फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Mahendragarh/Narnaul News ›   Naresh Kumar earning Rs 10 lakh annually by producing 70 quintals of honey annually

सालाना 70 क्विंटल शहद का उत्पादन कर सालाना 10 लाख रुपये कमा रहे नरेश कुमार

Sun, 20 Feb 2022 11:41 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 20 Feb 2022 11:41 PM IST
विज्ञापन
Naresh Kumar earning Rs 10 lakh annually by producing 70 quintals of honey annually
मधुमक्खी को दिखाता गांव पायगा निवासी किसान नरेश कुमार। संवाद - फोटो : Narnol
पिता के निधन पर 13 साल पहले टेंपो चलाना छोड़कर गांव पायगा निवासी किसान नरेश कुमार सालाना 70 क्विंटल शहद का उत्पादन कर 10 लाख रुपये कमा रहे हैं। नरेश कुमार के पास महज तीन कनाल जमीन होने के बावजूद भी मधुमक्खी पालन को व्यवसाय के रूप में स्थापित कर अपने परिवार की आजीविका चला रहा है। 12 वर्ष पहले 15 डिब्बों से शहद उत्पादन का काम शुरू करने वाले नरेश कुमार इस समय 175 डिब्बों से प्रतिवर्ष 70 क्विंटल शहद का उत्पादन कर रहे हैं। दस वर्ष पूर्व मधुमक्खी पालन को व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए नरेश कुमार ने केवीके महेंद्रगढ़ से प्रशिक्षण लिया था।
विज्ञापन

यह है लागत एवं कमाई
कृषि विज्ञान केंद्र के कीट वैज्ञानिकों के अनुसार मधुमक्खी पालन के लिए एक डिब्बे पर करीब 3 हजार रुपये की लागत आती है। इसके बाद वर्षभर एक डिब्बे से 35 से 40 किलोग्राम शहद आसानी से ली जा सकती है। वर्षभर में एक डिब्बे से पालक 6 हजार रुपये तक की आमदनी कर सकता है। वहीं 100 डिब्बों पर 3 लाख रुपये खर्च कर पालक एक वर्ष में 40 क्विंटल तक शहद उत्पादन कर 4 लाख 80 हजार रुपये तक की आय प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए महज एक बार खर्च करना पड़ता है। इसके बाद नियमित रूप से इन डिब्बों से शहद उत्पादन होता रहेगा।
विज्ञापन

भूमिहीन बेरोजगारों के नहीं किसी वरदान से कम
जिले में शहद उत्पादन के लिए मौसम एवं आवश्यक वातावरण उपलब्ध होने के कारण यह व्यवसाय किसी वरदान से कम नहीं है। इस व्यवसाय को अपनाने के लिए भूमि की भी आवश्यकता नहीं पड़ती तथा जहां मधुमक्खियों के डिब्बों को रखा जाता है वहां परपरागण विधि के विस्तार से फसल उत्पादन में भी वृद्धि होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

कृषि विज्ञान केंद्र महेंद्रगढ़ के कीट वैज्ञानिक डॉ. जयलाल यादव ने बताया कि केवीके में वर्षभर मधुमक्खी पालन के लिए युवाओं को पांच-पांच दिनों के प्रशिक्षण दिए जाते हैं। इसके अलावा इस व्यवसाय को अपनाने के लिए युवाओं को भूमि की आवश्यकता भी नहीं होती। बेरोजगार युवाओं के लिए यह व्यवसाय किसी वरदान से कम नहीं हैं। वर्षभर में करीब 200 युवाओं को प्रशिक्षित कर व्यवसाय स्थापित कराने के लिए हरसंभव सहायता दी जाती है। कीट वैज्ञानिक डॉ. जयलाल यादव, केवीके महेंद्रगढ़।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed