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खेती: पारंपरिक छोड़ शुरू की एप्पल बेर की खेती, डेढ़ एकड़ से कमा रहे 3.50 लाख सालाना

Sun, 06 Feb 2022 11:04 PM IST
भूपेंद्र सिंह इंद्रजीत शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, कनीना, महेंद्रगढ़ (हरियाणा)
इंद्रजीत शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, कनीना, महेंद्रगढ़ (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Sun, 06 Feb 2022 11:04 PM IST
सार

बाइक और स्कूटर की मरम्मत का काम छोड़ शुरू की जैविक। खेती तीन वर्ष पहले तीन दिन का प्रशिक्षण लेकर  खेती शुरू की थी।

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Farmer of Mahendragarh is earning profit by cultivating apple plum by leaving traditional farming
पारंपरिक छोड़ शुरू की एप्पल बेर की खेती। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के कनीना में पारंपरिक खेती मे ज्यादा फायदा नहीं होने कारण बहुत से किसान अब आधुनिक तरीके से खेती कर लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं। ऐसे किसानों में ही शामिल हैं गांव इसराना निवासी किसान अजय सिंह, जो तीन तीन साल पहले एप्पल बेर की खेती शुरू कर अब डेढ़ एकड़ में 3 लाख 50 हजार रुपये सालाना कमा रहे हैं।

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अजय सिंह स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद बहरोड में स्कूटर, बाइक की मरम्मत का काम शुरू किया, लेकिन वह अधिक नहीं चल पाया। इसके बाद अजय ने परंपरागत खेती करनी शुरू कर दी, लेकिन उसमें अच्छा मुनाफा नहीं होने पर एकीकृत बागवानी विकास केंद्र सुंदरह में संपर्क किया। वहां पर उन्होंने आधुनिक तकनीक से जैविक खेती करने का दो-तीन दिन तक प्रशिक्षण लिया और शुरू कर कर दी खेती।

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तीन वर्ष पहले करीब 50 हजार की लागत

अजय सिंह ने जैविक विधि से डेढ़ एकड़ जमीन में जून 2019 में ग्रीन एप्पल बेर व कश्मीरी एप्पल बेर के 300 पौधे लगाए। इसमें बहुत ज्यादा लागत भी नहीं आई। उन्होंने 40 से 50 हजार रुपये खर्च कर 300 पौधे लगाए, जोकि पहली फसल से ही उनके पैसे वापस देने लगे। एक बार इन पौधों पर रुपये खर्च करने के बाद किसी भी तरह का खर्च नहीं होता। 18 से 20 साल तक लगातार आप इन पौधों से फल ले सकते हैं और काफी अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। 

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एक पौधो से मिल रहे 50 किलोग्राम तक बेर

अजय ने बताया कि पहले वर्ष में उन्हें एक पौधे से 2 से 5 किलो बेर का फल प्राप्त हुआ। उसके बाद अगले वर्ष 15 से 20 किलो तो अब तीसरे वर्ष यह उत्पादन बढ़कर 40 से 50 किलो तक पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि एप्पल बेर कम से कम 20 से 30 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकती है। अजय ने बताया कि वह पास लगते कस्बे कनीना में रेहड़ी टेंपो चालकों को यह बेर 25 से 30 किलो के हिसाब से बेच देते हैं। तकरीबन 3 लाख 50 हजार रुपये की एक वर्ष में आमदनी हो जाती है। 

किसान ने ये विधि अपना अपनाई

एप्पल बेर के पौधे को रोपने से पहले 15 फीट की दूरी पर तीन फीट गड्ढे खोदने होते हैं उसके बाद उनमें  गोबर की खाद डालकर तैयार करना पड़ता है। उन गड्ढों में पौधों की रोपाई की जाती है। पहले व दूसरे वर्ष इन पौधों के बीच में छोटी हाइट की कोई भी फसल लगाई जा सकती है। लेकिन तीसरे वर्ष के बाद पौधों के बड़े होने पर इनके बीच कोई फसल नहीं उगाई जा सकती। खास बात यह है के एप्पल बेर में बहुत अधिक पानी की जरूरत नहीं होती। बेर पर फल लगने से कुछ समय पूर्व ही चारों तरफ जाल लगा दिया जाता है जिसकी वजह से पक्षियों से बचाया जा सके।

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