फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Mahendragarh/Narnaul News ›   Mahendragarh Fort is expected to be developed as a tourist destination.

Mahendragarh-Narnaul News: महेंद्रगढ़ किले के पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने की उम्मीद

Fri, 31 Oct 2025 11:59 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Fri, 31 Oct 2025 11:59 PM IST
विज्ञापन
Mahendragarh Fort is expected to be developed as a tourist destination.
फोटो संख्या:52- महेंद्रगढ़ का किला--संवाद
महेंद्रगढ़। महेंद्रगढ़ के ऐतिहासिक किले को प्रदेश सरकार की ओर से संरक्षित स्थलों में शामिल किए जाने के बाद किले का पर्यटन स्थल के रूप में विकास होने की उम्मीद जताई जा रही है। अगर इस स्थान का विकास किया गया तो पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी जिससे जिले की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी। साथ ही स्थानीय स्तर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
विज्ञापन

ऐतिहासिक महेंद्रगढ़ किले को पर्यटन के रूप में विकसित करने की योजनाएं तो इससे पहले भी कई बार बनीं लेकिन इस पर अमल नहीं किया जा सका। 18वीं शताब्दी में मराठा सेनापति तात्या टोपे की देखरेख में झांसी के किले की तर्ज पर महेंद्रगढ़ का किला बनवाया गया था। मराठा काल का प्रतीक यह किला धूल के किले के रूप में विख्यात था। किले के चारों ओर सात गहरी खाई होती थी।
विज्ञापन

इसके आसपास सात ऊंचे बालू के टीले होते थे। इस किले को इतिहास में अभेद किला माना जाता था जिसपर कभी भी कोई आक्रमण सफल नहीं हो सका। 1960 में अंग्रेजी शासन के दौरान यह किला व आसपास का क्षेत्र पटियाला रियासत का हिस्सा होता था। पटियाला के महाराजा नरेंद्र सिंह ने अपने पुत्र महेंद्र सिंह के नाम पर इस किले का नाम महेंद्रगढ़ रखा था।
विज्ञापन
विज्ञापन

इस किले को मराठा काल में प्रचलित राजपूत, मुगल व मराठा वास्तु के अनुसार तैयार किया गया था। इस किले के नाम पर ही कानौड़ को महेंद्रगढ़ के रूप में नई पहचान मिली थी। करीब 12 एकड़ में फैले इस किले में दो हजार से अधिक कमरे बने हुए हैं। सदियों के बाद भी इसका मुख्य द्वार यथा स्थिति में बना हुआ है।

पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की बनी थी योजना
वर्ष 2014 में केंद्र सरकार की ओर से कृष्ण सर्किट योजना के तहत इस किले को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित की योजना बनी थी लेकिन यह योजना धरातल पर ही नहीं उतर पाई। यह योजना बाद में बंद हो गई जिससे किले का सुंदरीकरण नहीं हो पाया। प्रदेश सरकार के पर्यटन विभाग ने महेंद्रगढ़ व माधोगढ़ के किले को पर्यटन केंद्र व हैरिटेज के रूप में विकसित करने के लिए वर्ष 2019 में करीब 350 करोड़ रुपये का बजट तैयार किया था। वर्ष 2020 में इसके सुंदरीकरण का काम शुरू हुआ था लेकिन कोरोना संकट के बाद यह काम अधर में लटक गया। इस किले में लंबे समय तक उपमंडल स्तर के कार्यालय चलते थे। जिला जेल भी इसी अभेद किले में बनी हुई थी। वर्ष 1998 से 2000 तक किले के चारों ओर जब वह खाई भरी जा रही थी तो तोप के गोले भी निकले थे जो इस किले पर हुए आक्रमणों के गवाह बने थे। यह किला धार्मिक एकता का भी प्रतीक माना जाता है। क्योंकि इसमें एक ओर गुरूद्वारा, बीच में बालाजी मंदिर व दक्षिणी छोर पर पीर बाबा की मजार बनी हुई है।


1857 के युद्ध के दौरान राव तुलाराम आए थे यहां
इतिहासकारों के अनुसार नसीबपुर के मैदान में राव तुलाराम के नेतृत्व में अंग्रेजों के साथ हुए युद्ध में घायल होने के बाद राव तुलाराम इस किले पर पहुंचे थे। अंग्रेजों के साथ चल रहे युद्ध को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा कारणों से किले के दरबान ने गेट नहीं खोला था। गेट नहीं खोलने के कारण राव तुलाराम काबूल के लिए रवाना हो गए थे। जहां युद्ध के घावों के कारण गंभीर संक्रमण व बीमारी होने से उनका देहांत हो गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed