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नहरी पानी के लिए सीएम से मिले तीन विधायक
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 12 Feb 2017 12:00 AM IST
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क्षेत्र में व्याप्त नहरी पानी की कमी के चलते शनिवार को नांगल चौधरी के विधायक डा. अभय सिंह यादव की अगुवाई में रेवाड़ी के विधायक रणधीर सिंह कापड़ीवास एवं नारनौल के विधायक ओमप्रकाश यादव ने मुख्यमंत्री से मिलकर क्षेत्र में नहरी पानी का हिस्सा बढ़ाने के लिए एक पत्र सौंपा।
तीनों विधायकों ने मुख्यमंत्री को अवगत करवाया कि जब उठान सिंचाई प्रणाली का निर्माण 1970 के दशक में किया गया तो इस रेतीले एवं सूखे क्षेत्र को पर्याप्त पानी देने के लिए 4.5 क्यूसिक प्रति एक हजार एकड़ के आधार पर नहर का निर्माण किया गया था। इसके बाद जब नहर में पानी देना प्रारंभ किया तो उक्त नहर के लिए पानी का हिस्सा रबी की फसल के लिए 3.5 क्यूसिक प्रति एक हजार एकड़ की दर से निश्चित किया गया था। यद्यपि शेष पश्चिमी यमुना नहर के लिए पानी की मात्रा 2.40 क्यूसिक प्रति एक हजार एकड़ थी लेकिन उठान सिंचाई प्रणाली वाले क्षेत्रों के लिए यह अधिक इसलिए रखी गई थी क्योंकि रेतीला एवं सूखा क्षेत्र होने के कारण पानी का अधिक पाया गया। जिस कारण खेत में पहुंचने से पहले रास्ते में काफी मात्रा में पानी कम हो जाता है। इस कमी को देखते हुए एवं वास्तविक स्थिति को आंकलन करने के बाद दक्षिणी हरियाणा क्षेत्र को 1.1 क्यूसिक प्रति एक हजार एकड़ की दर से अतिरिक्त लाभ देते हुए पानी की मात्रा 2.4 क्यूसिक की जगह 3.5 क्यूसिक प्रति एक हजार एकड़ निर्धारित की गई थी। परंतु वर्ष 1994 इस मात्रा को घटाकर शेष पश्चिमी नहर प्रणाली के बराबर करते हुए 2.4 क्यूसिक प्रति एक हजार एकड़ कर दिया गया।
इसके बाद क्षेत्र में लगातार पानी की कमी को देखते हुए वर्ष 2008 में पुन: पानी की मात्रा बताते हुए 3.5 क्यूसिक प्रति एक हजार एकड़ निर्धारित करने का फैसला किया गया। इस संदर्भ में सिंचाई विभाग द्वारा पत्र क्रमांक 8/14.2008.21डब्लू 16 जून 2008 जारी भी किया गया था, परंतु उक्त निर्णय को कभी लागू नहीं किया गया। इसी निर्णय को लागू करवाने के लिए डॉ. अभय सिंह यादव द्वारा लिखे गए पत्र की प्रति तीनों विधायकों के हस्ताक्षर के साथ मुख्यमंत्री को सौंपा गया है। डा. यादव ने बताया कि दक्षिणी हरियाणा क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से वर्षा की भारी कमी, भूमिगत जल का समाप्त होना, पीने के पानी के लिए पूर्णरूप से नहरी पानी पर निर्भर होना आदि कुछ ऐसे कारण है। जिसकी वजह से नहरी पानी की वर्तमान स्थिति न केवल असंतोषजनक है बल्कि क्षेत्र के अस्तित्व के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। मुख्यमंत्री हरियाणा ने इस विषय पर गंभीरता से कार्यवाही करने का आश्वासन दिया है।
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तीनों विधायकों ने मुख्यमंत्री को अवगत करवाया कि जब उठान सिंचाई प्रणाली का निर्माण 1970 के दशक में किया गया तो इस रेतीले एवं सूखे क्षेत्र को पर्याप्त पानी देने के लिए 4.5 क्यूसिक प्रति एक हजार एकड़ के आधार पर नहर का निर्माण किया गया था। इसके बाद जब नहर में पानी देना प्रारंभ किया तो उक्त नहर के लिए पानी का हिस्सा रबी की फसल के लिए 3.5 क्यूसिक प्रति एक हजार एकड़ की दर से निश्चित किया गया था। यद्यपि शेष पश्चिमी यमुना नहर के लिए पानी की मात्रा 2.40 क्यूसिक प्रति एक हजार एकड़ थी लेकिन उठान सिंचाई प्रणाली वाले क्षेत्रों के लिए यह अधिक इसलिए रखी गई थी क्योंकि रेतीला एवं सूखा क्षेत्र होने के कारण पानी का अधिक पाया गया। जिस कारण खेत में पहुंचने से पहले रास्ते में काफी मात्रा में पानी कम हो जाता है। इस कमी को देखते हुए एवं वास्तविक स्थिति को आंकलन करने के बाद दक्षिणी हरियाणा क्षेत्र को 1.1 क्यूसिक प्रति एक हजार एकड़ की दर से अतिरिक्त लाभ देते हुए पानी की मात्रा 2.4 क्यूसिक की जगह 3.5 क्यूसिक प्रति एक हजार एकड़ निर्धारित की गई थी। परंतु वर्ष 1994 इस मात्रा को घटाकर शेष पश्चिमी नहर प्रणाली के बराबर करते हुए 2.4 क्यूसिक प्रति एक हजार एकड़ कर दिया गया।
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इसके बाद क्षेत्र में लगातार पानी की कमी को देखते हुए वर्ष 2008 में पुन: पानी की मात्रा बताते हुए 3.5 क्यूसिक प्रति एक हजार एकड़ निर्धारित करने का फैसला किया गया। इस संदर्भ में सिंचाई विभाग द्वारा पत्र क्रमांक 8/14.2008.21डब्लू 16 जून 2008 जारी भी किया गया था, परंतु उक्त निर्णय को कभी लागू नहीं किया गया। इसी निर्णय को लागू करवाने के लिए डॉ. अभय सिंह यादव द्वारा लिखे गए पत्र की प्रति तीनों विधायकों के हस्ताक्षर के साथ मुख्यमंत्री को सौंपा गया है। डा. यादव ने बताया कि दक्षिणी हरियाणा क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से वर्षा की भारी कमी, भूमिगत जल का समाप्त होना, पीने के पानी के लिए पूर्णरूप से नहरी पानी पर निर्भर होना आदि कुछ ऐसे कारण है। जिसकी वजह से नहरी पानी की वर्तमान स्थिति न केवल असंतोषजनक है बल्कि क्षेत्र के अस्तित्व के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। मुख्यमंत्री हरियाणा ने इस विषय पर गंभीरता से कार्यवाही करने का आश्वासन दिया है।
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