{"_id":"65fe99313fd92a310809af8f","slug":"it-is-auspicious-to-burn-holika-only-after-bhadra-period-ends-acharya-narnol-news-c-196-1-nnl1003-110614-2024-03-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"भद्राकाल समाप्त होने के बाद ही होलिका दहन करना शुभ : आचार्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भद्राकाल समाप्त होने के बाद ही होलिका दहन करना शुभ : आचार्य
Sat, 23 Mar 2024 02:26 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 23 Mar 2024 02:26 PM IST
विज्ञापन
नारनौल। होली का पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि के दिन मनाया जाता है और रंगोत्सव ठीक इसके अगले दिन चैत्र कृष्ण प्रतिपदा के दिन मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है।
होली पर्व के पूजन व इसके दहन को लेकर क्षेत्र के लोगों में चल रहे संशय को दूर करते हुए आचार्य गगन भारद्वाज ने बताया कि 24 मार्च को पूर्णिमा तिथि का आरंभ सुबह 9 बजकर 56 मिनट से होगा और 25 तारीख में सुबह 12 बजकर 30 मिनट पर पूर्णिमा तिथि समाप्त हो जाएगी। उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्णिमा तिथि में भद्रा रहित प्रदोष काल में ही होलिका दहन किया जाता है। इस बार होलिका दहन 24 मार्च को और रंगोत्सव 25 मार्च को ही मनाया जाएगा। आचार्य ने बताया कि 24 मार्च को भद्रा पूर्णिमा तिथि के आरंभ होने के साथ ही लगी रही है और रात में 11 बजकर 13 मिनट तक भद्रा रहेगी। ऐसे में भद्राकाल समाप्त होने के बाद ही होलिका दहन करना शुभ रहेगा। जबकि होली का पूजन प्रातः 9:56 से पूर्व ही करना शुभ रहेगा। उन्होंने बताया कि शास्त्रों के अनुसार, भद्रा रहित काल में ही होलिका दहन करना शुभ है। होली पर्व मनाने को लेकर आचार्य क्रांति निर्मल शास्त्री ने बताया कि गत दिवस विश्व ब्राह्मण परिषद की बैठक भी आयोजित की गई थी। जिसमें क्षेत्र करीब 100 पंडित जुड़े हैं और उन सभी ने भी 24 मार्च रविवार को सुबह 8 बजे से 9:56 तक होली पूजन व होलिका दहन रात्रि 11 बजकर 13 मिनट पर करने का निर्णय लिया था, जो की उत्तम है।
विज्ञापन
होली पर्व के पूजन व इसके दहन को लेकर क्षेत्र के लोगों में चल रहे संशय को दूर करते हुए आचार्य गगन भारद्वाज ने बताया कि 24 मार्च को पूर्णिमा तिथि का आरंभ सुबह 9 बजकर 56 मिनट से होगा और 25 तारीख में सुबह 12 बजकर 30 मिनट पर पूर्णिमा तिथि समाप्त हो जाएगी। उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्णिमा तिथि में भद्रा रहित प्रदोष काल में ही होलिका दहन किया जाता है। इस बार होलिका दहन 24 मार्च को और रंगोत्सव 25 मार्च को ही मनाया जाएगा। आचार्य ने बताया कि 24 मार्च को भद्रा पूर्णिमा तिथि के आरंभ होने के साथ ही लगी रही है और रात में 11 बजकर 13 मिनट तक भद्रा रहेगी। ऐसे में भद्राकाल समाप्त होने के बाद ही होलिका दहन करना शुभ रहेगा। जबकि होली का पूजन प्रातः 9:56 से पूर्व ही करना शुभ रहेगा। उन्होंने बताया कि शास्त्रों के अनुसार, भद्रा रहित काल में ही होलिका दहन करना शुभ है। होली पर्व मनाने को लेकर आचार्य क्रांति निर्मल शास्त्री ने बताया कि गत दिवस विश्व ब्राह्मण परिषद की बैठक भी आयोजित की गई थी। जिसमें क्षेत्र करीब 100 पंडित जुड़े हैं और उन सभी ने भी 24 मार्च रविवार को सुबह 8 बजे से 9:56 तक होली पूजन व होलिका दहन रात्रि 11 बजकर 13 मिनट पर करने का निर्णय लिया था, जो की उत्तम है।
विज्ञापन