{"_id":"69dbda496bdfa166bd03a451","slug":"in-the-shrimad-devi-bhagavata-katha-the-narrative-recounting-the-divine-manifestations-of-goddess-durga-was-narrated-narnol-news-c-203-1-mgh1004-125579-2026-04-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mahendragarh-Narnaul News: श्रीमद्देवी भागवत कथा में दुर्गा के स्वरूपों का दर्शन की सुनाई कथा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mahendragarh-Narnaul News: श्रीमद्देवी भागवत कथा में दुर्गा के स्वरूपों का दर्शन की सुनाई कथा
विज्ञापन
महेंद्रगढ़। प्राचीन दुर्गा मंदिर में चल रही नौ दिवसीय श्रीमद्देवी भागवत कथा के सातवें दिन श्रद्धालुओं को श्रीराम-केवट के चरित्र व नौ दुर्गा स्वरूप के दर्शन की कथा सुनाई गई। कथा वाचक पंडित हेमराज भारद्वाज ने बताया कि श्रीमद्देवी भागवत महापुराण में माता दुर्गा को सर्वोच्च आदि शक्ति माना गया है जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश की भी शक्ति हैं।
उन्होंने सिंह पर सवार होकर, भुजाओं में विभिन्न आयुध धारण कर, भयंकर युद्ध में महिषासुर सहित अनेक राक्षसों का संहार किया और देवताओं को भयमुक्त किया। उन्होंने श्रीराम-केवट की मित्रता के बारे में बताया कि जब भगवान श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास हुआ तो केवट ने अपनी नाव से भगवान श्रीराम, माता सीता व लक्ष्मण को नदी पार करवाया था।
दुर्गा माता मंदिर के पुजारी पंडित सीताराम ने बताया कि श्रीमद्देवी भागवत कथा का मंगलवार को हवन के साथ समापन किया जाएगा। उसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा। उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया कि श्रीमद्देवी भागवत कथा सुनने से सभी कष्टों का अंत हो जाता है। मन को शांति मिलती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया वे कथा में पहुंचकर कथा का रसपान करें।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने सिंह पर सवार होकर, भुजाओं में विभिन्न आयुध धारण कर, भयंकर युद्ध में महिषासुर सहित अनेक राक्षसों का संहार किया और देवताओं को भयमुक्त किया। उन्होंने श्रीराम-केवट की मित्रता के बारे में बताया कि जब भगवान श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास हुआ तो केवट ने अपनी नाव से भगवान श्रीराम, माता सीता व लक्ष्मण को नदी पार करवाया था।
विज्ञापन
दुर्गा माता मंदिर के पुजारी पंडित सीताराम ने बताया कि श्रीमद्देवी भागवत कथा का मंगलवार को हवन के साथ समापन किया जाएगा। उसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा। उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया कि श्रीमद्देवी भागवत कथा सुनने से सभी कष्टों का अंत हो जाता है। मन को शांति मिलती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया वे कथा में पहुंचकर कथा का रसपान करें।
विज्ञापन