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Mahendragarh-Narnaul News: मोटर मैकेनिक के बेटे दीपांशु ने 99.6 अंक हासिल कर प्रदेश में दूसरा स्थान पाया
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फोटो नंबर- 24प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त करने पर दीपांशु को मिठाई खिलाते परिजन। स्रोत - प
नांगल चौधरी। सीमित संसाधनों के बीच मेहनत व अनुशासन के दम पर वार्ड-4 निवासी दीपांशु ने हरियाणा बोर्ड 10वीं में 99.6 अंक प्राप्त कर प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल किया है। इससे परिवार, गांव और स्कूल में खुशी का माहौल है। स्कूल में छात्र का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया जबकि परिजनों ने मिठाई बांटकर खुशी जाहिर की।
दीपांशु भुगांरका के बालाजी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के छात्र हैं। उनके पिता धर्मपाल मोटर मैकेनिक हैं और माता बीना देवी गृहिणी हैं। साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले दीपांशु ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और नियमित अध्ययन को दिया।
दीपांशु की बहन ने बताया कि वह रोजाना टाइम-टेबल बनाकर पढ़ाई करता था और कठिन विषयों पर विशेष ध्यान देते थे। पढ़ाई के दौरान मोबाइल का उपयोग केवल शैक्षणिक कार्यों के लिए किया और टीवी व अन्य मनोरंजन से दूरी बनाए रखी।
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दीपांशु ने बताया कि बचपन में वह पिता के साथ मोटर मरम्मत का काम सीखना चाहते थे। इस पर पिता ने उन्हें समझाया कि यदि मशीनों को बेहतर ढंग से समझना है तो इंजीनियर बनो। पिता की यही बात उनके जीवन की प्रेरणा बन गई। अब दीपांशु का लक्ष्य इंजीनियर बनकर माता-पिता के सपनों को साकार करना है।
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दीपांशु भुगांरका के बालाजी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के छात्र हैं। उनके पिता धर्मपाल मोटर मैकेनिक हैं और माता बीना देवी गृहिणी हैं। साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले दीपांशु ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और नियमित अध्ययन को दिया।
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दीपांशु की बहन ने बताया कि वह रोजाना टाइम-टेबल बनाकर पढ़ाई करता था और कठिन विषयों पर विशेष ध्यान देते थे। पढ़ाई के दौरान मोबाइल का उपयोग केवल शैक्षणिक कार्यों के लिए किया और टीवी व अन्य मनोरंजन से दूरी बनाए रखी।
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दीपांशु ने बताया कि बचपन में वह पिता के साथ मोटर मरम्मत का काम सीखना चाहते थे। इस पर पिता ने उन्हें समझाया कि यदि मशीनों को बेहतर ढंग से समझना है तो इंजीनियर बनो। पिता की यही बात उनके जीवन की प्रेरणा बन गई। अब दीपांशु का लक्ष्य इंजीनियर बनकर माता-पिता के सपनों को साकार करना है।