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सरकार अविलंब एसवाईएल का पानी दे
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 13 Nov 2016 12:22 AM IST
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मंडी अटेली। पूर्व विधायक नरेश यादव ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हुए भाजपा सरकार से मांग की है कि प्रदेश में उपलब्ध नहरी पानी का समान बंटवारा व सतलुज यमुना लिंक नहर का निर्माण अविलंब करवाये ताकि प्रदेश की प्यासी धरती को पानी मिल सके। यादव शनिवार को अपने कार्यालय में एक पत्रकारवार्ता में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि वह पिछले तीन दशक से पानी के लिए जनता के सहयोग से आंदोलन करते रहे है। छात्रकाल में उन्होंने छात्र जल विवाद संघर्ष समिति का गठन करके जलयुद्ध की लड़ाई आरंभ की। जो लगातार जारी रही। प्रदेश में उपलब्ध नहरी पानी का 18 लाख हेक्टेयर फीट पानी की मांग करते उन्होंने एसवाईएल के लिए भी लड़ाई लड़ी। यादव ने अपने संघर्ष की चर्चा करते हुए कहा कि 20 अगस्त 1993 में नारनौल के आजाद चौक से आंदोलन चलाया। 2000 में दक्षिण हरियाणा के अंतिम छोर नांगल चौधरी से पदयात्रा आरम्भ की और दिल्ली के राष्ट्रपति भवन पर ज्ञापन सौंपा। वहां आंदोलन में हजारों कार्यकर्ताओं ने अपनी गिरफ्तारी भी दी। इसके अलावा जब बादल सरकार ने पानी देने से मना किया तो आंदोलन को फिर से जारी किया। उस समय उन पर कार्यकर्ताओं सहित लाठी भांजी गई और जेल में डाला गया। इसके उपरांत भी जल के आंदोलन को थमने नहीं दिया और आमरण अनशन पर बैठकर आंदोलन को जारी रखा। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के ठीक पांच रोज पूर्व भी जब विधानसभा में स्वर्ण जयंती मनाई थी उस समय भी भाजपा सरकार व मुख्यमंत्री के समक्ष पानी के मुद्दे को जोर शोर से उठाया। इस मौके पर प्रीतम उर्फ टिल्लू, सीताराम सरपंच बिहाली, राकेश ठेकेदार, मणिया, मास्टर धर्मेन्द्र आदि उपस्थित थे।
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उन्होंने कहा कि वह पिछले तीन दशक से पानी के लिए जनता के सहयोग से आंदोलन करते रहे है। छात्रकाल में उन्होंने छात्र जल विवाद संघर्ष समिति का गठन करके जलयुद्ध की लड़ाई आरंभ की। जो लगातार जारी रही। प्रदेश में उपलब्ध नहरी पानी का 18 लाख हेक्टेयर फीट पानी की मांग करते उन्होंने एसवाईएल के लिए भी लड़ाई लड़ी। यादव ने अपने संघर्ष की चर्चा करते हुए कहा कि 20 अगस्त 1993 में नारनौल के आजाद चौक से आंदोलन चलाया। 2000 में दक्षिण हरियाणा के अंतिम छोर नांगल चौधरी से पदयात्रा आरम्भ की और दिल्ली के राष्ट्रपति भवन पर ज्ञापन सौंपा। वहां आंदोलन में हजारों कार्यकर्ताओं ने अपनी गिरफ्तारी भी दी। इसके अलावा जब बादल सरकार ने पानी देने से मना किया तो आंदोलन को फिर से जारी किया। उस समय उन पर कार्यकर्ताओं सहित लाठी भांजी गई और जेल में डाला गया। इसके उपरांत भी जल के आंदोलन को थमने नहीं दिया और आमरण अनशन पर बैठकर आंदोलन को जारी रखा। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के ठीक पांच रोज पूर्व भी जब विधानसभा में स्वर्ण जयंती मनाई थी उस समय भी भाजपा सरकार व मुख्यमंत्री के समक्ष पानी के मुद्दे को जोर शोर से उठाया। इस मौके पर प्रीतम उर्फ टिल्लू, सीताराम सरपंच बिहाली, राकेश ठेकेदार, मणिया, मास्टर धर्मेन्द्र आदि उपस्थित थे।
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