नगर पालिका अटेली के प्रधान व उप प्रधान का चुनाव चार जून को हुआ। इमसें प्रधान जितिन अग्रवाल व उप प्रधान स्नेहलता को चुना गया। चुनाव में सांसद चौधरी धर्मवीर व विधायक की उपस्थित रहे। चुनावी बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई। एसडीएम की देख-रेख में होने वाले चुनाव में सर्वसम्मति से प्रधान व उप प्रधान का चुनाव हुआ। 11 वार्ड वाली नगर पालिका के चुनाव में पांच पार्षद जो पद मुक्त हुए है। उन्हें छोड़कर 6 पार्षद चुनाव में हिस्सा लिया। बैठक में विकास यादव पार्षद वार्ड 1, अशोक कुमार पार्षद वार्ड -2, स्नेहलता पार्षद वार्ड- 5, जितिन कुमार पार्षद वार्ड - 6, सरोज देवी वार्ड -10, प्रमिला देवी पार्षद वार्ड -11, सिताराम यादव विधायक अटेली, चौ. धर्मबीर सिंह सांसद भिवानी- महेंद्रगढ़ शामिल हुए। दो साल का इंतजा खत्म हुआ अटेली नगरपालिका के चुनावों को दो साल से अधिक समय के होने व प्रधान के चुनाव के लिए 8 बैठकों के बाद भी प्रधान का चुनाव नहीं होने पर कस्बे के विकास रूके हुए है। चुनाव के बाद पांच नगर पार्षदों द्वारा नये प्रधान के चुनावों की बैठकों में नहीं जाने पर कस्बे के कुछ लोगों ने अदालत का सहारा लेकर नगरपालिका अधिानियम 1973 की धारा 14 सी के तहत उनकी सदस्यता भंग करने के याचिका डाली थी। जिस पर अदालत ने शहरी स्थानीय निकाय के अतिरिक्त मुख्य सचिव को इस बारे में कार्रवाई करने पर सरकार पर छोड़ दिया था। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने 22 मई को वार्ड 3 से अश्वनी कुमार, 4 से संजय गोयल, 7 से अजय मुदगिल, 8 से जितेंद्र सिंहल, 9 से सनीता देवी को पार्षद के पद से हटा दिया। अटेली नगरपालिका में कुल 11 वार्ड को लिए चुनाव 13 अप्रैल 2018 को हुए थे। उसके बाद 19 जून 2018 को सभी 11 पार्षदों को भारतीय संविधान के प्रति निष्ठा बारे शपथ दिलाई गई। इसके बाद 23 जुलाई 2018 को फिर बैठक हुई। जिसमें प्रधान व उपप्रधान के चुनाव होने थे, लेकिन उनपुस्थित निर्वाचित सदस्य अश्वनी कुमार संजय कुमार, अजय कुमार, जितेंद्र, सुनीता देवी रहे। अन्य 6 पार्षद उपस्थित हुए। यह बैठक कोरम के अभाव में स्थगित हो गई। 15 सितंबर को फिर विशेष बैठक हुई लेकिन इसमें भी चुनाव नहीं हुआ है। इसके बाद जिला उपायुक्त के आदेश पर 3 अक्टूबर 2018 को विशेष बैठक हुई जिसमें कोई निर्णय नहीं हुआ। 2 नवंबर को फिर बैठक हुई लेकिन पार्षदों के नहीं पहुंचने पर एक बार फिर बैठक स्थगित करनी पड़ी। 12 दिसम्बर को हुई बैठक में उक्त 5 पार्षद फिर अनुपस्थित रहे। इसके बाद 12 जनवरी 2019 को बैठक हुई लेकिन कोई भी पार्षद उपस्थित नहीं हुए। इस प्रकार 5 पार्षदों के 3 बैठकों में उनुपस्थित रहने के कारण उनकी सदस्यता को शहरी स्थानीय निकाय के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने आयोग्य ठहराया है।