{"_id":"68c5ccadb0fed2ef720f7beb","slug":"every-person-should-do-good-deeds-kuldeep-narnol-news-c-203-1-mgh1004-120113-2025-09-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"हर व्यक्ति अच्छे कर्म करे : कुलदीप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हर व्यक्ति अच्छे कर्म करे : कुलदीप
Sun, 14 Sep 2025 01:27 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sun, 14 Sep 2025 01:27 AM IST
विज्ञापन
फोटो संख्या:83- महेंद्रगढ़ के मैरिज पैलेस में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथा सुनती महिलाए
- फोटो : डलमऊ कोतवाली में फरियादियों की शिकायतें सुनते अधिकारी।
महेंद्रगढ़। बाबा पूर्णमल मैरिज पैलेस में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं को कपिल चरित्र, सती चरित्र, ध्रुव चरित्र, जड़ भरत चरित्र की कथा सुनाई गई।
कथाव्यास कुलदीप भारद्वाज ने बताया कि मनुष्य से जीवन में जाने अनजाने प्रतिदिन कई पाप होते हैं। उनका ईश्वर के समक्ष प्रायश्चित करना ही एक मात्र मुक्ति पाने का उपाय है। उन्होंने ईश्वर आराधना के साथ अच्छे कर्म करने का आह्वान किया। जीवन में सत्संग व शास्त्रों में बताए आदर्शों का श्रवण करने का आह्वान करते हुए कहा कि सत्संग में वह शक्ति है, जो व्यक्ति के जीवन को बदल देती है।
उन्होंने कहा कि व्यक्तियों को अपने जीवन में क्रोध, लोभ, मोह, हिंसा, संग्रह आदि का त्यागकर विवेक के साथ श्रेष्ठ कर्म करने चाहिए। उन्होंने भगवत कीर्तन करने, ज्ञानी पुरुषों के साथ सत्संग कर ज्ञान प्राप्त करने व अपने जीवन को सार्थक करने का आह्वान किया। भजन मंडली की ओर से प्रस्तुत किए गए भजनों पर श्रोता भाव विभोर होकर नाचने लगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
कथाव्यास कुलदीप भारद्वाज ने बताया कि मनुष्य से जीवन में जाने अनजाने प्रतिदिन कई पाप होते हैं। उनका ईश्वर के समक्ष प्रायश्चित करना ही एक मात्र मुक्ति पाने का उपाय है। उन्होंने ईश्वर आराधना के साथ अच्छे कर्म करने का आह्वान किया। जीवन में सत्संग व शास्त्रों में बताए आदर्शों का श्रवण करने का आह्वान करते हुए कहा कि सत्संग में वह शक्ति है, जो व्यक्ति के जीवन को बदल देती है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि व्यक्तियों को अपने जीवन में क्रोध, लोभ, मोह, हिंसा, संग्रह आदि का त्यागकर विवेक के साथ श्रेष्ठ कर्म करने चाहिए। उन्होंने भगवत कीर्तन करने, ज्ञानी पुरुषों के साथ सत्संग कर ज्ञान प्राप्त करने व अपने जीवन को सार्थक करने का आह्वान किया। भजन मंडली की ओर से प्रस्तुत किए गए भजनों पर श्रोता भाव विभोर होकर नाचने लगे।
विज्ञापन