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क्रशरों की डस्ट से फसल प्रभावित, ग्रामीणों ने रोका रास्ता
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 04 Jan 2017 11:26 PM IST
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जेसीबी
- फोटो : अमर उजाला
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जैनपुर क्रशर जोन में उड़ती डस्ट से ग्रामीणों की सैकड़ों एकड़ फसल प्रभावित हो रही है। स्थिति से अवगत करवाने के बावजूद संचालक पानी का छिड़काव नहीं करवा रहे जिससे आक्रोशित ग्रामीणों ने गड्ढा खुदवाकर क्रशर जोन का रास्ता बंद कर दिया। मौके पर पहुंचे थाना प्रभारी शफीउद्दीन शिकायत की जांच करने में जुटे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि विभाग द्वारा क्रशर संचालन के मापदंड निर्धारित किए गए हैं। जिनके अनुसार संचालकों को पत्थरों की क्रशरिंग करनी होगी लेकिन अधिकांश क्रेशर निर्धारित मापदंडों पर खरे नहीं उतर रहे है। क्रशर संचालक द्वारा भी पौधारोपण नहीं करवाया गया जिससे गांव का वातावरण प्रभावित हो गया। डस्ट उड़ने के कारण सालाना करीब 150 एकड़ फसल नष्ट हो जाती है। इतना ही नहीं डस्ट उड़कर गांव तक पहुंचनी शुरूहो गई। प्रदूषित वातावरण में ग्रामीणों को दमा, नेत्र, एलर्जी, टीबी आदि बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। परेशान ग्रामीणों द्वारा संचालकों से पानी छिड़काव की गुहार लगाई गई। किंतु उन्होंने सकारात्मक जवाब नहीं दिया और क्रशरिंग प्रक्रिया जारी रख रहे हैं। जिससे आक्रोशित ग्रामीणों ने बुधवार सुबह बैठक की। जिसमें क्रेशर जोन का रास्ता बंद करने का निर्णय लिया गया। करीब 2.30 बजे सरपंच राजेश कुमार की अगुवाई में जेसीबी द्वारा रास्ते में गड्ढा खुदवा दिया गया। इसके बाद जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारियों को अनियमिताओं की पूरी जानकारी है। किंतु आपसी मिलीभगत के चलते कार्रवाई नहीं कर रहे। जिससे ग्रामीणों की आजिविका व स्वास्थ्य नुकसान हो रहा है।
चल रहे ओवरलोड डंपर
ग्रामीणों ने कहा कि क्रेशरों पर रोजाना सैकड़ों डंपर पत्थर सप्लाई करते हैं। अधिक मुनाफा कमाने के लालच में डंपर संचालक निर्धारित क्षमता से अधिक पत्थर भरते हैं। जिससे गांव की सड़क टूटने के अलावा सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ रही हैं।
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ओवरलोड वाहनों पर पूरा अंकुश
थाना प्रभारी शफीउद्दीन ने बताया कि ओवरलोड वाहनों की रोकथाम को लेकर पुलिस सक्रिय है। रातभर चेकिंग अभियान चलाकर चालान किया जा रहा है। जैनपुर क्रशर जोन का रास्ता बंद करने की शिकायत मिल चुकी। जांच के बाद संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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ग्रामीणों ने बताया कि विभाग द्वारा क्रशर संचालन के मापदंड निर्धारित किए गए हैं। जिनके अनुसार संचालकों को पत्थरों की क्रशरिंग करनी होगी लेकिन अधिकांश क्रेशर निर्धारित मापदंडों पर खरे नहीं उतर रहे है। क्रशर संचालक द्वारा भी पौधारोपण नहीं करवाया गया जिससे गांव का वातावरण प्रभावित हो गया। डस्ट उड़ने के कारण सालाना करीब 150 एकड़ फसल नष्ट हो जाती है। इतना ही नहीं डस्ट उड़कर गांव तक पहुंचनी शुरूहो गई। प्रदूषित वातावरण में ग्रामीणों को दमा, नेत्र, एलर्जी, टीबी आदि बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। परेशान ग्रामीणों द्वारा संचालकों से पानी छिड़काव की गुहार लगाई गई। किंतु उन्होंने सकारात्मक जवाब नहीं दिया और क्रशरिंग प्रक्रिया जारी रख रहे हैं। जिससे आक्रोशित ग्रामीणों ने बुधवार सुबह बैठक की। जिसमें क्रेशर जोन का रास्ता बंद करने का निर्णय लिया गया। करीब 2.30 बजे सरपंच राजेश कुमार की अगुवाई में जेसीबी द्वारा रास्ते में गड्ढा खुदवा दिया गया। इसके बाद जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारियों को अनियमिताओं की पूरी जानकारी है। किंतु आपसी मिलीभगत के चलते कार्रवाई नहीं कर रहे। जिससे ग्रामीणों की आजिविका व स्वास्थ्य नुकसान हो रहा है।
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चल रहे ओवरलोड डंपर
ग्रामीणों ने कहा कि क्रेशरों पर रोजाना सैकड़ों डंपर पत्थर सप्लाई करते हैं। अधिक मुनाफा कमाने के लालच में डंपर संचालक निर्धारित क्षमता से अधिक पत्थर भरते हैं। जिससे गांव की सड़क टूटने के अलावा सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ रही हैं।
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ओवरलोड वाहनों पर पूरा अंकुश
थाना प्रभारी शफीउद्दीन ने बताया कि ओवरलोड वाहनों की रोकथाम को लेकर पुलिस सक्रिय है। रातभर चेकिंग अभियान चलाकर चालान किया जा रहा है। जैनपुर क्रशर जोन का रास्ता बंद करने की शिकायत मिल चुकी। जांच के बाद संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी।