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दूसरे दिन भी करोड़ों रुपये का मामला और उजागर हुआ
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 09 Nov 2016 12:35 AM IST
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राव तुलाराम चौक के निकट स्थित पटियाला बैंक की स्थानीय सब शाखा में दूसरे दिन भी भी करोड़ों रूपये के गबन का मामला उजागर हुआ है। मंगलवार को लगभग 25 उपभोक्ता अपने खाते चेक करने के लिए आए लेकिन सभी खाते से रुपये गायब हुए थे, जबकि कुछ के खाते तथा एफडी फर्जी बनाई हुई थी। इस संबंध में उपभोक्ता मैनेजर जितेंद्र कुमार से मिले और अपनी शिकायत दी। सोमवार की रात्रि को पुलिस ने बैंक के हेड कैशियर के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार बैंक ने 4.86 करोड़ रुपये का गबन दिखाया है। जिस तरह से उपभोक्ता बैंक में आ रहे हैं उनसे पता चलता है कि यह गबन की राशि 15 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। सभी गबन की राशि लाखों में हैं। बैंक मामले की जांच में गहराई से जुटा हुआ है।
मंगलवार को दूसरे दिन पटियाला बैंक के गबन की खबर प्रकाशित हुई तो उसके बाद लोगों ने अपना खाता चेक करना शुरू कर दिया। मंगलवार को लगभग 25 उपभोक्ता अपने बैंक खाते एवं एफडी चैक करने आए जिनमें से लगभग सभी के खातों से रुपये निकलवाए हुए थे। सभी उपभोक्ताओं के खातों से करोड़ों रुपये की राशि निकाली गई हैं। उपभोक्ता इस बात को लेकर परेशान है कि आखिर उनकी राशि उन्हें किस प्रकार मिलेगी और उन्हें कितना इंतजार करना पड़ेगा। राशि मिलेगी या नहीं ये सभी सवाल उनके जहन में उठ रहें हैं।
बाक्स:
6 साल से कर रहा था गबन
बैंक की सब शाखा 2009 में स्थापित की गई थी। तभी से यह आरोपी कैशियर इस शाखा में ही काम कर रहा था। लोगों के रूपये हड़पने का मामला पिछले 6 वर्षों से चल रहा था मगर यह उजागर बीती 6 अक्तूबर को उस समय हुआ जब एक उपभोक्ता अपने रूपये निकलवाने के लिए इस शाखा में गया। छह वर्षों के दौरान बैंक की आडिटें भी की जा चुकी हैं लेकिन उस ऑडिट में कोई मामला निकलकर नहीं आया गया। उपभोक्ताओं द्वारा यह बताया जा रहा है कि इस मामले में कोई और भी नाम शामिल आ सकते हैं। अभी तक कैशियर राजबीर सिंह का नाम ही चल रहा है।
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एक महीने दबाया बैंक ने मामला
बैंक ने बाजार में अपनी साख खराब होने की वजह से इस मामले की किसी को भनक तक नहीं लगने दी। अब चूंकि मामला कई करोड़ रूपयों तक पहुंच गया तो इसे दाबाए रखना भी मुमकिन नहीं हो सका। 8 अक्तूूबर को बैंक की हायर अथार्टी पर बैंक पहुंची, उसने भी मामले के बारे में जानकारी ली। उसके एक महीने के बाद यानी 3 नवंबर को शाखा प्रबंधक जितेंद्र कुमार ने पुलिस में आरोपी हार्ड कैशियर के खिलाफ शिकायत दी है।
ऐसा किया गया गबन
जिन उपभोक्ताओं के खातों से रूपये गायब है, ऐसे उपभोक्ताओं की एफडी या पास बुक में कम्प्यूटराइज एंट्री न करके स्वहस्त लिखित एंट्री की गई है। जांच करने पर पता चला कि जिन भी उपभोक्ताओं की पास बुक कम्प्यूटराइजड नहीं है उन सभी के खातों से रुपये गबन किए गए हैं। इन उपभोक्ताओं की पास बुक एवं एफडी बैंक रिकार्ड से गायब पाई गई। ये पास बुक औैर एफडी हाथ से तैयार की गई हैं। वह उपभोक्ता को देखकर बैंक से बाहर आ जाता था वहीं से ही वह उसकी पास में बुक में हाथ से इंट्री कर देता था तथा लेनदेन भी बाहर ही करता था। उनको बैंक के अंदर नहीं जाने देता था। कभी कुछ तो कभी कुछ बहाने बनाकर टरका देता था।
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इस संबंध में रामौतार कुराहवटाने बताया कि उसने अपने बेटी-बेटा का खाता बैंक में खुलवा रखा था। बेटा राजयादव के खाते में रुपये कम होने पर उसको नहीं छेड़ा गया जबकि बेटी संगीता के खाते से रुपये गायब मिले हैं। उसने बताया कि बेटी के खाते में 80 हजार रुपये थे जिनमें से अब खाते में 32004 रुपये हैं। इनके अलावा एक निजी संस्था के 35 लाख रुपये तथा उपभोक्ता अशोक पुत्र सतबीर के 2 लाख 65 हजार रुपये गायब हैं। कुल राशि में से इसके 6428 रुपये बाकी हैं।
