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जेई ने बिना विकास शुल्क लिए जारी कर दी एनओसी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 04 Jan 2017 11:57 PM IST
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नगर परिषद नारनौल में एक नया घोटाला सामने आया है। इस घोटाले में भी लाखों रुपये के गोलमाल होने की संभावना है। इस बार घोटाला पहले से ही चर्चित एमई ने किया है जिसका साथ नप में डीसी रेट पर लगे जेई ने दिया है। मामले का खुलासा होने के बाद इसकी शिकायत सचिव ने उपायुक्त को भेज दी है जिसमें उन्होंने उक्त कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। नगर परिषद में नप के डीसी रेट पर लगे जेई विकास शर्मा ने रिपोर्ट तैयार कर बिना सचिव के हस्ताक्षर करवा एनओसी जारी की है। ये सभी एनओसी वाणिज्यिक हैं। वाणिज्यिक भवनों की एनओसी में 930 रुपये प्रति गज के हिसाब से विकास शुल्क वसूला जाता है। इस प्रकार दस एनओसी के लिए कोई विकास शुल्क नहीं लिया गया। जो सैकड़ों वर्ग गज की हैं जिससे सरकार को लाखों रुपये के राजस्व की हानि हुई है। इन एनओसी में चिमनलाल एमई द्वारा जारी की गई एनओसी भी शामिल है।
ज्ञात हो कि नगर परिषद में सभी कामों के लिए विकास शुल्क देना पड़ता है। बिना विकास शुल्क दिए जन्म प्रमाण पत्र, नकल, नक्शा, एनओसी आदि नहीं मिल सकती। इसके लिए अलग-अलग फीस निर्धारित है। यह विकास शुल्क नगर परिषद व सरकार की कमाई का मुख्य जरिया होता है। लेकिन यहां के अधिकारी अक्सर सरकार की बजाय अपना विकास ही कर लेते हैं। जिसके चलते नप में अनेक बार एनओसी व नक्शे के नाम पर अनेक बार घोटाले हो चुके हैं। पूर्व नप प्रधान को इन्हीं घोटालों के चलते अपनी कुर्सी तक गंवानी पड़ गई थी। इसके बाद भी नप के अधिकारी व कर्मचारी बिना सुविधा शुल्क लिए काम नहीं करते।
सचिव ने मांगा जेई से जवाब
इस बारे में सचिव केके यादव ने जेई विकास शर्मा से जवाब मांगा तो जेई ने जवाब दिया कि ये उनके द्वारा जारी नहीं की गई तथा इनमें उसके हस्ताक्षर भी नहीं हैं।
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ऐसे किया मामले का खुलासा
सचिव केके यादव ने एक दुकान की मुटेशन का आवेदन मार्किंग किया तो उसके अवलोकन पर मामला उनके संज्ञान में आया। आवेदन के साथ लगाई गई एनओसी नंबर 390 को बिना वाणिज्यिक विकास शुल्क के लिए जारी किया गया था। जब सचिव ने गहराई से कई फाइलों का निरीक्षण किया तो पाया कि इसके अलावा नौ अन्य एनओसी भी इसी प्रकार जारी की गई हैं। इनमें एनओसी नंबर 338, 355, 372, 379, 380, 381, 385, 390, 395 व 398 शामिल हैं।
कई एनओसी नप से जुड़े एक चर्चित बाहरी व्यक्ति की
इन एनओसी में कई एनओसी नप में अपना कई वर्षों से प्रभाव रखने वाले एक बाहरी व्यक्ति की भी है। जो नप में काफी हस्तक्षेप रखता है। वहीं नप चेयरमैन के गठन में अहम भूमिका निभाता चला आ रहा है।
मामला पहुंचा डीसी दरबार
जब सचिव को पता चला कि एमई व जेई ने मिलकर नप को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाया है तो सचिव ने पूरे मामले की जानकारी डीसी को पत्र के माध्यम से दी जिसमें उन्होंने लिखा है कि उक्त अधिकारियों ने कैसे नप को बिना राजस्व शुल्क लिए एनओसी जारी की हैं। पत्र में सचिव ने लिखा है उनके कार्यभार संभालने के प्रथम सप्ताह में ही एनओसी के कई आवेदन प्रस्तुत किए गए थे जिसमें कनिष्ठ अभियंता द्वारा रिपोर्ट की गई थी लेकिन रिपोर्ट पर उनके हस्ताक्षर नहीं थे। इस पर मैंने कर्मचार के हस्ताक्षर के बिना एनओसी जारी करने में असमर्थता जताई और प्रधान नप को भी अवगत कराया। रिपोर्ट में लिखा है कि तत्कालीन पालिका अभियंता चमनलाल व कनिष्ठ अभियंता विकास शर्मा ने मिलकर परिषद या सरकार को लाखों रुपये की हानि पहुंचाई है। इसलिए इन दोनों से उक्त राशि वसूली जाए ताकि आगे कोई नगर परिषद में ऐसा काम न करे।
सोहना में भी कर चुके हैं खुलासा, दिलाया पैसा
नप के सचिव केके यादव पूर्व में भी सोहना में लाखों रुपये के गबन का खुलासा कर चुके हैं। उन्होंने परिषद के एकाउंटेंट व क्लर्क ने मिलकर लाखों रुपये के सेल्स टैक्स व लेबर सेस के गबन का खुलासा किया था। जिसके बाद आरोपियों ने आनन-फानन में आठ लाख रुपये जमा भी करा दिए थे।
