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Mahendragarh-Narnaul News: गुलाब की घोड़ी और ऊंट का नृत्य सबको भाया
Fri, 03 Mar 2023 10:50 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Fri, 03 Mar 2023 10:50 PM IST
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बाबा मोलडनाथ मेले में ऊंटों की दौड़ में हिस्सा लेते प्रतिभागी।
कनीना। बाबा मोलड़नाथ मेले ने सभी का मन मोह लिया। मेले में जहां अपार शक्ति देखने को मिली। मेले में कुश्ती, घोड़ों की दौड़, घोड़ियों की चाल, घोड़ी और ऊंट का नृत्य आदि अनेक मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित किए गए। एक दर्जन ऊंटों ने करतब दिखाकर मन मोह लिया। चारपाई पर खड़े होकर ऊंटों ने नृत्य किया। उनके द्वारा हवा में करतब दिखाने, बाल्टी और केतली द्वारा पानी पिलाने जैसे करतब दिखाए गए। मेले में झुंझुनू निवासी गुलाब की घोड़ी और ऊंट का नृत्य प्रथम स्थान पर रहा।
विभिन्न प्रतियोगिताओं के परिणाम
नेकीराम बगड़ का ऊंट नाच प्रतियोगिता में प्रथम रहा। नेकी राम का द्वितीय स्थान पर रहा। घोड़ियों ने अगले पैरों पर खड़े होकर नृत्य किया। घोड़ियों की चाल में बाबा राजूदास बेरला की घोड़ी प्रथम, बलजीत दोहरका की घोड़ी द्वितीय, मदन कासण की घोड़ी तृतीय स्थान पर रही। घोड़ियों के नृत्य में गुलाब झुंझुनू की घोड़ी प्रथम, सोमबीर लाड की दूसरे और सुभाष करणावत तीसरे स्थान पर रही। ऊंटों के नृत्य में प्रथम सुभाष करणावत, दूसरे स्थान पर रामफल लाड और तीसरे स्थान पर गुलाब झुंझुनू का ऊंट रहा। ऊंटों की दौड़ में शारू बबेड़ी प्रथम, चेतराम उर्फ जगदीश डागीवास दूसरे स्थान पर और तीसरे स्थान पर सुरेश इसालपुर रहे। घोडिय़ों की दौड़ में राजकुमार महिपालवास प्रथम, आशीश माधोगढ़ दूसरे स्थान पर रहे, बाबा बालकनाथ तीसरे स्थान पर रहे।
भारी संख्या में पूरे प्रदेश से लोग पहुंचे
यह मेला एकादशी को मेला लगता है। फाल्गुन की एकादशी का यह मेला अपार भक्ति और श्रद्धा से भरा होता है जिसमें भारी संख्या में पूरे प्रदेश से भक्त आते हैं। बाबा मोलड़नाथ लंबे समय तक यहां तप किया। पूरा कनीना कस्बा ही नहीं मांदी, रोड़वाल तथा ढाणी बाठोठा तक के लोग मेले में भारी संख्या में पहुंचे। कनीना के इस मेले में बाबा आश्रम को फूल मालाओं से सजाया हुआ था। बाबा की प्रतिमा को भी फूल मालाओं से सजाकर आकर्षक बनाया हुआ था। मेले में धुने के स्थान पर सेवक भक्तों की सेवा में लगे हुए थे। मेले में अनेक भक्तजनों ने भंडारा लगाया। बीती शाम को मोलड़नाथ सत्संग मंडल सहित कई मंडलों ने सत्संग एवं भजन किए।
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कल होंगी ये प्रतियोगिताएं
ऊंटों की दौड़ में 51 हजार प्रथम, 41 हजार द्वितीय पुरस्कार, 31 हजार तृतीय, 21 हजार का चतुर्थ पुरस्कार और पंचम पुरस्कार 11 हजार रुपये का होगा। देसी घोड़ियों की दौड़ में 51 हजार प्रथम, 41 हजार द्वितीय पुरस्कार, 31 हजार तृतीय, 21 हजार का चतुर्थ पुरस्कार और पंचम पुरस्कार 11 हजार रुपये का होगा। बड़ी कुश्ती 31 हजार रुपये की होगी। घोडिय़ों की चाल में प्रथम पुरस्कार 21 हजार, द्वितीय पुरस्कार 15 हजार रुपये और तृतीय पुरस्कार 7100 रुपये का रखा गया है।
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विभिन्न प्रतियोगिताओं के परिणाम
नेकीराम बगड़ का ऊंट नाच प्रतियोगिता में प्रथम रहा। नेकी राम का द्वितीय स्थान पर रहा। घोड़ियों ने अगले पैरों पर खड़े होकर नृत्य किया। घोड़ियों की चाल में बाबा राजूदास बेरला की घोड़ी प्रथम, बलजीत दोहरका की घोड़ी द्वितीय, मदन कासण की घोड़ी तृतीय स्थान पर रही। घोड़ियों के नृत्य में गुलाब झुंझुनू की घोड़ी प्रथम, सोमबीर लाड की दूसरे और सुभाष करणावत तीसरे स्थान पर रही। ऊंटों के नृत्य में प्रथम सुभाष करणावत, दूसरे स्थान पर रामफल लाड और तीसरे स्थान पर गुलाब झुंझुनू का ऊंट रहा। ऊंटों की दौड़ में शारू बबेड़ी प्रथम, चेतराम उर्फ जगदीश डागीवास दूसरे स्थान पर और तीसरे स्थान पर सुरेश इसालपुर रहे। घोडिय़ों की दौड़ में राजकुमार महिपालवास प्रथम, आशीश माधोगढ़ दूसरे स्थान पर रहे, बाबा बालकनाथ तीसरे स्थान पर रहे।
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भारी संख्या में पूरे प्रदेश से लोग पहुंचे
यह मेला एकादशी को मेला लगता है। फाल्गुन की एकादशी का यह मेला अपार भक्ति और श्रद्धा से भरा होता है जिसमें भारी संख्या में पूरे प्रदेश से भक्त आते हैं। बाबा मोलड़नाथ लंबे समय तक यहां तप किया। पूरा कनीना कस्बा ही नहीं मांदी, रोड़वाल तथा ढाणी बाठोठा तक के लोग मेले में भारी संख्या में पहुंचे। कनीना के इस मेले में बाबा आश्रम को फूल मालाओं से सजाया हुआ था। बाबा की प्रतिमा को भी फूल मालाओं से सजाकर आकर्षक बनाया हुआ था। मेले में धुने के स्थान पर सेवक भक्तों की सेवा में लगे हुए थे। मेले में अनेक भक्तजनों ने भंडारा लगाया। बीती शाम को मोलड़नाथ सत्संग मंडल सहित कई मंडलों ने सत्संग एवं भजन किए।
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कल होंगी ये प्रतियोगिताएं
ऊंटों की दौड़ में 51 हजार प्रथम, 41 हजार द्वितीय पुरस्कार, 31 हजार तृतीय, 21 हजार का चतुर्थ पुरस्कार और पंचम पुरस्कार 11 हजार रुपये का होगा। देसी घोड़ियों की दौड़ में 51 हजार प्रथम, 41 हजार द्वितीय पुरस्कार, 31 हजार तृतीय, 21 हजार का चतुर्थ पुरस्कार और पंचम पुरस्कार 11 हजार रुपये का होगा। बड़ी कुश्ती 31 हजार रुपये की होगी। घोडिय़ों की चाल में प्रथम पुरस्कार 21 हजार, द्वितीय पुरस्कार 15 हजार रुपये और तृतीय पुरस्कार 7100 रुपये का रखा गया है।