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अमर कोर निवासी गांव पायगा ने बताया कि वह मंगलवार को अपने खाते से 2 लाख रुपये निकलवाने के लिए आई थी तब उसे पता लगा कि उसके खाते से रुपये निकाल लिए हैं। उसके खाते में 2 लाख 54 हजार रुपये थे। जबकि 7 लाख रुपये की एफडी थी। खाते में अब 28 हजार बचे हैं जबकि एफडी के रुपये गायब हैं।
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गांव खायरा निवासी सुरेंद्र ने बताया कि अखबार की सूचना से वो बैंक में अपने परिवार के लोगों को साथ लेकर आए हैं। उउनके परिवार के छह खातों से 61.50 लाख रुपये गायब हो गए हैं। इन छह में से पांच के खाते फर्जी बताए जा रहे हैं जबकि मौसी कृष्णा का खाता बताया जा रहा है। उसने बताया कि बस्तीराम के 10 लाख, प्रेमदेवी के 16.50 लाख, कृष्णा देवी के 14लाख, पृथ्वीपाल के 13.50 लाख, धर्मेंद्र के 3.50, ज्योति के 4 लाख रुपये खातों से गायब हैं।
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खायरा गांव निवासी कौशल्या ने बताया कि उसने अपने खाते में 12.30 लाख रुपये जमा करवाए थे। मंगलवार को रिश्तेदार ने अखबार की खबर पढ़कर उनसे बतया और बैंक बुलाया। वहां पर खाता चेक किया तो खाते में 21 हजार रुपये बैंलेंस मिले।
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उपभोक्ताओं के खातों की जांच जारी
शाखा प्रबंधक जितेंद्र कुमार का कहना है कि बैंक गबन का मामला उनके सामने आया है। बैंक ने आरोपी कैशियर के विरूद्ध मामला दर्ज करा दिया है। शुरूआती जांच में वह अभी यह कहने की स्थिति में नहीं है कि कितने रूपयों का गोलमाल हुआ है। उन्होंने स्वीकार किया कि आज भी लगभग 25 ऐसे उपभोक्ता उनके सामने आये हैं जिनके खातों से करोड़ों रूपये की रकम गायब है। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय प्रबंधक स्वयं इस घोटाले की जांच कर रहे हैं। समस्त उपभोक्ताओं के खातों की जांच होने पर ही यह पता लग पायेगा कि वास्तव में कितने उपभोकताओं के खातों से कितनी रकम गायब है। उन्होंने बताया कि जांच का कार्य चल रहा है।
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मंगलवार को दूसरे दिन पटियाला बैंक के गबन की खबर प्रकाशित हुई तो उसके बाद लोगों ने अपना खाता चेक करना शुरू कर दिया। मंगलवार को लगभग 25 उपभोक्ता अपने बैंक खाते एवं एफडी चैक करने आए जिनमें से लगभग सभी के खातों से रुपये निकलवाए हुए थे। सभी उपभोक्ताओं के खातों से करोड़ों रुपये की राशि निकाली गई हैं। उपभोक्ता इस बात को लेकर परेशान है कि आखिर उनकी राशि उन्हें किस प्रकार मिलेगी और उन्हें कितना इंतजार करना पड़ेगा। राशि मिलेगी या नहीं ये सभी सवाल उनके जहन में उठ रहें हैं।
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6 साल से कर रहा था गबन
बैंक की सब शाखा 2009 में स्थापित की गई थी। तभी से यह आरोपी कैशियर इस शाखा में ही काम कर रहा था। लोगों के रूपये हड़पने का मामला पिछले 6 वर्षों से चल रहा था मगर यह उजागर बीती 6 अक्तूबर को उस समय हुआ जब एक उपभोक्ता अपने रूपये निकलवाने के लिए इस शाखा में गया। छह वर्षों के दौरान बैंक की आडिटें भी की जा चुकी हैं लेकिन उस ऑडिट में कोई मामला निकलकर नहीं आया गया। उपभोक्ताओं द्वारा यह बताया जा रहा है कि इस मामले में कोई और भी नाम शामिल आ सकते हैं। अभी तक कैशियर राजबीर सिंह का नाम ही चल रहा है।
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एक महीने दबाया बैंक ने मामला
