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Mahendragarh-Narnaul News: हकेंवि में गैर-संचारी रोगों से विटामिन डी के संबंध पर दिया बल
Sat, 23 Mar 2024 02:34 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 23 Mar 2024 02:34 PM IST
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महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के पोषण जीवविज्ञान विभाग द्वारा हाइपोविटामिनोसिस डी के आंकलन व प्रबंधन पर केंद्रित सात दिवसीय कार्यशाला का समापन हो गया। एसईआरबी-डीएसटी द्वारा वित पोषित इस कार्यशाला में देशभर से 25 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार व समकुलपति प्रो. सुषमा यादव ने विद्यार्थियों में कौशल विकास बढ़ाने में इस तरह के आयोजनों को महत्वपूर्ण बताया। विश्वविद्यालय के रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल की निदेशक व स्कूल ऑफ इंटर डिसिप्लिनरी एंड एप्लाइड साइंसेस की अधिष्ठाता प्रो. नीलम सांगवान ने समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में कार्यशाला के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने गैर-संचारी रोगों से विटामिन डी के संबंध पर जोर दिया और प्रतिभागियों को अपने अनुसंधान क्षेत्रों में सीखे गए कौशल को विकसित करने के लिए प्रेरित किया। विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. कांति प्रकाश शर्मा ने कहा कि बहुत संख्या में लोग इस मूक महामारी का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विटामिन डी से भरपूर खाद्य पदार्थों को अपने भोजन में शामिल करके इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। आयोजन में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
कार्यशाला आयोजक डॉ. अनीता कुमारी ने बताया कि आयोजन में केंद्रीय विश्वविद्यालय मिजोरम, दिल्ली विश्वविद्यालय, आईएआरआई, नई दिल्ली, केएनएयू, राजस्थान, जीजेयूएसएंडटी, हिसार से सम्मिलित विशेषज्ञों ने एंथ्रोपोमेट्रिक माप, एलिसा तकनीक का उपयोग करके विटामिन डी के स्तर का अनुमान, कैल्शियम अनुमान, सीबीसी प्रोफाइलिंग, विटामिन डी समृद्ध कार्यात्मक खाद्य उत्पादों का विकास, इसके पोषक तत्व प्रोफाइलिंग, संवेदी मूल्यांकन, जैव सूचनात्मक प्रशिक्षण जैसे अनुक्रम पुनप्रार्प्ति जैसे विभिन्न पहलुओं पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। इस अवसर पर डॉ. उमेश कुमार, डॉ. तेजपाल ढ़ेवा, डॉ. सविता बुधवार सहित विभिन्न विभागों के विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार व समकुलपति प्रो. सुषमा यादव ने विद्यार्थियों में कौशल विकास बढ़ाने में इस तरह के आयोजनों को महत्वपूर्ण बताया। विश्वविद्यालय के रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल की निदेशक व स्कूल ऑफ इंटर डिसिप्लिनरी एंड एप्लाइड साइंसेस की अधिष्ठाता प्रो. नीलम सांगवान ने समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में कार्यशाला के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने गैर-संचारी रोगों से विटामिन डी के संबंध पर जोर दिया और प्रतिभागियों को अपने अनुसंधान क्षेत्रों में सीखे गए कौशल को विकसित करने के लिए प्रेरित किया। विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. कांति प्रकाश शर्मा ने कहा कि बहुत संख्या में लोग इस मूक महामारी का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विटामिन डी से भरपूर खाद्य पदार्थों को अपने भोजन में शामिल करके इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। आयोजन में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
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कार्यशाला आयोजक डॉ. अनीता कुमारी ने बताया कि आयोजन में केंद्रीय विश्वविद्यालय मिजोरम, दिल्ली विश्वविद्यालय, आईएआरआई, नई दिल्ली, केएनएयू, राजस्थान, जीजेयूएसएंडटी, हिसार से सम्मिलित विशेषज्ञों ने एंथ्रोपोमेट्रिक माप, एलिसा तकनीक का उपयोग करके विटामिन डी के स्तर का अनुमान, कैल्शियम अनुमान, सीबीसी प्रोफाइलिंग, विटामिन डी समृद्ध कार्यात्मक खाद्य उत्पादों का विकास, इसके पोषक तत्व प्रोफाइलिंग, संवेदी मूल्यांकन, जैव सूचनात्मक प्रशिक्षण जैसे अनुक्रम पुनप्रार्प्ति जैसे विभिन्न पहलुओं पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। इस अवसर पर डॉ. उमेश कुमार, डॉ. तेजपाल ढ़ेवा, डॉ. सविता बुधवार सहित विभिन्न विभागों के विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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