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हाई-रिजॉल्यूशन इमेजिंग से कोशिकीय को सटीकता से समझना आसान : पवन शर्मा
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फोटो संख्या:70- कार्यशाला में प्रतिभागिता करने वाले विद्यार्थी, शिक्षक एवं विशेषज्ञ--स्रोत- हके
महेंद्रगढ़। हाई-रिजॉल्यूशन इमेजिंग के माध्यम से वैज्ञानिक कोशिकीय प्रक्रियाओं को अधिक सटीकता से समझ सकते हैं। यह बात हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के समकुलपति प्रो. पवन कुमार शर्मा ने बुधवार को आयोजित कार्यशाला में कही।
उन्होंने आधुनिक जैविक एवं जैव-चिकित्सकीय अनुसंधान में कॉन्फोकल माइक्रोस्कोपी जैसी उन्नत इमेजिंग तकनीकों के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। यह कार्यशाला नाइकोन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से आयोजित की गई। इसमें लगभग 150 विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं संकाय सदस्यों ने भाग लिया।
विश्वविद्यालय की शोध अधिष्ठाता एवं आर एंड डी सेल की निदेशक प्रो. नीलम सांगवान ने सूक्ष्मदर्शी तकनीकों की भूमिका पर कहा कि ये तकनीकें कोशिका के भीतर की जटिल संरचनाओं एवं आणविक अंतःक्रियाओं को समझने में अत्यंत सहायक हैं जो जीवन विज्ञान अनुसंधान को नई दिशा प्रदान करती हैं।
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यह कार्यशाला प्रो. विपन परिहार, प्रो. अंतरेश कुमार व प्रो. गुंजन गोयल के मार्गदर्शन में आयोजित की गई। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. मुलाका मरुथी, डॉ. सौरभ सी. सक्सेना, डॉ. इंदरजीत कौर, डॉ. मनीषा पांडेय एवं डॉ. जितेंद्र कुमार सैनी द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में हकेंवि के विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों, शोधार्थियों व शिक्षकों के साथ जामिया मिलिया इस्लामिया बनस्थली विद्यापीठ मणिपाल विश्वविद्यालय जयपुर व डीसीआरयूएसटी मुरथल सहित अन्य संस्थानों के प्रतिनिधि भी सम्मिलित हुए।
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उन्होंने आधुनिक जैविक एवं जैव-चिकित्सकीय अनुसंधान में कॉन्फोकल माइक्रोस्कोपी जैसी उन्नत इमेजिंग तकनीकों के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। यह कार्यशाला नाइकोन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से आयोजित की गई। इसमें लगभग 150 विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं संकाय सदस्यों ने भाग लिया।
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विश्वविद्यालय की शोध अधिष्ठाता एवं आर एंड डी सेल की निदेशक प्रो. नीलम सांगवान ने सूक्ष्मदर्शी तकनीकों की भूमिका पर कहा कि ये तकनीकें कोशिका के भीतर की जटिल संरचनाओं एवं आणविक अंतःक्रियाओं को समझने में अत्यंत सहायक हैं जो जीवन विज्ञान अनुसंधान को नई दिशा प्रदान करती हैं।
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यह कार्यशाला प्रो. विपन परिहार, प्रो. अंतरेश कुमार व प्रो. गुंजन गोयल के मार्गदर्शन में आयोजित की गई। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. मुलाका मरुथी, डॉ. सौरभ सी. सक्सेना, डॉ. इंदरजीत कौर, डॉ. मनीषा पांडेय एवं डॉ. जितेंद्र कुमार सैनी द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में हकेंवि के विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों, शोधार्थियों व शिक्षकों के साथ जामिया मिलिया इस्लामिया बनस्थली विद्यापीठ मणिपाल विश्वविद्यालय जयपुर व डीसीआरयूएसटी मुरथल सहित अन्य संस्थानों के प्रतिनिधि भी सम्मिलित हुए।