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प्रॉपटी आईडी में खामियों के चलते शहरवासियों को होना पड़ रहा परेशान

Sun, 30 Jan 2022 11:15 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 30 Jan 2022 11:15 PM IST
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Due to the flaws in the property ID, the residents of the city are suffering
पत्रकारों को जानकारी देते एडवोकेट किशन चौधरी व अन्य। संवाद - फोटो : Narnol
शहर में प्रॉपर्र्टी आईडी का सर्वे करने वाली कंपनी के एजेंट स्थानीय तौर पर अनभिज्ञ व नौसीखिए हैं। इन्हें यहां की भौगोलिक स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इस वजह से शहरवासियों को प्रॉपर्र्टी आईडी की खामियों को लेकर परेशान होना पड़ रहा है। यह बात पूर्व नगर परिषद चेयरमैन एडवोकेट किशन चौधरी ने रविवार को निजामपुर रोड पर आयोजित पत्रकार वार्ता में कही।
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उन्होंने कहा कि प्रॉपर्र्टी आईडी की खामियों के चलते हर नागरिक परेशान है। जबकि इसे ठीक करवाने की प्रक्रिया भी काफी कठिन है। चौधरी ने कहा कि नारनौल शहर काफी पुराना है। यहां दो-तीन सौ वर्ष पुरानी हवेलियां हैं। उस समय इनका एक मुख्य मालिक होता था। अब उस मुख्य मालिक के पांच पुत्र हो गए तो पीढ़ी दर पीढ़ी उन पांच पुत्र के भी पांच पुत्र हो गए। इस समय हवेली में कई लोग रहते हैं। ऐसे में उपयुक्त मालिकाना हक के नोटिस कंपनी द्वारा सही से उस हवेली में जितने व्यक्ति रहते हैं सभी अलग-अलग नोटिस देना चाहिए, जबकि कंपनी द्वारा गलत नोटिस बिना नाम के किसी भी मकान पर चस्पाए जा रहे हैं। उक्त पुरानी हवेलियों की रजिस्ट्री या दस्तावेज मुश्किल से किसी के पास उपलब्ध होंगे। क्योंकि पहले हरियाणा में पेप्सू सरकार थी। फिर हरियाणा सरकार का गठन हुआ। उस समय अलग-अलग व्यवस्थाएं भूमि अधिनियम की रही है। ऐसे में नए या पुराने कब्जाधारियों के गलत नाम से नोटिस देने की मुख्य परेशानी सामने उभर कर आई है।
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उन्होंने सरकार से मांग की कंपनी को यह हिदायत दी जाए कि प्रत्येक वार्ड में जाकर और अनुभवी एजेंटों के माध्यम से मकानों की पैमाइश करवाने के बाद नोटिस में सही मालिक का नाम दर्ज किया जाए, ताकि शहरवासी अपनी प्रापर्टी आईडी सही तरीके से बनवा सकें। इस व्यवस्था से लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
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निवर्तमान पार्षद अधिवक्ता केशव संघी ने बताया कि कंपनी के सर्वे के 95 प्रतिशत नोटिस गलत हैं। किसी में मालिक का नाम, किसी में वल्दियत गलत हैं तो किसी में मोहल्ले, वार्ड या लोकेशन गलत है। इसलिए यह व्यवस्था मैन्युअल होनी चाहिए। पूर्व पार्षद नरसिंह दायमा ने कहा कि वह जिस घर में रहते हैं उसका हाउस टैक्स आदि सभी उन्होंने जमा करवा रखे हैं। जिसकी रसीदें भी उनके पास हैं। लेकिन अब उनके पास 3 लाख से भी अधिक का हाउस टैक्स जोड़ कर भेज दिया गया है, जोकि सही नहीं है। अधिवक्ता नितिन चौधरी ने बताया कि वे इस मामले में जल्द नगर निकाय मंत्री कमल गुप्ता से मिलकर स्थिति से अवगत करवाएंगे। उसके बाद मुख्यमंत्री से मिलेंगे। अगर इसके बाद भी कोई समाधान नहीं हुआ तो वे उच्च न्यायालय में एक याचिका लगाएंगे। इस मौके पर अधिवक्ता पंकज किरोड़ीवाल भी मौजूद रहे। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री, शहरी निकाय मंत्री, मुख्य सचिव हरियाणा सरकार व उपायुक्त को ऑनलाइन ज्ञापन भेजकर उक्त मामले में संज्ञान लेकर कार्रवाई करने की गुहार लगाई।
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