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Mahendragarh-Narnaul News: पिता की उंगली थामकर बना हर सपना हकीकत

Sat, 20 Jun 2026 12:52 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jun 2026 12:52 AM IST
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Holding my father's finger, every dream became a reality.
फोटो नंबर-18पिता सत्यवीर सिंह के साथ डॉ. मनीष शर्मा।
नारनौल/महेंद्रगढ़। पिता केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाली वह शक्ति हैं जो हर कदम पर हमें संभालते हैं। फादर्स डे के उपलक्ष्य पर पिता के प्रति सम्मान और आभार की यह भावना और भी गहरी हो जाती है। किसी ने पिता की ईमानदारी को अपनी दुकान की नींव बनाया, तो किसी ने उनकी मेहनत और त्याग को कॅरियर की ताकत। डॉक्टर, अधिकारी, शिक्षक या कारोबारी हर सफलता के पीछे एक पिता का मौन समर्थन और अटूट विश्वास छिपा है। पिता की सीख जीवन भर मार्गदर्शन करती है और मुश्किल समय में हौसला देती है।
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मेरे पापा किशन चंद हमेशा कहते थे कि जो भी करो, पूरी मेहनत और ईमानदारी से करो, कभी निराशा नहीं मिलेगी। उनकी यह सीख आज भी मेरे साथ है। उन्हीं की प्रेरणा से मैं अपनी दुकान अच्छे से चला रहा हूं और परिवार का सहारा बन पाया हूं।-हर्ष चौधरी, कपड़ा करोबारी
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मेरे पापा सत्यवीर सिंह पंचायत विभाग में एसडीओ थे। अपनी व्यस्त नौकरी के बावजूद उन्होंने हमेशा मेरी पढ़ाई को प्राथमिकता दी और मुझे डॉक्टर बनने की प्रेरणा दी। आज मैं जो कुछ भी हूं, उसमें उनकी सीख और मेहनत शामिल है। उनकी यादें हमेशा मुझे आगे बढ़ने की ताकत देती हैं।-डॉ. मनीष शर्मा, वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ
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मेरे पापा सुरेंद्र कुमार निर्मल ने छोटी सी घड़ी मरम्मत की दुकान चलाकर हमें पढ़ाया-लिखाया। सीमित आय में भी उन्होंने कभी हमारी शिक्षा और संस्कारों से समझौता नहीं किया। उनकी मेहनत व त्याग से ही समाज में सम्मान, प्रतिष्ठा और सेवा के क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान बनी है।-क्रांति निर्मल, संस्कृत प्रवक्ता
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जिंदगी में चुनौतियों को देख डरना नहीं है, जिंदगी में गंभीर रहने की बजाये हंसी खुशी चुनौतियों का सामना करो। प्रयास करते रहो मेहनत का फल अपने आप मिलेगा। शिक्षक एवं शिक्षाविद् पिता मोहम्मद रफीक की यह सीख सदैव मार्गदर्शन करती है। -आईपीएस फैसल खान, एएसपी, महेंद्रगढ़

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बेटा, मुझे तुझपर पूरा भरोसा है तू जो चाहेगा वह बनकर दिखाएगा, तुझमें हर चुनौती से निपटने की क्षमता है, अध्यापक पिता रामअवतार सिंह के इसी विश्वास को आज भी प्रेरणा मानता हूं। जब भी कहीं पढ़ाई का दौर हो या अधिकारी बनने के बाद, पिता की यह सीख आज भी उत्साहवर्धन करती है। -डॉ. अजय यादव, एसडीओ कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, महेंद्रगढ़


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