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पार्थिव शिव पूजा से रोगों से मिलती है मुक्ति : श्याम सुंदर कौशिक
Mon, 04 Aug 2025 12:28 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Mon, 04 Aug 2025 12:28 AM IST
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फोटो संख्या:64- गांव पाथेडा में आयोजित शिव महापुराण कथा में श्रद्धालुओं को कथा सुनाते कथाव्या
- फोटो : बाढ़ से पानी से बाहर निकलते लोग।
कनीना। श्री शिव सती मंदिर पाथेड़ा में चल रही श्री शिव महापुराण कथा के तृतीय दिवस पर 500 पार्थिव शिवलिंग की पूजा की गई।
रविवार को पूजन में आए हुए आचार्य श्याम सुंदर कौशिक ने पूजा के दौरान शिव पूजा का महत्व बताया कि पार्थिव शिवलिंग के पूजन से भय और रोगों से मुक्ति मिलती है। कथा व्यास मोहित दास कौशिक ने बताया कि कथा से शिव तत्व की प्राप्ति संभव है। शिव कथा प्राणी मात्र ही नहीं सबका कल्याण करती है।
कथा ने नारद के मोह का एवं भगवान द्वारा नारद के अभिमान को तोड़ा गया। नारद को ये अभिमान हुआ कि मैंने काम को जीत लिया है और अब मेरे जैसा कोई नहीं है। इस बात को लेकर भगवान शिव से भी ईर्ष्या की जिसके कारण भगवान विष्णु ने उनका अभिमान बंदर का मुख बनाकर तोड़ा।
विश्वमोहिनी से विवाह की चाह रखने वाले नारद की और विश्वमोहिनी ने देखा भी नहीं। इस पर क्रोधित होकर नारद ने शिवगणों को श्राप दिया और भगवान विष्णु को भी श्राप देते हुए कहा कि तुम भी नारी के विरह में घूमोगे। उसके उपरांत सृष्टि का प्रारंभ कैसे हुआ ब्रह्माजी के द्वारा अनेक पुत्रों को जन्म दिया। सबसे पहले चार संतो के रूप संतकुमारो का जन्म हुआ। लेकिन उन्होंने सृष्टि विस्तार में सहयोग नहीं किया। उसके उपरांत काफी दिनों के बाद मनु शतरूपा का जन्म हुआ जिनसे सृष्टि प्रारंभ हुई। इस अवसर पर मंदिर कमेटी के सदस्य राजकुमार, सत्यप्रकाश फौजी, गजेंद्र सिंह, हरेंद्र सिंह, संजय फौजी, रोहताश सिंह, उदयभान, सरपंच दलीप सिंह सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
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रविवार को पूजन में आए हुए आचार्य श्याम सुंदर कौशिक ने पूजा के दौरान शिव पूजा का महत्व बताया कि पार्थिव शिवलिंग के पूजन से भय और रोगों से मुक्ति मिलती है। कथा व्यास मोहित दास कौशिक ने बताया कि कथा से शिव तत्व की प्राप्ति संभव है। शिव कथा प्राणी मात्र ही नहीं सबका कल्याण करती है।
कथा ने नारद के मोह का एवं भगवान द्वारा नारद के अभिमान को तोड़ा गया। नारद को ये अभिमान हुआ कि मैंने काम को जीत लिया है और अब मेरे जैसा कोई नहीं है। इस बात को लेकर भगवान शिव से भी ईर्ष्या की जिसके कारण भगवान विष्णु ने उनका अभिमान बंदर का मुख बनाकर तोड़ा।
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विश्वमोहिनी से विवाह की चाह रखने वाले नारद की और विश्वमोहिनी ने देखा भी नहीं। इस पर क्रोधित होकर नारद ने शिवगणों को श्राप दिया और भगवान विष्णु को भी श्राप देते हुए कहा कि तुम भी नारी के विरह में घूमोगे। उसके उपरांत सृष्टि का प्रारंभ कैसे हुआ ब्रह्माजी के द्वारा अनेक पुत्रों को जन्म दिया। सबसे पहले चार संतो के रूप संतकुमारो का जन्म हुआ। लेकिन उन्होंने सृष्टि विस्तार में सहयोग नहीं किया। उसके उपरांत काफी दिनों के बाद मनु शतरूपा का जन्म हुआ जिनसे सृष्टि प्रारंभ हुई। इस अवसर पर मंदिर कमेटी के सदस्य राजकुमार, सत्यप्रकाश फौजी, गजेंद्र सिंह, हरेंद्र सिंह, संजय फौजी, रोहताश सिंह, उदयभान, सरपंच दलीप सिंह सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
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