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Mahendragarh-Narnaul News: न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर बाजरा बेचने को किसान मजबूर

Sat, 04 Oct 2025 11:59 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Sat, 04 Oct 2025 11:59 PM IST
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Farmers forced to sell millet below the minimum support price
फोटो नंबर- 21नारनौल ​स्थित नई अनाज मंडी में बाजरे की ढेरी लगाते किसान। संवाद
नारनौल। बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2775 रुपये निर्धारित किया गया था लेकिन किसान अपनी फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य से 200 से 300 रुपये कम पर बेचने को मजबूर हैं।
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भावांतर के तहत खरीद शुरू होने से पहले सरकार द्वारा बाजरे का बाजार भाव 2150 रुपये और भावांतर के तहत 675 रुपये निर्धारित किए गए थे लेकिन खरीद शुरू होने के बाद गुणवत्ता खराब बताकर बाजरे की सरकारी खरीद नहीं की गई। इसी दौरान सरकार द्वारा बाजरे का बाजार भाव 50 रुपये बढ़ा दिया गया। इसके बाद किसान को भावांतर के तहत 575 रुपये निर्धारित किए गए।
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लेकिन अब बाजरे की खरीद शुरू हुए 12 दिन बीत चुके हैं और सरकारी खरीद अभी तक शुरू नहीं हुई है और व्यापारी केवल 1900 से 2 हजार रुपये के भाव पर बाजरा खरीद रहे हैं। ऐसे में किसान केवल 1900 से 2 हजार रुपये में बाजरा व्यापारी को बेच रहे है और 575 रुपये भावांतर के तहत मिल रहे हैं। इस कारण किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य की तुलना में 200 से 300 रुपये कम पर बाजरा बेच रहे हैं।
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इंसेट
6 हजार एकड में फसल खराबा की गिरदावरी का कार्य बाकी
अगस्त के अंत और सितंबर की शुरूआत में लगातार बारिश के कारण बाजरे की फसल खराब हो गई थी। इसके बाद जिले के करीब 69678 किसानों ने करीब 2 लाख 95 हजार एकड़ क्षेत्र पर फसल खराबा की शिकायत दर्ज करवाई थी। इसमें से अब तक करीब 2 लाख 89 हजार एकड़ क्षेत्र में गिरदावरी का कार्य पूरा कर लिया गया है। करीब 6 हजार एकड की गिरदावरी का कार्य शेष है। 100 प्रतिशत फसल खराबा पर प्रति एकड़ 15 हजार रुपये का मुआवजा निर्धारित किया गया है। वहीं ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर फसल खराबा की शिकायत दर्ज करवाने के बाद किसानों को मुआवजा प्रति एकड़ हुई पैदावार के हिसाब से दिया जाएगा। कहां कितनी फसल खराब हुई है, इसका आकलन गिरदावरी व जे फार्म के तहत बेची गई फसल के आधार पर किया जाएगा। वहीं किसानों का कहना है कि फसल की कटाई के दौरान बारिश हुई थी, इसलिए बाजरे की पैदावार नहीं ब्लकि उसकी गुणवत्ता प्रभावित हुई है। इसलिए मुआवजा पैदावार की जगह गुणवत्ता के आधार पर दिया जाना चाहिए।
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सरकार मुआवजा तो बाजरे की पैदावार के हिसाब से देगी। इस कारण किसानों को बाजरे का उचित मूल्य और मुआवजा दोनों ही नहीं मिल पाएगा क्योंकि बारिश के कारण बाजरे की पैदावार नहीं गुणवत्ता खराब हुई है।-ओम प्रकाश,किसान,गांव-कोथल खुर्द
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बाजरे की सरकारी खरीद शुरू नहीं की गई और खरीद के दौरान बाजार भाव में 50 रुपये और बढ़ा दिए गए। इस कारण भावांतर में भी 50 रुपये की कटौती हो गई। किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य से 200 से 300 रुपये कम पर फसल बेचने को मजबूर हैं।-सुरेश कुमार,किसान,गांव-डेरोली अहीर

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वर्जन :
फसल खराबा की शिकायत के बाद गिरदावरी तेजी से की जा रही है। अब तक करीब 98 प्रतिशत क्षेत्र में गिरदावरी का कार्य पूरा किया जा चुका है। शेष क्षेत्र में गिरदावरी आगामी सप्ताह तक पूरी कर ली जाएगी।-राकेश कुमार, डीआरओ,नारनौल।
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