{"_id":"61b4e67e8d0af574bb4ee10c","slug":"crores-of-machines-started-rusting-in-the-old-building-of-iti-narnol-news-rtk6324526133","type":"story","status":"publish","title_hn":"आईटीआई के पुराने भवन में करोड़ों की मशीनों को लगने लगी जंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आईटीआई के पुराने भवन में करोड़ों की मशीनों को लगने लगी जंग
विज्ञापन
आईटीआई के नए भवन के रूम में रखी मशीनें और पढ़ाई करते विद्यार्थी। संवाद
- फोटो : Narnol
शहर के पुराने आईटीआई भवन की वर्कशॉप में करोड़ों रुपये की मशीनें जंग खा रही हैं। इन मशीनों को रखने के लिए आईटीआई के पास जगह नहीं है। एससी एवं एसपी के लिए बनाया गया आईटीआई के भवन में ही दो आईटीआई चल रही हैं। जर्जर भवन को लोक निर्माण विभाग ने लगभग दो वर्ष पहले कंडम घोषित कर दिया था। आईटीआई ने प्रशिक्षुओं को वहां जाने पर पाबंदी लगाई हुई है। प्रशिक्षुओं की 13 दिसंबर से वार्षिक परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। 14 दिसंबर से प्रैक्टिकल शुरू होंगी। नए भवन में आई चार-पांच मशीनों पर ही प्रशिक्षुओं को प्रैक्टिस करवाई जा रही है। एक मशीन पर पांच-पांच प्रशिक्षुओं को सीखना पड़ रहा है। ऐसे में उनको प्रैक्टिस में काफी दिक्कतें आ रही हैं।
बता दें कि आईटीआई का पुराना भवन काफी 1963 में बना था। लेकिन अब यह भवन एवं वर्कशॉप जर्जर हो चुका है। लोक निर्माण विभाग ने इसको कंडम घोषित कर दिया है। आईटीआई परिसर में एससी एवं एसपी प्रशिक्षुओं के लिए करोड़ों रुपये से नए भवन का निर्माण किया गया था। अब उसी भवन में एससी एवं एसपी आईटीआई तथा पुरानी आईटीआई चलाई जा रही है। पुरानी आईटीआई के अंदर लगभग 20 ट्रेड हैं। 850 प्रशिक्षण ले रहे है, जबकि एससी आईटीआई के अंदर 4 ट्रेडों के 150 प्रशिक्षु हैं।
31 से अधिक मशीनें हो रहीं खराब
आईटीआई के पुराने वर्कशॉप का भवन जर्जर हो चुका है। वहां जाना खतरे से खाली नहीं है, इसलिए आईटीआई प्रशासक ने वहां पर जाने की पाबंदी लगा दी है। इस वर्कशॉप के अंदर लगभग 31 नई मशीनें रखी हैं। इनमें मशीनिस्ट ट्रेड की 15, टर्नर की 13 तथा फिटर की चार-पांच मशीनें रखी हुई हैं। इन मशीनों की कीमत करोड़ों रुपये है।
विज्ञापन
नए भवन में मात्र एक वर्कशॉप
एससी एवं एसपी आईटीआई भवन में मात्र एक वर्कशॉप है। इस वर्कशॉप के अंदर चार हिस्से किए गए हैं। जिसमें वेल्डर, मशीनिस्ट, ट्रैक्टर, टर्नर ट्रेड की वर्कशॉप बनी हुई है। वर्कशॉप में पर्याप्त जगह नहीं होने पर कक्षाओं के अंदर ही मशीन लगा दी गई है। एक कक्षा के अंदर चार-पांच मशीनें ही लग पाई हैं। जबकि प्रशिक्षुओं को कक्षा भी वहीं लेनी पड़ रही है। नए भवन में प्रशिक्षुओं के लिए 30 कमरे हैं, जबकि इस समय लगभग 70 कमरों की आवश्यकता है।
नए भवन की जरूरत
