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छह पार्षदों की सदस्यता रद् वाले केस में सुनवाई पूरी, डीसी हाईकोर्ट को भेजेंगे रिपोर्ट
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लघु सचिवालय में अधिवक्ता से बात करते हुए वार्ड पार्षद।
- फोटो : Narnol
नगर पालिका के छह पार्षदों की सदस्यता को लेकर चल रहे मामले में सोमवार को डीसी कोर्ट में बहस पूरी हो गई। अब डीसी अपनी रिपोर्ट शहरी स्थानीय निकाय के प्रधान सचिव के जरिये हाईकोर्ट भेजेंगे। सोमवार को करीब 45 मिनट चली बहस में पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपनी बात रखी। नपा के तात्कालिक सचिव अंकित वशिष्ठ रिकार्ड के साथ डीसी कोर्ट में पहुंचे।
नपा चेयरपर्सन रीना गर्ग ने अगस्त 2019 में नपा की लगातार चार मीटिंग में छह पार्षदों के शामिल नहीं होने का हवाला देकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में नपा के उप प्रधान रमेश बोहरा, पार्षद डॉ. तरुण, कृष्ण शर्मा, देवेंद्र सैनी, बबीता सैनी व विष्णु वाल्मीकि की सदस्यता रद्द करने की मांग थी। चेयरपर्सन ने अपनी याचिका में बताया कि 13 जुलाई 2017, 16 फरवरी 2018, 4 जनवरी 2019, 9 जनवरी 2019 की बैठक में हिस्सा नहीं लिया। लगातार चार बैठकों में नहीं आने के कारण पार्षदों की सदस्यता को रद्द किया जाए। उच्च न्यायालय ने 4 सितंबर को इस याचिका को कोर्ट में निपटान कर मामला संबंधित अधिकारी को भेज दिया। शहरी स्थानीय निकाय के निदेशक ने इस मामले में उपायुक्त से जांच रिपोर्ट मांगी। डीसी ने इस मामले में 24 नवंबर, 9 दिसंबर, 23 दिसंबर व 13 जनवरी को सुनवाई की। डीसी कोर्ट के निर्देश अनुसार नगर पालिका के तात्कालिक सचिव अंकित वशिष्ठ रिकार्ड के साथ पेश हुए। नगर पालिका की ओर से खिल्लूराम, जूनियर इंजीनियर शाहरुख खान पहुंचे।
डीसी ने उठाए सवाल
डीसी जगदीश शर्मा ने कहा कि एक ओर नगर पालिका चेयरपर्सन खुद समय मांगती हैं। उसके बाद डीसी के खिलाफ ही अवमानना का केस भी दायर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तय समय पर फैसला देने के लिए हर लगातार इस केस की सुनवाई हो रही थी। चेयरपर्सन के ससुर का निधन होने पर उनको अतिरिक्त समय दिया गया। इसके बाद 20 जनवरी की तारीख को भी चेयरपर्सन के वकील के अनुरोध पर ही आगे किया गया।
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हमारी ओर से सभी तथ्य रखे जा चुके हैं। सोमवार को तात्कालिक सचिव अंकित वशिष्ठ ने भी बयान दर्ज करा दिए हैं, सुनवाई और बहस पूरी हो चुकी है। डीसी ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब फैसले का इंतजार है।
- कर्ण सिंह, अधिवक्ता, पार्षद पक्ष।
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नपा चेयरपर्सन रीना गर्ग ने अगस्त 2019 में नपा की लगातार चार मीटिंग में छह पार्षदों के शामिल नहीं होने का हवाला देकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में नपा के उप प्रधान रमेश बोहरा, पार्षद डॉ. तरुण, कृष्ण शर्मा, देवेंद्र सैनी, बबीता सैनी व विष्णु वाल्मीकि की सदस्यता रद्द करने की मांग थी। चेयरपर्सन ने अपनी याचिका में बताया कि 13 जुलाई 2017, 16 फरवरी 2018, 4 जनवरी 2019, 9 जनवरी 2019 की बैठक में हिस्सा नहीं लिया। लगातार चार बैठकों में नहीं आने के कारण पार्षदों की सदस्यता को रद्द किया जाए। उच्च न्यायालय ने 4 सितंबर को इस याचिका को कोर्ट में निपटान कर मामला संबंधित अधिकारी को भेज दिया। शहरी स्थानीय निकाय के निदेशक ने इस मामले में उपायुक्त से जांच रिपोर्ट मांगी। डीसी ने इस मामले में 24 नवंबर, 9 दिसंबर, 23 दिसंबर व 13 जनवरी को सुनवाई की। डीसी कोर्ट के निर्देश अनुसार नगर पालिका के तात्कालिक सचिव अंकित वशिष्ठ रिकार्ड के साथ पेश हुए। नगर पालिका की ओर से खिल्लूराम, जूनियर इंजीनियर शाहरुख खान पहुंचे।
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डीसी ने उठाए सवाल
डीसी जगदीश शर्मा ने कहा कि एक ओर नगर पालिका चेयरपर्सन खुद समय मांगती हैं। उसके बाद डीसी के खिलाफ ही अवमानना का केस भी दायर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तय समय पर फैसला देने के लिए हर लगातार इस केस की सुनवाई हो रही थी। चेयरपर्सन के ससुर का निधन होने पर उनको अतिरिक्त समय दिया गया। इसके बाद 20 जनवरी की तारीख को भी चेयरपर्सन के वकील के अनुरोध पर ही आगे किया गया।
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हमारी ओर से सभी तथ्य रखे जा चुके हैं। सोमवार को तात्कालिक सचिव अंकित वशिष्ठ ने भी बयान दर्ज करा दिए हैं, सुनवाई और बहस पूरी हो चुकी है। डीसी ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब फैसले का इंतजार है।
- कर्ण सिंह, अधिवक्ता, पार्षद पक्ष।