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देसी गायों से दूध उत्पादन में पहले पायदान पर खुडाना
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गांव खुडाना में दुग्ध प्रतियोगिता में भाग लेते पशुपालक विभाग के अधिकारियों साथ।
- फोटो : Narnol
गांव खुडाना गो संवधर्न एवं गो दुग्ध उत्पादन में जिलेभर में पहले पायदान पर है। गांव में प्रतिदिन करीब एक हजार लीटर गो दुग्ध उत्पादन होता है जो जिले में सबसे अधिक है। विभाग द्वारा पिछले दो सालों में आयोजित की देसी नस्ल गायों की दूध प्रतियोगिताओं में ग्रामीणों के पशु 23 बार विजेता रहे हैं। वर्ष 2019-20 में कुल 11 तथा वर्ष 2020-21 में हुई 12 प्रतियोगिताएं जीती हैं। गांव में इस समय देसी नस्ल की गायों की संख्या 260 है जो जिला में सर्वाधिक है।
गांव में देसी नस्ल एवं साहीवाल नस्ल की गायों की संख्या अधिक है। 260 गायों से प्रतिदिन एक हजार लीटर के करीब दूध उत्पादन होता है। ग्रामीण भी अधिकांश देसी नस्ल की गाय पालते हैं। अब धीरे-धीरे गायों की संख्या भी गांव में बढ़ रही है।
सरकार द्वारा देसी नस्ल की गायों को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही योजना के अनुसार 8 से 10 किलोग्राम दूध देने पर 10 हजार रुपये, 10 से 12 पर 15 हजार व 12 किलोग्राम से अधिक दूध देने पर 20 हजार रुपये पशु मालिक को दिए जाते हैं।
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राजकीय पशु औषधालय के प्रभारी वीएलडीए अतर सिंह ने बताया कि औषधालय में देसी नस्ल की गायों के सेक्सड स्योर्टिड योजना के तहत गर्भाधान कराने पर केवल बछड़ी ही पैदा होगी। सरकार द्वारा देसी नस्ल की गायों को बढ़ावा देने के लिए यह योजना चलाई गई है। पशु पालक अपनी गाय का औषधालय में गर्भाधान करा सकते हैं। देसी नस्ल की गाय पालन को लेकर ग्रामीण भी जागरूक हैं। पिछले पांच वर्षों में देसी गायों की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है।
उपमंडल पशु पालन अधिकारी डॉ. भूप सिंह ने बताया कि हरियाणा देसी नस्ल एवं साहीवाल नस्ल की गायों को बढ़ावा देने के लिए जिला में पशु पालकों को जागरूक किया जा रहा है। किसान पंजीकरण करवा दूध प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं।
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गांव में देसी नस्ल एवं साहीवाल नस्ल की गायों की संख्या अधिक है। 260 गायों से प्रतिदिन एक हजार लीटर के करीब दूध उत्पादन होता है। ग्रामीण भी अधिकांश देसी नस्ल की गाय पालते हैं। अब धीरे-धीरे गायों की संख्या भी गांव में बढ़ रही है।
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सरकार द्वारा देसी नस्ल की गायों को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही योजना के अनुसार 8 से 10 किलोग्राम दूध देने पर 10 हजार रुपये, 10 से 12 पर 15 हजार व 12 किलोग्राम से अधिक दूध देने पर 20 हजार रुपये पशु मालिक को दिए जाते हैं।
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राजकीय पशु औषधालय के प्रभारी वीएलडीए अतर सिंह ने बताया कि औषधालय में देसी नस्ल की गायों के सेक्सड स्योर्टिड योजना के तहत गर्भाधान कराने पर केवल बछड़ी ही पैदा होगी। सरकार द्वारा देसी नस्ल की गायों को बढ़ावा देने के लिए यह योजना चलाई गई है। पशु पालक अपनी गाय का औषधालय में गर्भाधान करा सकते हैं। देसी नस्ल की गाय पालन को लेकर ग्रामीण भी जागरूक हैं। पिछले पांच वर्षों में देसी गायों की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है।
उपमंडल पशु पालन अधिकारी डॉ. भूप सिंह ने बताया कि हरियाणा देसी नस्ल एवं साहीवाल नस्ल की गायों को बढ़ावा देने के लिए जिला में पशु पालकों को जागरूक किया जा रहा है। किसान पंजीकरण करवा दूध प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं।