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Mahendragarh-Narnaul News: बंदर पकड़ने के लिए नपा टेंडर दो बार रद्द, कम रेट बनी समस्या
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फोटो संख्या:61- आईटीआई के सामने बैठा बंदरों का झुंड--संवाद
महेंद्रगढ़। शहर में बंदरों के आतंक से निपटने के लिए नगर पालिका (नपा) के प्रयास विफल हो रहे हैं। कम सरकारी दरों के कारण दो बार टेंडर जारी होने के बावजूद कोई भी एजेंसी बंदर पकड़ने को तैयार नहीं है। इससे शहरवासियों को बंदरों के उत्पात से राहत नहीं मिल पा रही है।
नपा ने पहले प्रति बंदर 1500 रुपये का टेंडर जारी किया था, जिसे अधिकारियों ने रद्द कर दिया। इसके बाद नपा ने प्रति बंदर 600 रुपये का नया टेंडर निकाला। यह दर एजेंसियों के लिए आकर्षक नहीं थी। दोनों ही बार टेंडर पोर्टल खाली रहा और किसी भी एजेंसी ने इसमें रुचि नहीं दिखाई।
नगर पालिका को एजेंसियों की ओर से 600 रुपये प्रति बंदर की दर पर काम करना आर्थिक रूप से संभव नहीं बताया है। बंदरों को पकड़ने और उन्हें सुरक्षित स्थान पर छोड़ने में अधिक लागत आती है। इस कारण वे नपा के टेंडर से किनारा कर रही हैं। शहर में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। इसका कोई समाधान नहीं निकल पा रहा है।
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सरकारी अस्पताल में आ रहे मरीज
नगारिक अस्पताल में बंदर काटने के हर सप्ताह 8 से 10 मामले आते है। इनमें किसी पर अचानक हमला और किसी में गंभीर घाव दिखते हैं। अधिकतर में हमला खरोंच ही लगती हैं और इसका मुख्य कारण बंदरों के सड़कों पर रास्ता पार करना है। इस दौरान बंदर गली में बैठे रहते हैं और फिर पीछे से अचानक हमला करते हैं।
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हर बार बीच में रद्द हो जाते हैं टेंडर
नगर पालिका की ओर से एजेंसियों को टेंडर आवंटित किए जाते हैं और यह प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इसके बाद करीब 20 से 50 बंदर पकड़ने पर टेंडर ही रद्द हो जाते हैं। वर्ष 2026 में दोनों बार ऐसा ही हुआ है। इसमें एजेंसी ने टेंडर लेकर आधा काम किया और फिर टेंडर रद्द हो गया।
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1000 बंदर पकड़ने के लिए लगाया टेंडर
नगर पालिका प्रधान रमेश सैनी ने बताया कि नगरपालिका ने 1000 बंदरों को पकड़ने के लिए फिर से टेंडर लगाया है। सरकारी दर 600 रुपये प्रति पशु की निर्धारित होने के कारण आवेदन नहीं आए हैं। अब इसका कोई विकल्प तलाशा जाएगा और दर उचित करवाकर एजेंसी को टेंडर आवंटित किए जाएंगे।
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नपा ने पहले प्रति बंदर 1500 रुपये का टेंडर जारी किया था, जिसे अधिकारियों ने रद्द कर दिया। इसके बाद नपा ने प्रति बंदर 600 रुपये का नया टेंडर निकाला। यह दर एजेंसियों के लिए आकर्षक नहीं थी। दोनों ही बार टेंडर पोर्टल खाली रहा और किसी भी एजेंसी ने इसमें रुचि नहीं दिखाई।
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नगर पालिका को एजेंसियों की ओर से 600 रुपये प्रति बंदर की दर पर काम करना आर्थिक रूप से संभव नहीं बताया है। बंदरों को पकड़ने और उन्हें सुरक्षित स्थान पर छोड़ने में अधिक लागत आती है। इस कारण वे नपा के टेंडर से किनारा कर रही हैं। शहर में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। इसका कोई समाधान नहीं निकल पा रहा है।
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सरकारी अस्पताल में आ रहे मरीज
नगारिक अस्पताल में बंदर काटने के हर सप्ताह 8 से 10 मामले आते है। इनमें किसी पर अचानक हमला और किसी में गंभीर घाव दिखते हैं। अधिकतर में हमला खरोंच ही लगती हैं और इसका मुख्य कारण बंदरों के सड़कों पर रास्ता पार करना है। इस दौरान बंदर गली में बैठे रहते हैं और फिर पीछे से अचानक हमला करते हैं।
हर बार बीच में रद्द हो जाते हैं टेंडर
नगर पालिका की ओर से एजेंसियों को टेंडर आवंटित किए जाते हैं और यह प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इसके बाद करीब 20 से 50 बंदर पकड़ने पर टेंडर ही रद्द हो जाते हैं। वर्ष 2026 में दोनों बार ऐसा ही हुआ है। इसमें एजेंसी ने टेंडर लेकर आधा काम किया और फिर टेंडर रद्द हो गया।
1000 बंदर पकड़ने के लिए लगाया टेंडर
नगर पालिका प्रधान रमेश सैनी ने बताया कि नगरपालिका ने 1000 बंदरों को पकड़ने के लिए फिर से टेंडर लगाया है। सरकारी दर 600 रुपये प्रति पशु की निर्धारित होने के कारण आवेदन नहीं आए हैं। अब इसका कोई विकल्प तलाशा जाएगा और दर उचित करवाकर एजेंसी को टेंडर आवंटित किए जाएंगे।

फोटो संख्या:61- आईटीआई के सामने बैठा बंदरों का झुंड--संवाद