पुरानी आईटीआई का स्वयं का भवन नहीं होने की वजह से सुचारु रूप से नहीं चल पा रही है। इस वजह से प्रशिक्षुओं को ठीक प्रकार से सुविधा नहीं मिल पा रही। जगह के अभाव में प्रशिक्षुओं की न तो ठीक से पढ़ाई हो पाती है और न ही मशीनों पर प्रैक्टिस हो पाती है। केवल पढ़ाई के नाम पर एक खानापूर्ति हो रही है। ऐसे में पुरानी आईटीआई को एक नए भवन की दरकार हैै।
पुराने भवन को कंडम घोषित किया जा चुका है, इसलिए वहां पर जाने पर पाबंदी लगाई गई है। नए भवन के लिए सरकार को प्रपोजल बनाकर भेजा हुआ है। -रविंद्र कुमार, कार्यकारी प्राचार्य, आईटीआई, महेंद्रगढ़।
विज्ञापन
बता दें कि आईटीआई का पुराना भवन काफी 1963 में बना था। लेकिन अब यह भवन एवं वर्कशॉप जर्जर हो चुका है। लोक निर्माण विभाग ने इसको कंडम घोषित कर दिया है। आईटीआई परिसर में एससी एवं एसपी प्रशिक्षुओं के लिए करोड़ों रुपये से नए भवन का निर्माण किया गया था। अब उसी भवन में एससी एवं एसपी आईटीआई तथा पुरानी आईटीआई चलाई जा रही है। पुरानी आईटीआई के अंदर लगभग 20 ट्रेड हैं। 850 प्रशिक्षण ले रहे है, जबकि एससी आईटीआई के अंदर 4 ट्रेडों के 150 प्रशिक्षु हैं।
विज्ञापन
31 से अधिक मशीनें हो रहीं खराब
आईटीआई के पुराने वर्कशॉप का भवन जर्जर हो चुका है। वहां जाना खतरे से खाली नहीं है, इसलिए आईटीआई प्रशासक ने वहां पर जाने की पाबंदी लगा दी है। इस वर्कशॉप के अंदर लगभग 31 नई मशीनें रखी हैं। इनमें मशीनिस्ट ट्रेड की 15, टर्नर की 13 तथा फिटर की चार-पांच मशीनें रखी हुई हैं। इन मशीनों की कीमत करोड़ों रुपये है।
विज्ञापन
नए भवन में मात्र एक वर्कशॉप
एससी एवं एसपी आईटीआई भवन में मात्र एक वर्कशॉप है। इस वर्कशॉप के अंदर चार हिस्से किए गए हैं। जिसमें वेल्डर, मशीनिस्ट, ट्रैक्टर, टर्नर ट्रेड की वर्कशॉप बनी हुई है। वर्कशॉप में पर्याप्त जगह नहीं होने पर कक्षाओं के अंदर ही मशीन लगा दी गई है। एक कक्षा के अंदर चार-पांच मशीनें ही लग पाई हैं। जबकि प्रशिक्षुओं को कक्षा भी वहीं लेनी पड़ रही है। नए भवन में प्रशिक्षुओं के लिए 30 कमरे हैं, जबकि इस समय लगभग 70 कमरों की आवश्यकता है।
नए भवन की जरूरत
पुरानी आईटीआई का स्वयं का भवन नहीं होने की वजह से सुचारु रूप से नहीं चल पा रही है। इस वजह से प्रशिक्षुओं को ठीक प्रकार से सुविधा नहीं मिल पा रही। जगह के अभाव में प्रशिक्षुओं की न तो ठीक से पढ़ाई हो पाती है और न ही मशीनों पर प्रैक्टिस हो पाती है। केवल पढ़ाई के नाम पर एक खानापूर्ति हो रही है। ऐसे में पुरानी आईटीआई को एक नए भवन की दरकार हैै।
पुराने भवन को कंडम घोषित किया जा चुका है, इसलिए वहां पर जाने पर पाबंदी लगाई गई है। नए भवन के लिए सरकार को प्रपोजल बनाकर भेजा हुआ है। -रविंद्र कुमार, कार्यकारी प्राचार्य, आईटीआई, महेंद्रगढ़।

आईटीआई वर्कशॉप में रखीं मशीनें। संवाद- फोटो : Narnol