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Mahendragarh-Narnaul News: मोटे अनाज पर शोध के लिए डीएसटी से मिला 94 लाख का अनुदान
Tue, 02 Jul 2024 11:57 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Tue, 02 Jul 2024 11:57 PM IST
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फोटो संख्या: 67 हकेंवि महेंद्रगढ़ का भवन---संवाद
महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि) में पोषण जीव विज्ञान विभाग में संकाय सदस्य डॉ. अनीता कुमारी को विज्ञान व प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) से साइंस एंड हेरिटेज रिसर्च इनीशिएटिव (एसएचआरआई) सेल के अंतर्गत मोटा अनाज पर शोध के लिए 94 लाख रुपये का अनुदान मिला है।
युवा वैज्ञानिकों के बीच नवीन अनुसंधान विचारों को आगे बढ़ाने के लिए इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय इस पहल के अंतर्गत अनुदान प्राप्त करने वाले तीन प्रमुख संस्थानों में शामिल है। विश्वविद्यालय के साथ-साथ इस शोध कार्य के लिए एनआईएफटीईएम-टी व जामिया हमदर्द को भी यह अवसर प्राप्त हुआ है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार और समकुलपति प्रो. सुषमा यादव ने डीएसटी, एसएचआरआई सेल से अनुसंधान अनुदान प्राप्त करने के लिए परियोजना टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह निश्चित रूप से विश्वविद्यालय में अनुसंधान गतिविधियों को बढ़ावा देगा और समाज के कमजोर वर्ग के बीच गैर-संचारी रोगों के प्रबंधन के लिए स्थायी समाधान प्रदान करेगा।
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डीएसटी ने वर्ष 2023-24 के लिए मोटा अनाज आधारित खाद्य उत्पादों का विकास अनुकूलन, लक्षण वर्णन और सत्यापन केंद्रित अनुसंधान व विकास परियोजना के लिए हकेंवि के पोषण जीवविज्ञान विभाग द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव का स्वीकृति प्रदान की है। इस परियोजना के अंतर्गत विभाग की सहायक आचार्य अनिता कुमारी प्रमुख अन्वेषक व सहआचार्य डॉ. अश्वनी कुमार, सह-प्रमुख अन्वेषक हैं।
डॉ. अनीता कुमारी ने बताया कि इस परियोजना के माध्यम से डीएसटी का उद्देश्य युवा वैज्ञानिकों के बीच नवीन अनुसंधान विचारों को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाना है, जिसका बड़े पैमाने पर समाज पर सीधा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वीकृत परियोजना के मुख्य आकर्षण में स्थानीय आबादी के बीच ऑन और ऑफ-कैंपस प्रशिक्षण के माध्यम से विकसित तकनीक का प्रसार शामिल हैं। यह कौशल विकास, रोजगार सृजन और गैर-संचारी रोगों के प्रबंधन के लिए नियमित आहार में शामिल करने के लिए मोटा अनाज को लोकप्रिय बनाने में सहायता करेगा।
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युवा वैज्ञानिकों के बीच नवीन अनुसंधान विचारों को आगे बढ़ाने के लिए इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय इस पहल के अंतर्गत अनुदान प्राप्त करने वाले तीन प्रमुख संस्थानों में शामिल है। विश्वविद्यालय के साथ-साथ इस शोध कार्य के लिए एनआईएफटीईएम-टी व जामिया हमदर्द को भी यह अवसर प्राप्त हुआ है।
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विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार और समकुलपति प्रो. सुषमा यादव ने डीएसटी, एसएचआरआई सेल से अनुसंधान अनुदान प्राप्त करने के लिए परियोजना टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह निश्चित रूप से विश्वविद्यालय में अनुसंधान गतिविधियों को बढ़ावा देगा और समाज के कमजोर वर्ग के बीच गैर-संचारी रोगों के प्रबंधन के लिए स्थायी समाधान प्रदान करेगा।
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डीएसटी ने वर्ष 2023-24 के लिए मोटा अनाज आधारित खाद्य उत्पादों का विकास अनुकूलन, लक्षण वर्णन और सत्यापन केंद्रित अनुसंधान व विकास परियोजना के लिए हकेंवि के पोषण जीवविज्ञान विभाग द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव का स्वीकृति प्रदान की है। इस परियोजना के अंतर्गत विभाग की सहायक आचार्य अनिता कुमारी प्रमुख अन्वेषक व सहआचार्य डॉ. अश्वनी कुमार, सह-प्रमुख अन्वेषक हैं।
डॉ. अनीता कुमारी ने बताया कि इस परियोजना के माध्यम से डीएसटी का उद्देश्य युवा वैज्ञानिकों के बीच नवीन अनुसंधान विचारों को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाना है, जिसका बड़े पैमाने पर समाज पर सीधा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वीकृत परियोजना के मुख्य आकर्षण में स्थानीय आबादी के बीच ऑन और ऑफ-कैंपस प्रशिक्षण के माध्यम से विकसित तकनीक का प्रसार शामिल हैं। यह कौशल विकास, रोजगार सृजन और गैर-संचारी रोगों के प्रबंधन के लिए नियमित आहार में शामिल करने के लिए मोटा अनाज को लोकप्रिय बनाने में सहायता करेगा।