सचिव द्वारा गबन के मामले को लेकर भेजा गया एक पत्र प्राप्त हुआ है। इस मामले में जांच की जा रही है। अगर कोई दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। -सुनील कुमार, सीटीएम, नारनौल
अभी मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है। मामला गंभीर है, अगर ऐसा हुआ है तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।- राजनारायण कौशिक, डीसी, नारनौल
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ज्ञात हो कि नगर परिषद में सभी कामों के लिए विकास शुल्क देना पड़ता है। बिना विकास शुल्क दिए जन्म प्रमाण पत्र, नकल, नक्शा, एनओसी आदि नहीं मिल सकती। इसके लिए अलग-अलग फीस निर्धारित है। यह विकास शुल्क नगर परिषद व सरकार की कमाई का मुख्य जरिया होता है। लेकिन यहां के अधिकारी अक्सर सरकार की बजाय अपना विकास ही कर लेते हैं। जिसके चलते नप में अनेक बार एनओसी व नक्शे के नाम पर अनेक बार घोटाले हो चुके हैं। पूर्व नप प्रधान को इन्हीं घोटालों के चलते अपनी कुर्सी तक गंवानी पड़ गई थी। इसके बाद भी नप के अधिकारी व कर्मचारी बिना सुविधा शुल्क लिए काम नहीं करते।
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सचिव ने मांगा जेई से जवाब
इस बारे में सचिव केके यादव ने जेई विकास शर्मा से जवाब मांगा तो जेई ने जवाब दिया कि ये उनके द्वारा जारी नहीं की गई तथा इनमें उसके हस्ताक्षर भी नहीं हैं।
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ऐसे किया मामले का खुलासा
सचिव केके यादव ने एक दुकान की मुटेशन का आवेदन मार्किंग किया तो उसके अवलोकन पर मामला उनके संज्ञान में आया। आवेदन के साथ लगाई गई एनओसी नंबर 390 को बिना वाणिज्यिक विकास शुल्क के लिए जारी किया गया था। जब सचिव ने गहराई से कई फाइलों का निरीक्षण किया तो पाया कि इसके अलावा नौ अन्य एनओसी भी इसी प्रकार जारी की गई हैं। इनमें एनओसी नंबर 338, 355, 372, 379, 380, 381, 385, 390, 395 व 398 शामिल हैं।
कई एनओसी नप से जुड़े एक चर्चित बाहरी व्यक्ति की
इन एनओसी में कई एनओसी नप में अपना कई वर्षों से प्रभाव रखने वाले एक बाहरी व्यक्ति की भी है। जो नप में काफी हस्तक्षेप रखता है। वहीं नप चेयरमैन के गठन में अहम भूमिका निभाता चला आ रहा है।
मामला पहुंचा डीसी दरबार
जब सचिव को पता चला कि एमई व जेई ने मिलकर नप को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाया है तो सचिव ने पूरे मामले की जानकारी डीसी को पत्र के माध्यम से दी जिसमें उन्होंने लिखा है कि उक्त अधिकारियों ने कैसे नप को बिना राजस्व शुल्क लिए एनओसी जारी की हैं। पत्र में सचिव ने लिखा है उनके कार्यभार संभालने के प्रथम सप्ताह में ही एनओसी के कई आवेदन प्रस्तुत किए गए थे जिसमें कनिष्ठ अभियंता द्वारा रिपोर्ट की गई थी लेकिन रिपोर्ट पर उनके हस्ताक्षर नहीं थे। इस पर मैंने कर्मचार के हस्ताक्षर के बिना एनओसी जारी करने में असमर्थता जताई और प्रधान नप को भी अवगत कराया। रिपोर्ट में लिखा है कि तत्कालीन पालिका अभियंता चमनलाल व कनिष्ठ अभियंता विकास शर्मा ने मिलकर परिषद या सरकार को लाखों रुपये की हानि पहुंचाई है। इसलिए इन दोनों से उक्त राशि वसूली जाए ताकि आगे कोई नगर परिषद में ऐसा काम न करे।
सोहना में भी कर चुके हैं खुलासा, दिलाया पैसा
नप के सचिव केके यादव पूर्व में भी सोहना में लाखों रुपये के गबन का खुलासा कर चुके हैं। उन्होंने परिषद के एकाउंटेंट व क्लर्क ने मिलकर लाखों रुपये के सेल्स टैक्स व लेबर सेस के गबन का खुलासा किया था। जिसके बाद आरोपियों ने आनन-फानन में आठ लाख रुपये जमा भी करा दिए थे।
सचिव द्वारा गबन के मामले को लेकर भेजा गया एक पत्र प्राप्त हुआ है। इस मामले में जांच की जा रही है। अगर कोई दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। -सुनील कुमार, सीटीएम, नारनौल
अभी मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है। मामला गंभीर है, अगर ऐसा हुआ है तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।- राजनारायण कौशिक, डीसी, नारनौल