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Mahendragarh-Narnaul News: सकल घरेलू उत्पाद में महिलाओं का अहम स्थान
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महेंद्रगढ़। राजकीय महाविद्यालय में चाणक्या इकोनॉमिक्स सोसाइटी और जेंडर स्टडीज सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में लैंगिक समानता और भेदभाव पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. लक्ष्मी नारायण और कार्यक्रम की मुख्य वक्ता प्रो. कविता रानी विभागाध्यक्ष अर्थशास्त्र ने विधिवत रूप से किया।
कार्यशाला में लैंगिक समानता के मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने, लैंगिक आधार पर भेदभाव को कम करने और समाज में सामाजिक और आर्थिक समानता को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिभागियों को सरकार और समाज के संयुक्त प्रयासों की महता पर प्रकाश डाला। प्रो. कविता रानी प्रो. कविता रानी ने कहा कि भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में महिलाओं का योगदान केवल 18 प्रतिशत है और उसका एक मुख्य कारण उनकी ओर से किए जाने वाले कार्य को जीडीपी की गणना में शामिल नहीं करना है।
लैंगिक असमानता को दूर करने में तीन आर रीकॉगनाईज, रीडीस्ट्रीब्यूट और रीड्यूस की रणनीति काफी कारगर सिद्ध हो सकती है। सबसे पहले तो महिलाओं के अवैतनिक कार्य के महत्व को समझना, उनकी ओर से किए गए कार्य को पुरुषों के मध्य बांटना तथा श्रम और समय की बचत करने वाली तकनीकों का लागू करना है।
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कार्यशाला में लैंगिक समानता के मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने, लैंगिक आधार पर भेदभाव को कम करने और समाज में सामाजिक और आर्थिक समानता को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिभागियों को सरकार और समाज के संयुक्त प्रयासों की महता पर प्रकाश डाला। प्रो. कविता रानी प्रो. कविता रानी ने कहा कि भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में महिलाओं का योगदान केवल 18 प्रतिशत है और उसका एक मुख्य कारण उनकी ओर से किए जाने वाले कार्य को जीडीपी की गणना में शामिल नहीं करना है।
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लैंगिक असमानता को दूर करने में तीन आर रीकॉगनाईज, रीडीस्ट्रीब्यूट और रीड्यूस की रणनीति काफी कारगर सिद्ध हो सकती है। सबसे पहले तो महिलाओं के अवैतनिक कार्य के महत्व को समझना, उनकी ओर से किए गए कार्य को पुरुषों के मध्य बांटना तथा श्रम और समय की बचत करने वाली तकनीकों का लागू करना है।
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