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Mahendragarh-Narnaul News: शादी के छह महीने बाद ही हनुमान सिंह हो गए थे शहीद

Wed, 26 Jul 2023 12:41 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Wed, 26 Jul 2023 12:41 AM IST
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Hanuman Singh was martyred only after six months of marriage.
कनीना। उपमंडल के गांव कोटिया निवासी हनुमान सिंह ने सीने पर 5 गोलियां खाकर कारगिल में शहादत दी थी। हजारों फीट की ऊंचाई पर छिपे दुश्मनों को मात देना इतना आसान नहीं था, लेकिन जब बात मातृभूमि की रक्षा की हो तो वीर सपूतों के लिए ऐसी मुश्किलों का कोई अर्थ नहीं रह जाता। कारगिल में रणभेरी बजते ही परिवार को छोड़ खंड के गांव कोटिया के हनुमान सिंह कारगिल के लिए निकल पड़े। उस वक्त कुछ दिन पहले उनकी शादी हुई थी।
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शहीद हनुमान सिंह के पिता उदमी राम ने बताया कि हनुमान सिंह का जन्म 26 मार्च 1978 को हुआ। 24 जनवरी 1997 को पांच पैरा रेजिमेंट सेंटर बंगलूरू में बेटे की तैनाती हो गई थी। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद एक बार छुट्टी पर आया था। उसके बाद उसकी शादी 20 जनवरी 1999 को हो गई। शादी होने के कुछ दिन बाद ही हनुमान सिंह की ड्यूटी कारगिल युद्ध में लग गई। 25 जुलाई 1999 को उसके सीने में 5 गोलियां लग गई थी, जिसकी वजह से शहीद हो गया था। शहीद होने के बाद सरकार की ओर से सभी लाभ उसकी पत्नी को मिले। पत्नी की नौकरी भी मिल गई और पेट्रोल पंप भी अपने हाथ में ले लिया। तीन वर्ष बाद ही उसने दूसरी शादी कर ली। हनुमान सिंह के नाम पर गांव में शहीद हनुमान सिंह राजकीय माध्यमिक विद्यालय कोटिया बना हुआ है। गांव के मुखिया मोहल्ले में शहीद हनुमान सिंह स्मारक बना हुआ है, जिसमें शहीद हनुमान सिंह की बड़ी प्रतिमा स्थापित है। शहीद हनुमान सिंह की मां को आधी पेंशन मिल रही है। हनुमान सिंह के शहीद होने के बाद उसकी मां ने खेती-बाड़ी करके परिवार को पाला।
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फोटो संख्या: 57 और 58
अमर शहीद शिव कुमार को पूरा गांव कर रहता है याद
कनीना। शहीद शिव कुमार की पत्नी संतोष देवी ने बताया कि कारगिल युद्ध के प्रारंभ में देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले अमर शहीद शिवकुमार को पूरा गांव याद करता है। शहीद शिवकुमार की प्रतिमा गांव के बस स्टैंड स्थापित कर रखी है। शहीद शिवकुमार ऑपरेशन विजय के दौरान बटालिक सेक्टर में 22 ग्रेनेडियर ने जंक लूंगपा के अग्रिम जमाव क्षेत्रों को अधिकार में ले लिया। 24 जून 1999 को 6 बजे दुश्मन ने जंक लूंगपा क्षेत्र में भारी गोलाबारी की। अलफा कंपनी के हवलदार शिव कुमार ने अपने साथियों के सुरक्षा को मद्देनजर सेना को कवर करने के लिए राह दिखाई। इसमें उनके सीने में और दाहिने पैर में अपवर्त्य स्प्लिंटर लगी और वह वीरगति को प्राप्त हो गए। हवलदार शिव कुमार ने युद्ध के दौरान अत्यंत सराहनीय कार्य किया।
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शहीद शिव कुमार के बेटे जयलाल कुमार ने बताया कि जब उनके पिता शहीद हुए तब उनकी उम्र तकरीबन 11 वर्ष थी। सरकार की तरफ से उन्हें सरकारी नौकरी मिली, जिसमें उनके चाचा रामनिवास लगे हुए हैं। 2001 में पेट्रोल पंप उन्हें मिला था, जो महेंद्रगढ़ सतनाली रोड के गांव खारा में प्रारंभ हुआ था। वहां पर पेट्रोल पंप की बिक्री बहुत कम थी उसके 2 साल बाद कंपनी से निवेदन कर किया कि नांगल चौधरी के पास गुड़वाल गांव में इस पेट्रोल पंप को ट्रांसफर कर दिया जाए तो वहां पर कंपनी ने पेट्रोल पंप को ट्रांसफर कर दिया। 2014 तक परिवार पेट्रोल पंप को सुचारु रूप से चला रहा था। उसके बाद कंपनी के अधिकारियों ने नोटिस दिया की पेट्रोल पंप की सेल बढ़ाओ और हम सेल नहीं बढ़ा पाए इसके बाद कर्मचारियों ने आकर पेट्रोल पंप खुद के कब्जे में कर लिया। अब हम कंपनी के चक्कर पर चक्कर लगा रहे हैं। अब तक कंपनी हमें पेट्रोल पंप वापस नहीं दे रही है।

