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धैर्य और सौहार्द का नाम ही ईद : मौलवी मुबारक
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महेंद्रगढ़। खुशियों व भाईचारे का त्योहार ईद उल-फितर सोमवार को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाया। लोगों ने सुबह 8 बजे पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास ईदगाह में नमाज अदा कर क्षेत्र में अमन-चैन की दुआ मांगी। युवाओं में नमाज को लेकर खासा उत्साह नजर आया।
ईद की मुख्य नमाज महेंद्रगढ़ मस्जिद के इमाम मौलवी मुबारक हुसैन ने करवाई। उन्होंने कहा कि धैर्य और सौहार्द का नाम ही ईद है। पवित्र रमजान माह में पूरे धैर्य के साथ धार्मिक नियमों का पालन करते हुए प्रतिदिन रोजा रखना धैर्य ही है। इस त्याग और बलिदान के पश्चात ही महीने के प्रथम दिन ईदगाह में नमाज अदा कर ईद की खुशियां मनाते रहे हैं। हमें एक-दूसरे को दर्द को समझना चाहिए। अल्लाह से सबके के लिए दुआ करनी चाहिए। ऐसा कोई काम न करें, जिससे किसी की भावनाएं आहत हों।
नमाज से पहले मौलानाओं ने मुसलमानों को बुराइयों से बचने और अच्छाई के रास्ते पर चलने की सीख दी। दुनिया और देश में अमन-शांति बरकरार रहनी चाहिए। ईद उल फितर अमन और शांति का प्रतीक है। जिले में दशकों से हिंदू-मुस्लिम एकता बरकरार रही है, यही इस इलाके की सबसे बड़ी पहचान है। भविष्य में भी अमन व शांति बरकरार रहे, इसकी हर संभव कोशिश करनी चाहिए। इस मौके पर मंगतु खान, दिन मोहम्मद, हाजी रफीक, यासीन मोहम्मद, रहीश खान, नईम अंसारी, फतेह मोहम्मद, सरवर शेख, रमजान, बरकत अली, किरोड़ी, फारूक अली व अलताफ सहित मुस्लिम समुदाय के लोग उपस्थित रहे।
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ईद की मुख्य नमाज महेंद्रगढ़ मस्जिद के इमाम मौलवी मुबारक हुसैन ने करवाई। उन्होंने कहा कि धैर्य और सौहार्द का नाम ही ईद है। पवित्र रमजान माह में पूरे धैर्य के साथ धार्मिक नियमों का पालन करते हुए प्रतिदिन रोजा रखना धैर्य ही है। इस त्याग और बलिदान के पश्चात ही महीने के प्रथम दिन ईदगाह में नमाज अदा कर ईद की खुशियां मनाते रहे हैं। हमें एक-दूसरे को दर्द को समझना चाहिए। अल्लाह से सबके के लिए दुआ करनी चाहिए। ऐसा कोई काम न करें, जिससे किसी की भावनाएं आहत हों।
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नमाज से पहले मौलानाओं ने मुसलमानों को बुराइयों से बचने और अच्छाई के रास्ते पर चलने की सीख दी। दुनिया और देश में अमन-शांति बरकरार रहनी चाहिए। ईद उल फितर अमन और शांति का प्रतीक है। जिले में दशकों से हिंदू-मुस्लिम एकता बरकरार रही है, यही इस इलाके की सबसे बड़ी पहचान है। भविष्य में भी अमन व शांति बरकरार रहे, इसकी हर संभव कोशिश करनी चाहिए। इस मौके पर मंगतु खान, दिन मोहम्मद, हाजी रफीक, यासीन मोहम्मद, रहीश खान, नईम अंसारी, फतेह मोहम्मद, सरवर शेख, रमजान, बरकत अली, किरोड़ी, फारूक अली व अलताफ सहित मुस्लिम समुदाय के लोग उपस्थित रहे।
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