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Mahendragarh-Narnaul News: भिक्षावृत्ति के कानूनी, राजनीतिक व नीतिगत पहलुओं पर किया मंथन

Wed, 01 Apr 2026 11:09 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Wed, 01 Apr 2026 11:09 PM IST
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Discussion on legal, political and policy aspects of begging
फोटो संख्या:53- कार्यक्रम के समापन सत्र में कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार के साथ अतिथिगण व शिक्षक
महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन बुधवार को हुआ। इस दौरान भिक्षावृत्ति के कानूनी, राजनीतिक एवं नीतिगत पहलुओं पर मंचन किया गया।
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उद्घाटन सत्र में रेलवे सुरक्षा बल के महानिरीक्षक डॉ. अच्युतानंद झा मुख्य अतिथि व विद्या भारती हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष देव प्रसाद भारद्वाज विशिष्ट अतिथि रहे। कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने कहा कि तकनीकी प्रगति के साथ भिक्षावृत्ति से जुड़े संगठित नेटवर्क विस्तृत हुए हैं।
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उन्होंने कहा कि भिक्षावृत्ति दूर करने के लिए केवल नीतिगत हस्तक्षेप पर्याप्त नहीं हैं बल्कि सामुदायिक भागीदारी, जनजागरूकता एवं मूल्य-आधारित शिक्षा को सुदृढ़ करना आवश्यक है।
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वर्ष 2018 में न्यायालयीय हस्तक्षेप के बाद भिक्षावृत्ति के अपराधमुक्त होने के संदर्भ में पुनर्वास आधारित दृष्टिकोण की बढ़ती आवश्यकता को रेखांकित किया गया।
मुख्य अतिथि डॉ. अच्युतानंद झा ने कहा कि भिक्षावृत्ति अब पारंपरिक सामाजिक-धार्मिक प्रथा से आगे बढ़कर एक संगठित एवं संस्थागत अपराध का रूप ले चुकी है। उन्होंने भिक्षावृत्ति मुक्त भारत कार्यक्रम 2022 का उल्लेख करते हुए बताया कि पुनर्वास केंद्रों की स्थापना हेतु 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इसका उद्देश्य कौशल विकास एवं सामाजिक पुनर्समावेशन को बढ़ावा देना है। संगठित भिक्षावृत्ति एवं इससे जुड़े अपराधों, विशेषकर बाल तस्करी से निपटने में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया।
देव प्रसाद भारद्वाज ने भिक्षावृत्ति के सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयामों पर विचार रखते हुए समाज में आत्मनिर्भरता, नैतिक उत्तरदायित्व एवं सामुदायिक मूल्यों के पुनर्स्थापन की आवश्यकता पर बल दिया।
पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय के सहायक आचार्य डॉ. विनोद आर्य ने भिक्षावृत्ति को केवल व्यक्तिगत नैतिक विफलता के रूप में देखने के बजाय इसे संरचनात्मक असमानता, वंचना, सामाजिक बहिष्करण का परिणाम बताया।
हकेंवि में विधि पीठ के अधिष्ठाता प्रो. प्रदीप सिंह ने भिक्षावृत्ति कानून संवैधानिक एवं विधिक परिप्रेक्ष्य भिक्षावृत्ति विरोधी कानूनों की ऐतिहासिक एवं औपनिवेशिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला।

एनआईएसडी की वरिष्ठ परामर्शदाता श्वेता सहगल का ऑनलाइन सत्र आयोजित किया गया। जीविका से गरिमा तक स्माइल योजना एवं भारत में भिक्षावृत्ति उन्मूलन पहल विषय पर व्याख्यान देते हुए सरकार द्वारा चलाए जा रहे पुनर्वास, कौशल विकास एवं सामाजिक पुनर्समावेशन से संबंधित प्रयासों की जानकारी दी।
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