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शहीद अशोक कुमार ने कारगिल में दी थी सहादत
-तुरतूक पहाड़ी पर दुश्मनों को मारकर लिया था कब्जे में
फोटो संख्या: 59 और 60
कनीना। उपमंडल के गांव सीहोर के नवयुवक अशोक कुमार ने कारगिल युद्ध के दौरान अपनी शहादत दी थी। कारगिल युद्ध में भारतीय सेना के बहादुर जवानों ने सैकड़ों पाकिस्तानी सैनिकों को गोलियों से छलनी कर दिया था और जो बच गए थे, वे दुम दबाकर भाग गए थे। हालांकि अपनी वीरता का परिचय देते हुए कई भारतीय सैनिक शहीद हुए थे।

शहीद अशोक कुमार के पिता बलबीर सिंह ने बताया कि अशोक कुमार का जन्म 1 नवंबर 1977 को हुआ था। अशोक कुमार को खेलना बहुत पसंद था। वह रानीखेत में होने वाली खुली भर्ती में 1 मार्च 1997 को गए थे। जुलाई 1997 को 13 कुमाऊं रेजिमेंट रानीखेत में भर्ती हो गए। ट्रेनिंग के बाद अशोक कुमार की ड्यूटी विश्व के सबसे ऊंचे युद्ध स्थल सियाचिन ग्लेशियर में लग गई थी। सियाचिन ग्लेशियर से जब बटालियन नीचे उतरी उसके बाद उसे सीधे कारगिल की लड़ाई में भेज दिया गया था। अशोक कुमार की सगाई कर दी गई थी। जब परिवार वालों ने शादी के लिए पूछा तब उसने कहा कि कारगिल की जीत के बाद ही शादी करूंगा। कारगिल में अशोक कुमार की रेजिमेंट ने 5685 प्वाइंट पर तुरतूक पहाड़ी पर दुश्मनों को मार कर कब्जे में लिया था। इस दौरान वह शहीद हो गया था। शहीद अशोक कुमार को मरणोपरांत सैन्य सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था। शहीद अशोक कुमार के भाई राजवीर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि परिवार को सरकार की तरफ से एक गैस एजेंसी मिली हुई है। राज्य सरकार व केंद्र सरकार की तरफ से आर्थिक सहायता भी प्राप्त हुई थी। राज्य सरकार की तरफ से राजवीर सिंह को लेबर डिपार्टमेंट में नौकरी मिली हुई है। शहीद अशोक कुमार मेमोरियल क्लब के नाम से गांव में एक क्लब बनाया हुआ है।
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