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Mahendragarh-Narnaul News: जांच में बाजरा मानकों पर नहीं उतर रहा खरा, किसानों की बढ़ी परेशानी
Sat, 27 Sep 2025 07:26 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 27 Sep 2025 07:26 PM IST
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फोटो नंबर-24नारनौल की अनाज मंडी में लगी बाजरे की ढेरी। संवाद
नांगल चौधरी/नारनौल। नांगल चौधरी और नारनौल अनाज मंडी में बाजरे की खरीद प्रक्रिया चौथे दिन भी प्रभावित रही। अभी कुछे किसान ही मंडी में बाजरा लेकर पहुंच रहे हैं।
नांगल चौधरी में शुक्रवार को पूरे दिन मंडी में न तो कोई किसान पैदावार लेकर पहुंचा और न ही गेट पास कटे। इसके चलते खरीद शून्य रही। वीरवार को पोर्टल चालू होने के बाद करीब 11 किसान विभिन्न गांवों से बाजरा लेकर मंडी आए थे। सैंपल लैब में भेजा गया लेकिन गुणवत्ता जांच में बाजरा निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतर सका। केवल एक ढेरी को छोड़कर सभी नमूने फेल हो गए।
इस बार बारिश के कारण बाजरे की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। किसानों की उम्मीदों के विपरीत बाजरे में नमी अधिक पाई जा रही हैं। सरकार ने बाजरा खरीद के लिए मानक तय किए हैं। फसल में 13 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए। एक प्रतिशत से अधिक दाना क्षतिग्रस्त नहीं होना चाहिए और रंग भी मानक के अनुरूप होना चाहिए। इन शर्तों पर खरी उतरने पर ही फसल की खरीद संभव है।
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गौरतलब है कि प्रदेश में बाजरे की खरीद एक अक्तूबर से शुरू होनी थी लेकिन सरकार ने इसे पहले ही शुरू कर दिया। इस बार किसानों को 2150 रुपये प्रति क्विंटल के साथ 625 रुपये मुआवजा राशि मिलाकर कुल 2775 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ तय किया गया है। इसके लिए जे फार्म होना अनिवार्य है।
खरीद इंचार्ज सुनील चौधरी ने बताया कि शुक्रवार को वे पूरे दिन मंडी में मौजूद रहे लेकिन कोई किसान फसल लेकर नहीं आया। अब तक मंडी में पहुंचे अधिकांश बाजरे की क्वालिटी सरकार द्वारा तय मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई है। सरकार के निर्देशों के मुताबिक केवल उन्हीं फसलों की खरीद होगी जो निर्धारित मापदंडों पर खरी उतरेंगी।
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नांगल चौधरी में शुक्रवार को पूरे दिन मंडी में न तो कोई किसान पैदावार लेकर पहुंचा और न ही गेट पास कटे। इसके चलते खरीद शून्य रही। वीरवार को पोर्टल चालू होने के बाद करीब 11 किसान विभिन्न गांवों से बाजरा लेकर मंडी आए थे। सैंपल लैब में भेजा गया लेकिन गुणवत्ता जांच में बाजरा निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतर सका। केवल एक ढेरी को छोड़कर सभी नमूने फेल हो गए।
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इस बार बारिश के कारण बाजरे की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। किसानों की उम्मीदों के विपरीत बाजरे में नमी अधिक पाई जा रही हैं। सरकार ने बाजरा खरीद के लिए मानक तय किए हैं। फसल में 13 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए। एक प्रतिशत से अधिक दाना क्षतिग्रस्त नहीं होना चाहिए और रंग भी मानक के अनुरूप होना चाहिए। इन शर्तों पर खरी उतरने पर ही फसल की खरीद संभव है।
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गौरतलब है कि प्रदेश में बाजरे की खरीद एक अक्तूबर से शुरू होनी थी लेकिन सरकार ने इसे पहले ही शुरू कर दिया। इस बार किसानों को 2150 रुपये प्रति क्विंटल के साथ 625 रुपये मुआवजा राशि मिलाकर कुल 2775 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ तय किया गया है। इसके लिए जे फार्म होना अनिवार्य है।
खरीद इंचार्ज सुनील चौधरी ने बताया कि शुक्रवार को वे पूरे दिन मंडी में मौजूद रहे लेकिन कोई किसान फसल लेकर नहीं आया। अब तक मंडी में पहुंचे अधिकांश बाजरे की क्वालिटी सरकार द्वारा तय मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई है। सरकार के निर्देशों के मुताबिक केवल उन्हीं फसलों की खरीद होगी जो निर्धारित मापदंडों पर खरी उतरेंगी।