संवाद

फोटो संख्या:62- अधिवक्ता आलौक खैरवाल--स्रोत--संवाद