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डेंगू का डर, वायरल का हल्ला
ब्यूरो/ अमर उजाला, नारनौल
Updated Fri, 10 Oct 2014 12:39 AM IST
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मौसम में बदलाव के साथ ही लोगों की सेहत पर वायरल ने हल्ला बोल रखा है और डेंगू का भी डर लोगों को सता रहा है। ऐसे मेें खुद ही ‘बीमार’ चल रहा सामान्य अस्पताल लोगों के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। अस्पताल की ओपीडी में रोजाना आने वाले 350 मरीज सिर्फ दो डॉक्टरों के हवाले हैं। ऐसे में इमरजेंसी भी उन्हें ही देखनी पड़ रही है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग फिर से देहात से डेपुटेशन पर डॉक्टरों को बुलाने की फिराक में है।
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सामान्य अस्पताल का आलम यह है क ियहां न तो डेंगू की जांच के लिए मशीन है और न ही डॉक्टरों की पर्याप्त संख्या। मामूली बुखार के चेकअप के लिए भी डॉक्टर कम होने के कारण ओपीडी में डेढ़ घंटे से दो घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। मौसम बदलने के कारण बीमारियों खासकर वायरल ने हमला बोल रखा है, इसके साथ ही कुछ लोग मलेरिया से भी पीड़ित हैं।
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बृहस्पतिवार को स्थिति ऐसी थी कि बच्चों के साथ-साथ बुजुर्गों की लंबी लाइन लगी थी। इंतजार था बस डॉक्टर एक बार चेकअप कर दे कि आखिर बीमारी क्या है। केवल इंतजार ही नहीं ज्यादा देर खड़ा नहीं रहा गया तो बुजुर्गों ने जमीन को बेड समझ लिया और लेट गए।
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रोजाना होते झगड़े, कैसे चेक करें डॉक्टर
केवल मरीजों को ही परेशानी नहीं उठानी पड़ रही, बल्कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर भी परेशान हैं। चेकअप को लेकर खुद की बारी को लेकर रोजाना यहां पर झगड़े होते हैं। डाक्टरों का कहना है कि क्या एक डॉक्टर ओपीडी में 150 से 200 मरीजों को चेक कर सकता है? इतना ही नहीं बीच में एक्सीडेंट और झगड़े के केस भी संभालने पड़ते हैं, साथ ही और पोस्टमार्टम केस भी देखने पड़ते हैं।
नहीं है एनालाइजर मशीन
सामान्य अस्पताल में केवल खून की जांच की जाती है। इसमें वायरल और मलेरिया का पता चलता है। डेंगू की जांच के लिए अलग से एनालाइजर मशीन यहां नहीं है। ऐसे में बिना जांच के कैसे मरीज का इलाज हो सकता है। संभावित डेंगू के मरीजों को नारनौल और रोहतक भेजा जाता है। अस्पताल में न तो कोई अलग से डेंगू वार्ड बनाया गया है और न लोगों को जागरूक करने के लिए विभाग की ओर से कोई जागरूकता अभियान चलाया गया है।
कन्फर्म मरीज एक भी नहीं
सरकारी अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार महेंद्रगढ़ में अभी तक एक भी मरीज को डेंगू का कन्फर्म मरीज नहीं मिला है। बावजूद इसके लोगों में डेंगू को लेकर भय का माहौल बना हुआ है। एसएमओ का कहना है कि 300 में से 200 के करीब मरीज वायरल के हैं। मौसम बदलने के कारण लोगों को खांसी, जुकाम और बुखार हैं। केवल लोगों में डेंगू को लेकर डर है, डेंगू से डरने की बजाए लड़ने की जरूरत है। एहतियात के तौर पर बृहस्पतिवार को शहर में फॉगिंग कराई गई, ताकि मच्छर न पनप सकें।
प्लेटलेट्स कम तो सिर्फ डेंगू होना नहीं
केवल डेंगू में ही खून में प्लेटलेट्स कम होती, बल्कि आम वायरल होने पर भी इनमें कमी आ जाती है। डाक्टरों का कहना है कि प्लेटलेट्स की संख्या बहुत कम समय में बढ़ती और घटती है, इसलिए न तो इसे नजरअंदाज करना चाहिए और न ही बहुत परेशान होना चाहिए। पीजीआई रोहतक के वरिष्ठ प्रोफेसर डा. ध्रुव चौधरी का कहना है कि कई बार संक्रमण की वजह से लेकर मलेरिया, टायफायड और कैंसर जैसी बीमारियों में भी इनकी संख्या कम हो जाती है। प्लेटलेट्स कम होने से एलर्जी होने से संभावना भी बढ़ जाती है। इनकी कमी को डेंगू नहीं मानना चाहिए। अगर 10 हजार से नीचे प्लेटलेट्स होते हैं तो वह सस्पेक्टिड डेंगू का केस होता है।
कैसे बढ़ाएं प्लेटलेट्स
चिकित्सकों के अनुसार प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए अधिक तरल पदार्थ लें, खून पानी पीएं, एक चम्मच हल्दी दूध के साथ लें, नींबू पानी लें। उन्होंने बताया कि सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (एक व्यक्ति के खून से सिर्फ प्लेटलेट्स निकालना) चढ़ाना ज्यादा अच्छा होता है। इससे खून की बर्बादी नहीं होती और प्रति यूनिट संख्या भी ज्यादा होती है।
लक्षण और बचाव
डेंगू होने पर सिर दर्द, जोड़ों में दर्द व शरीर पर निशान पड़ जाते हैं। साथ ही तेज बुखार होता है। यह एडिस नामक मच्छर से फैलता है और यह मच्छर साफ पानी में पैदा होता है। बुखार पर तुरंत खून की जांच कराएं और अच्छे डाक्टर के पास इलाज कराएं। आसपास सफाई रखें और कूलर व बर्तनों में पानी जमा न होने दें।