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Mahendragarh-Narnaul News: दिसंबर में 324 में से 82 पानी के सैंपल फेल, हाई टीडीएस और फ्लोराइड से स्वास्थ्य को खतरा
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नारनौल। जिले में गिरते भूजल स्तर के साथ अब पेयजल की गुणवत्ता भी गंभीर संकट का रूप ले चुकी है। जनस्वास्थ्य विभाग की लैब रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर में जांचे गए 324 पानी के नमूनों में से 82 सैंपल फेल पाए गए जबकि नवंबर में 248 सैंपलों में से 7 फेल थे। इन नमूनों में फ्लोराइड की मात्रा मानक से अधिक पाई गई।
इससे पहले जून में मोबाइल वैन से लिए गए नमूनों में 20 से अधिक गांवों में टीडीएस 2500 से 3000 पीपीएम तक मिला जबकि पीने के पानी के लिए 50–150 पीपीएम (पार्ट्स प्रति मिलियन) उपयुक्त माना जाता है। अधिक टीडीएस वाले पानी का सेवन सेहत पर असर डाल सकता है। वहीं बहुत कम टीडीएस का मतलब है कि पानी में पर्याप्त खनिज नहीं हैं।
ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड के मुताबिक, एक लीटर पानी में टीडीएस 500 मिलीग्राम से कम होना चाहिए। वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, एक लीटर पानी में टीडीएस की मात्रा 300 मिलीग्राम से कम होनी चाहिए।
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यहां मानकों से ज्यादा फ्लोराइड की मात्रा
जनस्वास्थ्य विभाग की लैब रिपोर्ट के अनुसार, महेंद्रगढ़ ब्लॉक के सतनाली, बाढ़ड़ा, बलाना, घाघरवास और अटेली ब्लॉक के ताजीपुर, खत्रीपुर, सराय बहादुर नगर, सुरानी, सलीमपुर, बेगपुर, तिगरा, धनौन्दा, घड़ी रुथल और कनीना के बेवल, झींगवान, पाथेड़ा, भड़फ और अगिहार में फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा पाई गई। विभाग के अनुसार फ्लोराइड की मात्रा 1.0 से 1.5 एमजी तक होनी चाहिए अगर इससे ज्यादा मिलती है स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
टीडीएस की मात्रा भी चार गुना ज्यादा
जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर पेयजल के सैंपल लिए जा रहे हैं जिनकी रिपोर्ट चिंताजनक है। मानकों के अनुसार टीडीएस की मात्रा 300 से 500 पीपीएम होनी चाहिए लेकिन जून 2025 में मोबाइल वैन से लिए गए सैंपलों में जिले के कई गांवों में यह सीमा चार गुना तक पार पाई गई। डाटा के अनुसार, निवाजनगर के एक ट्यूबवेल में 3915, मकसूसपुर 1 नियर पौंड में 2856, मकसूसपुर 2 में 2923, बलाहा कला में 2386, भांखरी में 2450, कोरियावास में 2670, अमरपुर जोरासी 2114, बिगोपुर में 2826, गांवड़ी जाट में 3277, हसनपुर में 2410, रामबास में 2486, धनौंता में 2946, आकोली में 2350, मेघोत हाला में 2190, मेई 2755, दौंगड़ा अहीर में 2730, तोबड़ा में 2140 में टीडीएस की मात्रा मिली थी। वहीं दौंगड़ा अहीर गांव में तो 420 सल्फेट की मात्रा पाई गई थी। साथ ही गांव के पानी में हार्डनेस की मात्रा भी 640 मिली है जो सेहत के लिए नुकसानदायक है।
शहर में खरीद रहे लोग पानी का पीने
शहर के लगभग पूरे बाजार सहित कई मोहल्लों के घरों में पीने के लिए आरओ पानी के कैंपर रखाए जा रहे हैं। इसके अलावा, जिन घरों में कैंपर नहीं जाते उन घरों में आरओ लगे हुए हैं। इसके अलावा, जिन गांवों में ज्यादा पानी में खारापन है वहां पर टैंकर मंगा कर प्यास बुझाई जा रही है।
बॉक्स
दूषित पानी के कारण पेट में दर्द रहता था। इसके बाद साफ पानी के लिए दुकान पर कैंपर मंगाने लग गया। -बिजेंद्र सिंह, दुकानदार, रेवाड़ी रोड
बॉक्स
पेयजल लाइन कई स्थानों से लीकेज है जिस कारण कई बार दूषित पानी आता है। वहीं बारिश के दौरान तो नल से बिल्कुल गंदा पानी आता है। -नंद किशोर, मोहल्ला-गणेश मार्केट
वर्जन:
