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चिकित्सकों ने काली पट्टी बांधकर किया काम
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 02 Jul 2016 12:44 AM IST
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चिकित्सक
- फोटो : अमर उजाला
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नारनौल में हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन सदस्यों की एक मीटिंग शुक्रवार को नागरिक अस्पताल में बुलाई गई। जिसमें नागरिक अस्पताल के सभी चिकित्सा अधिकारियों ने भाग लिया।
मीटिंग में एसोसिएशन के जिला प्रधान डा. आदित्य, महासचिव डॉ. जितेंद्र यादव व डा. संगीता सह सचिव ने उपस्थित चिकित्सकों को सातवें वेतन आयोग में चिकित्सकों के वेतन में किए जा रहे भेदभाव के बारे में हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन द्वारा लिए गए फैसलों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार ने सातवें वेतन आयोग में एनपीए (नॉन प्रेक्टिस भत्ता) बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने की बजाय 25 प्रतिशत से 20 प्रतिशत करने का फैसला लिया है। वही पहले एनपीए जो बेसिक पे का हिस्सा होता था उसे भी हटा दिया गया है। साथ ही अस्पतालों में सुरक्षा व मूलभूत सुविधाओं (निवास स्थान, कार्यस्थल व प्राथमिक सुविधाओं) के अभाव तथा चिकित्सकों की कमी के कारण कार्य के अधिक भार को लेकर राज्य के सभी चिकित्सकों में भारी रोष है। सरकार के इस निर्णय के विरोध में सभी चिकित्सकों ने शुक्रवार को काली पट्टी बांधकर रोष प्रकट किया। महासचिव ने बताया की सरकार अगर अपने निर्णय को नहीं बदलती है तो मेडिकल एसोसिएशन इसके विरोध में सख्त से सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर होगी।
मीटिंग में एसोसिएशन के जिला प्रधान डा. आदित्य, महासचिव डॉ. जितेंद्र यादव व डा. संगीता सह सचिव ने उपस्थित चिकित्सकों को सातवें वेतन आयोग में चिकित्सकों के वेतन में किए जा रहे भेदभाव के बारे में हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन द्वारा लिए गए फैसलों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार ने सातवें वेतन आयोग में एनपीए (नॉन प्रेक्टिस भत्ता) बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने की बजाय 25 प्रतिशत से 20 प्रतिशत करने का फैसला लिया है। वही पहले एनपीए जो बेसिक पे का हिस्सा होता था उसे भी हटा दिया गया है। साथ ही अस्पतालों में सुरक्षा व मूलभूत सुविधाओं (निवास स्थान, कार्यस्थल व प्राथमिक सुविधाओं) के अभाव तथा चिकित्सकों की कमी के कारण कार्य के अधिक भार को लेकर राज्य के सभी चिकित्सकों में भारी रोष है। सरकार के इस निर्णय के विरोध में सभी चिकित्सकों ने शुक्रवार को काली पट्टी बांधकर रोष प्रकट किया। महासचिव ने बताया की सरकार अगर अपने निर्णय को नहीं बदलती है तो मेडिकल एसोसिएशन इसके विरोध में सख्त से सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर होगी।
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