बैंक ने बाजार में अपनी साख खराब होने की वजह से इस मामले की किसी को भनक तक नहीं लगने दी। अब चूंकि मामला कई करोड़ रूपयों तक पहुंच गया तो इसे दाबाए रखना भी मुमकिन नहीं हो सका। 8 अक्तूूबर को बैंक की हायर अथार्टी पर बैंक पहुंची, उसने भी मामले के बारे में जानकारी ली। उसके एक महीने के बाद यानी 3 नवंबर को शाखा प्रबंधक जितेंद्र कुमार ने पुलिस में आरोपी हार्ड कैशियर के खिलाफ शिकायत दी है।
ऐसा किया गया गबन
जिन उपभोक्ताओं के खातों से रूपये गायब है, ऐसे उपभोक्ताओं की एफडी या पास बुक में कम्प्यूटराइज एंट्री न करके स्वहस्त लिखित एंट्री की गई है। जांच करने पर पता चला कि जिन भी उपभोक्ताओं की पास बुक कम्प्यूटराइजड नहीं है उन सभी के खातों से रुपये गबन किए गए हैं। इन उपभोक्ताओं की पास बुक एवं एफडी बैंक रिकार्ड से गायब पाई गई। ये पास बुक औैर एफडी हाथ से तैयार की गई हैं। वह उपभोक्ता को देखकर बैंक से बाहर आ जाता था वहीं से ही वह उसकी पास में बुक में हाथ से इंट्री कर देता था तथा लेनदेन भी बाहर ही करता था। उनको बैंक के अंदर नहीं जाने देता था। कभी कुछ तो कभी कुछ बहाने बनाकर टरका देता था।
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इस संबंध में रामौतार कुराहवटाने बताया कि उसने अपने बेटी-बेटा का खाता बैंक में खुलवा रखा था। बेटा राजयादव के खाते में रुपये कम होने पर उसको नहीं छेड़ा गया जबकि बेटी संगीता के खाते से रुपये गायब मिले हैं। उसने बताया कि बेटी के खाते में 80 हजार रुपये थे जिनमें से अब खाते में 32004 रुपये हैं। इनके अलावा एक निजी संस्था के 35 लाख रुपये तथा उपभोक्ता अशोक पुत्र सतबीर के 2 लाख 65 हजार रुपये गायब हैं। कुल राशि में से इसके 6428 रुपये बाकी हैं।
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अमर कोर निवासी गांव पायगा ने बताया कि वह मंगलवार को अपने खाते से 2 लाख रुपये निकलवाने के लिए आई थी तब उसे पता लगा कि उसके खाते से रुपये निकाल लिए हैं। उसके खाते में 2 लाख 54 हजार रुपये थे। जबकि 7 लाख रुपये की एफडी थी। खाते में अब 28 हजार बचे हैं जबकि एफडी के रुपये गायब हैं।
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गांव खायरा निवासी सुरेंद्र ने बताया कि अखबार की सूचना से वो बैंक में अपने परिवार के लोगों को साथ लेकर आए हैं। उउनके परिवार के छह खातों से 61.50 लाख रुपये गायब हो गए हैं। इन छह में से पांच के खाते फर्जी बताए जा रहे हैं जबकि मौसी कृष्णा का खाता बताया जा रहा है। उसने बताया कि बस्तीराम के 10 लाख, प्रेमदेवी के 16.50 लाख, कृष्णा देवी के 14लाख, पृथ्वीपाल के 13.50 लाख, धर्मेंद्र के 3.50, ज्योति के 4 लाख रुपये खातों से गायब हैं।
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खायरा गांव निवासी कौशल्या ने बताया कि उसने अपने खाते में 12.30 लाख रुपये जमा करवाए थे। मंगलवार को रिश्तेदार ने अखबार की खबर पढ़कर उनसे बतया और बैंक बुलाया। वहां पर खाता चेक किया तो खाते में 21 हजार रुपये बैंलेंस मिले।
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उपभोक्ताओं के खातों की जांच जारी
शाखा प्रबंधक जितेंद्र कुमार का कहना है कि बैंक गबन का मामला उनके सामने आया है। बैंक ने आरोपी कैशियर के विरूद्ध मामला दर्ज करा दिया है। शुरूआती जांच में वह अभी यह कहने की स्थिति में नहीं है कि कितने रूपयों का गोलमाल हुआ है। उन्होंने स्वीकार किया कि आज भी लगभग 25 ऐसे उपभोक्ता उनके सामने आये हैं जिनके खातों से करोड़ों रूपये की रकम गायब है। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय प्रबंधक स्वयं इस घोटाले की जांच कर रहे हैं। समस्त उपभोक्ताओं के खातों की जांच होने पर ही यह पता लग पायेगा कि वास्तव में कितने उपभोकताओं के खातों से कितनी रकम गायब है। उन्होंने बताया कि जांच का कार्य चल रहा है।
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