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गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की आवश्यकता - बीरेंद्र सिंह
ब्यूरो अमर उजाला
Updated Fri, 18 Mar 2016 12:59 AM IST
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पंचायत मंत्री
- फोटो : अमर उजाला
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आज का युग प्रतिस्पर्धा का युग है। यह प्रतिस्पर्धा केवल राज्य एवं देश तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि इसका वैश्वीकरण हो चुका है। ग्लोबल हो चुकी दुनिया में आप प्रतियोगिता से पीछे नहीं हट सकते। प्रतियोगिता में जाने के लिए मेहनत तथा अच्छी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की आवश्यकता होती है। उक्त बातें हैं ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री बीरेंद्र सिंह ने हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग द्वारा किए जा रहे दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन अवसर पर कही।
इस कार्यक्रम में केंद्रीय केबिनेट मंत्री चौ. बीरेंद्र सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होंने कहा कि हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय को एक आदर्श विश्वविद्यालय के रुप में विकसित किया जा सकता है, जिसमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विशेष जोर दिया जाए। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए आधारभूत संरचना की आवश्यकता होगी। बिना आधारभूत संरचना के हम वैश्विक परिदृश्य पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सक्षम नहीं होंगे। ठीक यही बात प्राथमिक शिक्षा पर भी लागू होती है क्योंकि उच्च शिक्षा के द्वारा प्राथमिक शिक्षा से होकर जाती है। अगर हरियाणा को विकास करना है तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर देना होगा। यह ऐसा समय है जिसमें हमें नए हरियाणा की परिकल्पना करनी होगी क्योंकि पचास साल पहले बने हरियाणा में परम्परागत ढंग से विकास की संभावनाएं क्षीण होती जा रही है। कौशल और तकनीकी संपन्न हरियाणा को रचना होगा। हमारे गाँव जब तक आर्थिक रुप से संपन्न नहीं हो जाते और यहाँ रोजगार के अवसर नहीं सृजित होते तब तक केवल भौतिक संसाधनों को प्रदान कर स्मार्ट गांव का निर्माण नहीं कर सकते। इस अवसर पर केबिनेट मंत्री ने विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए आठ गाँवों की सड़कों को सोलर लाइट से सुसज्जित करने में सहयोग देने का भी आश्वासन दिया।
हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर.सी. कुहाड़ ने कहा कि उत्पादन की गुणवत्ता ही व्यापार की सुनिश्चितता को दर्शाती है। इसके लिए कुछ परंपरागत कौशलों को जीवित करना पड़ेगा। और कुछ नए-नए आविष्कार करने पड़ेंगे। यह बहुत बड़ी चुनौती है, और हम इस चुनौती को स्वीकार कर इस पर मंथन के लिए एकत्र हुए हैं, जो इस सेमीनार का ध्येय भी है। उन्होंने कहा कि ‘हम हरियाणा में क्या बनायेंगे’ से अधिक महत्वपूर्ण है कि हम हरियाणा को कैसा बनायेंगे। संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में बीज वक्तव्य देते हुए प्रो. श्रीभगवान दहिया ने ‘हेप्निंग इन हरियाणा’ के माध्यम से यह प्रश्न उठाया कि किस प्रकार का विकास हरियाणा में हो रहा है? सकल निवेश में हरियाणा एनसीआर और इसके अतिरिक्त के जिलों में विभाजित है। ध्यान देने वाली बात यह है कि जो जिले एनसीआर में आते हैं उनमें भी निवेश में असमानता है। निवेश का अधिकतर भाग गुडगांव, पानीपत और फरीदाबाद में है। प्रो. दहिया ने हरियाणा के विकास का रोडमैप प्रस्तुत करते हुए राष्ट्रीय चरित्र, स्वाभिमान, समानता, कानून व्यवस्था और अकादमिक उपलबिधयों को मान्यता दिलाने पर जोर दिया। कार्यक्रम का संचालन अर्थशास्त्र के विद्यार्थी अल्ताफ एवं स्वागत डॉ. रंजन अनेजा ने किया। इस अवसर पर उपायुक्त संजीव वर्मा, पुलिस अधीक्षक मनीषा चौधरी, एसडीएम उमेद सिंह एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारी, विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
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इस कार्यक्रम में केंद्रीय केबिनेट मंत्री चौ. बीरेंद्र सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होंने कहा कि हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय को एक आदर्श विश्वविद्यालय के रुप में विकसित किया जा सकता है, जिसमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विशेष जोर दिया जाए। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए आधारभूत संरचना की आवश्यकता होगी। बिना आधारभूत संरचना के हम वैश्विक परिदृश्य पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सक्षम नहीं होंगे। ठीक यही बात प्राथमिक शिक्षा पर भी लागू होती है क्योंकि उच्च शिक्षा के द्वारा प्राथमिक शिक्षा से होकर जाती है। अगर हरियाणा को विकास करना है तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर देना होगा। यह ऐसा समय है जिसमें हमें नए हरियाणा की परिकल्पना करनी होगी क्योंकि पचास साल पहले बने हरियाणा में परम्परागत ढंग से विकास की संभावनाएं क्षीण होती जा रही है। कौशल और तकनीकी संपन्न हरियाणा को रचना होगा। हमारे गाँव जब तक आर्थिक रुप से संपन्न नहीं हो जाते और यहाँ रोजगार के अवसर नहीं सृजित होते तब तक केवल भौतिक संसाधनों को प्रदान कर स्मार्ट गांव का निर्माण नहीं कर सकते। इस अवसर पर केबिनेट मंत्री ने विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए आठ गाँवों की सड़कों को सोलर लाइट से सुसज्जित करने में सहयोग देने का भी आश्वासन दिया।
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हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर.सी. कुहाड़ ने कहा कि उत्पादन की गुणवत्ता ही व्यापार की सुनिश्चितता को दर्शाती है। इसके लिए कुछ परंपरागत कौशलों को जीवित करना पड़ेगा। और कुछ नए-नए आविष्कार करने पड़ेंगे। यह बहुत बड़ी चुनौती है, और हम इस चुनौती को स्वीकार कर इस पर मंथन के लिए एकत्र हुए हैं, जो इस सेमीनार का ध्येय भी है। उन्होंने कहा कि ‘हम हरियाणा में क्या बनायेंगे’ से अधिक महत्वपूर्ण है कि हम हरियाणा को कैसा बनायेंगे। संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में बीज वक्तव्य देते हुए प्रो. श्रीभगवान दहिया ने ‘हेप्निंग इन हरियाणा’ के माध्यम से यह प्रश्न उठाया कि किस प्रकार का विकास हरियाणा में हो रहा है? सकल निवेश में हरियाणा एनसीआर और इसके अतिरिक्त के जिलों में विभाजित है। ध्यान देने वाली बात यह है कि जो जिले एनसीआर में आते हैं उनमें भी निवेश में असमानता है। निवेश का अधिकतर भाग गुडगांव, पानीपत और फरीदाबाद में है। प्रो. दहिया ने हरियाणा के विकास का रोडमैप प्रस्तुत करते हुए राष्ट्रीय चरित्र, स्वाभिमान, समानता, कानून व्यवस्था और अकादमिक उपलबिधयों को मान्यता दिलाने पर जोर दिया। कार्यक्रम का संचालन अर्थशास्त्र के विद्यार्थी अल्ताफ एवं स्वागत डॉ. रंजन अनेजा ने किया। इस अवसर पर उपायुक्त संजीव वर्मा, पुलिस अधीक्षक मनीषा चौधरी, एसडीएम उमेद सिंह एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारी, विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
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