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ऋषियों के उपदेश का श्रवण करना उपाकर्म : जगराम आर्य
Sun, 10 Aug 2025 12:10 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sun, 10 Aug 2025 12:10 AM IST
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नारनौल । वेदोपदेशक शिक्षाश्री कप्तान जगराम आर्य ने रक्षाबंधन पर शास्त्री नगर में हवन यज्ञ किया। इस दौरान मुख्य यज्ञमान रतनलाल यादव थे। इस अवसर पर शमशेर सिंह, एडवोकेट प्रवविंद्र सिंह, जतिन राव, बिमला देवी, सरोज बाला, सुषमा, शिवांगी, दक्ष और आर्यन मौजूद थे।
कप्तान जगराम आर्य ने कहा कि ऋषियों के उपदेश का श्रवण श्रावण उपाकर्म कहलाया है। क्योंकि शरीर के अंदर मुख्य रूप से आत्मा परमात्मा दोनों चेतन अवस्था में हैं। जब आत्मा परमात्मा का ध्यान लगाती है तो आत्मशक्ति और आत्मबल बढ़ता है। मनोबल बढ़ता है। मनुष्य जीवन का लक्ष्य है, मोक्ष की प्राप्ति, तो मोक्ष भी मिल जाता है। मोक्ष में आनंद ही आनंद है और इसमें बंधन नहीं हैं।
मोक्ष में रोग नहीं हैं। क्योंकि ये सभी शरीर के साथ जुड़े हैं। मोक्ष होने के बाद जन्म मरण से पीछा छूट जाता है। श्रावणी पर्व आर्यों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। चार महीने तक ऋषियों के प्रवचन को सुनते हैं और उनके बताए हुए मार्ग पर चलते हैंं। इसी को ऋषि तर्पण कहा जाता है। कालांतर में ये त्योहार बहन और भाई का बन गया।
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कप्तान जगराम आर्य ने कहा कि ऋषियों के उपदेश का श्रवण श्रावण उपाकर्म कहलाया है। क्योंकि शरीर के अंदर मुख्य रूप से आत्मा परमात्मा दोनों चेतन अवस्था में हैं। जब आत्मा परमात्मा का ध्यान लगाती है तो आत्मशक्ति और आत्मबल बढ़ता है। मनोबल बढ़ता है। मनुष्य जीवन का लक्ष्य है, मोक्ष की प्राप्ति, तो मोक्ष भी मिल जाता है। मोक्ष में आनंद ही आनंद है और इसमें बंधन नहीं हैं।
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मोक्ष में रोग नहीं हैं। क्योंकि ये सभी शरीर के साथ जुड़े हैं। मोक्ष होने के बाद जन्म मरण से पीछा छूट जाता है। श्रावणी पर्व आर्यों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। चार महीने तक ऋषियों के प्रवचन को सुनते हैं और उनके बताए हुए मार्ग पर चलते हैंं। इसी को ऋषि तर्पण कहा जाता है। कालांतर में ये त्योहार बहन और भाई का बन गया।
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