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Mahendragarh-Narnaul News: डॉ. कृष्णा कुमारी ने इंडोनेशिया में पर दिखाया हरियाणवी लोकगीतों का जलवा
Sun, 14 Sep 2025 11:47 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sun, 14 Sep 2025 11:47 PM IST
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फोटो 26इंडोनेशिया में हिंदी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मौजूद अतिथि।स्रोत स्वयं
नारनौल। अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के सौजन्य से इंडोनेशिया के बाली स्थित भारतीय उच्चायोग में अंतरराष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाया गया। इसमें भारत और बाली के साथ विभिन्न देशों से आये साहित्यकारों व लोक कलाकारों ने भाग लिया।
उन्होंने अपने उत्कृष्ट साहित्यिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हिंदी का वैश्विक पटल पर गुणगान किया। इस हिंदी दिवस कार्यक्रम में नवीन मेघवाल निदेशक विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र अध्यक्ष एवं मुख्य अतिथि के रूप में काउंसलेट जनरल डॉ. शशांक विक्रम उपस्थित रहे। वहीं पद्मश्री इंद्रा आगुस उड्डीयान एवं पद्मश्री आई वायन डिबिया बतौर विशिष्ट अतिथि रहे।
कार्यक्रम में हरियाणवी लोकगायिका डॉ. कृष्णा कुमारी आर्या ने हरियाणवी लोक विधा रागनी या म्हारी हिंदी भाषा है दिन दिन इसकी शान बढ़े म्हारी या अभिलाषा है व हिंदी का परचम तो हमको फहराना है हमें हिंदी भाषा को सिरमौर बनाना है आदि लोकगीतों के माध्यम से हिंदी की महिमा का गुणगान किया।
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हरियाणवी भाषा की साहित्यकार डॉ. कृष्णा आर्या ने बताया कि लोक भाषाओं व बोलियों में रचित लोक साहित्य ने हिंदी को समृद्ध किया है। हरियाणवी की जिसमें अलग ही पहचान है। हरियाणवी की पहचान विदेशी पटलों पर रागनी व लोकगीतों के माध्यम से बेखटके, धमाकेदार शैली में कर रही हैं, जो लोगों को झूमने व तालियां बजाने के लिए मजबूर कर देती है।
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उन्होंने अपने उत्कृष्ट साहित्यिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हिंदी का वैश्विक पटल पर गुणगान किया। इस हिंदी दिवस कार्यक्रम में नवीन मेघवाल निदेशक विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र अध्यक्ष एवं मुख्य अतिथि के रूप में काउंसलेट जनरल डॉ. शशांक विक्रम उपस्थित रहे। वहीं पद्मश्री इंद्रा आगुस उड्डीयान एवं पद्मश्री आई वायन डिबिया बतौर विशिष्ट अतिथि रहे।
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कार्यक्रम में हरियाणवी लोकगायिका डॉ. कृष्णा कुमारी आर्या ने हरियाणवी लोक विधा रागनी या म्हारी हिंदी भाषा है दिन दिन इसकी शान बढ़े म्हारी या अभिलाषा है व हिंदी का परचम तो हमको फहराना है हमें हिंदी भाषा को सिरमौर बनाना है आदि लोकगीतों के माध्यम से हिंदी की महिमा का गुणगान किया।
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हरियाणवी भाषा की साहित्यकार डॉ. कृष्णा आर्या ने बताया कि लोक भाषाओं व बोलियों में रचित लोक साहित्य ने हिंदी को समृद्ध किया है। हरियाणवी की जिसमें अलग ही पहचान है। हरियाणवी की पहचान विदेशी पटलों पर रागनी व लोकगीतों के माध्यम से बेखटके, धमाकेदार शैली में कर रही हैं, जो लोगों को झूमने व तालियां बजाने के लिए मजबूर कर देती है।