शहर में अवैध कनेक्शनों की वजह से कई बार गंदा पानी सप्लाई होता है। इसको लेकर अभियान भी चलाया जाता है। जलघरों सहित बूस्टिंग स्टेशनों पर समय-समय पर पानी शुद्धता की जांच करवाई जाती है। जहां लाइन के लीकेज की शिकायत मिलती है उन्हें ठीक कराया जाता है।-मुकेश शर्मा, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग, नारनौल
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इससे पहले जून में मोबाइल वैन से लिए गए नमूनों में 20 से अधिक गांवों में टीडीएस 2500 से 3000 पीपीएम तक मिला जबकि पीने के पानी के लिए 50–150 पीपीएम (पार्ट्स प्रति मिलियन) उपयुक्त माना जाता है। अधिक टीडीएस वाले पानी का सेवन सेहत पर असर डाल सकता है। वहीं बहुत कम टीडीएस का मतलब है कि पानी में पर्याप्त खनिज नहीं हैं।
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ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड के मुताबिक, एक लीटर पानी में टीडीएस 500 मिलीग्राम से कम होना चाहिए। वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, एक लीटर पानी में टीडीएस की मात्रा 300 मिलीग्राम से कम होनी चाहिए।
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यहां मानकों से ज्यादा फ्लोराइड की मात्रा
जनस्वास्थ्य विभाग की लैब रिपोर्ट के अनुसार, महेंद्रगढ़ ब्लॉक के सतनाली, बाढ़ड़ा, बलाना, घाघरवास और अटेली ब्लॉक के ताजीपुर, खत्रीपुर, सराय बहादुर नगर, सुरानी, सलीमपुर, बेगपुर, तिगरा, धनौन्दा, घड़ी रुथल और कनीना के बेवल, झींगवान, पाथेड़ा, भड़फ और अगिहार में फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा पाई गई। विभाग के अनुसार फ्लोराइड की मात्रा 1.0 से 1.5 एमजी तक होनी चाहिए अगर इससे ज्यादा मिलती है स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
टीडीएस की मात्रा भी चार गुना ज्यादा
जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर पेयजल के सैंपल लिए जा रहे हैं जिनकी रिपोर्ट चिंताजनक है। मानकों के अनुसार टीडीएस की मात्रा 300 से 500 पीपीएम होनी चाहिए लेकिन जून 2025 में मोबाइल वैन से लिए गए सैंपलों में जिले के कई गांवों में यह सीमा चार गुना तक पार पाई गई। डाटा के अनुसार, निवाजनगर के एक ट्यूबवेल में 3915, मकसूसपुर 1 नियर पौंड में 2856, मकसूसपुर 2 में 2923, बलाहा कला में 2386, भांखरी में 2450, कोरियावास में 2670, अमरपुर जोरासी 2114, बिगोपुर में 2826, गांवड़ी जाट में 3277, हसनपुर में 2410, रामबास में 2486, धनौंता में 2946, आकोली में 2350, मेघोत हाला में 2190, मेई 2755, दौंगड़ा अहीर में 2730, तोबड़ा में 2140 में टीडीएस की मात्रा मिली थी। वहीं दौंगड़ा अहीर गांव में तो 420 सल्फेट की मात्रा पाई गई थी। साथ ही गांव के पानी में हार्डनेस की मात्रा भी 640 मिली है जो सेहत के लिए नुकसानदायक है।
शहर में खरीद रहे लोग पानी का पीने
शहर के लगभग पूरे बाजार सहित कई मोहल्लों के घरों में पीने के लिए आरओ पानी के कैंपर रखाए जा रहे हैं। इसके अलावा, जिन घरों में कैंपर नहीं जाते उन घरों में आरओ लगे हुए हैं। इसके अलावा, जिन गांवों में ज्यादा पानी में खारापन है वहां पर टैंकर मंगा कर प्यास बुझाई जा रही है।
बॉक्स
दूषित पानी के कारण पेट में दर्द रहता था। इसके बाद साफ पानी के लिए दुकान पर कैंपर मंगाने लग गया। -बिजेंद्र सिंह, दुकानदार, रेवाड़ी रोड
बॉक्स
पेयजल लाइन कई स्थानों से लीकेज है जिस कारण कई बार दूषित पानी आता है। वहीं बारिश के दौरान तो नल से बिल्कुल गंदा पानी आता है। -नंद किशोर, मोहल्ला-गणेश मार्केट
वर्जन:
शहर में अवैध कनेक्शनों की वजह से कई बार गंदा पानी सप्लाई होता है। इसको लेकर अभियान भी चलाया जाता है। जलघरों सहित बूस्टिंग स्टेशनों पर समय-समय पर पानी शुद्धता की जांच करवाई जाती है। जहां लाइन के लीकेज की शिकायत मिलती है उन्हें ठीक कराया जाता है।-मुकेश शर्मा, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग, नारनौल