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तीन साल में 675 लोगों की हो चुकी है हादसों में मौत
Updated Wed, 14 Feb 2018 12:17 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। महेंद्रगढ़ जैसे कम यातायात वाले जिले में भी हादसों की संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है। यहां पर हर साल 200 से अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में काल का ग्रास बन रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या दुपहिया वाहन चालकों की है। पुलिस विभाग के अनुसार करीब 70 प्रतिशत लोगों की मौत दुपहिया वाहन के कारण होती है। इनमें अधिकतर लोग हेलमेट का प्रयोग नहीं करते। जिला में गत तीन सालों में 1348 सड़क हादसे हुए। जिसमें 675 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 1317 लोग इनमें घायल हुए।
जिला की सड़कें हादसों से लाल हो रही हैं। इनमें सबसे ज्यादा मरने वालों में दुपहिया वाहन चालक शामिल हैं, जो हेलमेट का इस्तेमाल नहीं करते। पुलिस विभाग के आंकड़ों के हिसाब से हादसों में मरने वाले लोगों में से 70 प्रतिशत दुपहिया वाहन चालक होते हैं। इनमें से अधिकतर हेलमेट नहीं पहनते। जिला प्रशासन लोगों को हेलमेट लगाने के लिए समय-समय पर शिविर भी लगाता है। वहीं साल में दो बार एक बार पुलिस प्रशासन व एक बार आरटीए विभाग द्वारा सड़क सुरक्षा सप्ताह भी मनाया जाता है। इसके बावजूद लोग सड़क सुरक्षा के नियमों की पालना नहीं कर रहे। यही कारण है कि इतनी संख्या में लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं।
डंपर हैं हादसों का ज्यादा कारण
जिला में रोजाना हजारों की संख्या में डंपर चलते हैं। इनमें ओवरलोड व तेज गति से चलने वाले डंपर बाइक चालकों को रौंद देते हैं। जिले में बाइक सवार मरने वालों में अधिकांश हादसों का शिकार डंपर से ही हुए हैं। जिला में खनन का काम ज्यादा होने के कारण यहां पर डंपरों की संख्या भी अधिक रहती है।
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हेलमेट न पहनना भी है कारण
जिला के बड़े हादसों को देखा जाए तो हेलमेट न पहनना भी दुपहिया वाहनों पर सवार लोगों की मौत का सबसे बड़ा कारण है। कुछ माह पूर्व खटोटी मोड़ पर हुए हादसे में एक स्कूटी पर तीन लोग सवार थे। जिनमें से केवल एक ने ही हेलमेट पहना था। हादसों में तीनों की मौत हो गई थी। वहीं अन्य हादसों में भी ज्यादातर युवा हेलमेट नहीं पहनते।
युवा हो रहे हैं हादसों का ज्यादा शिकार
जिला के युवा ही हादसों का ज्यादा शिकार हो रहे हैं। युवा वर्ग बाइक व स्कूटी बिना हेलमेट के चलता है। जिसके कारण उनकी मौत हो जाती है। जिला में दुपहिया वाहन से मरने वालों में 80 प्रतिशत युवा ही शामिल हैं।
ये हुए हैं छह माह में जिला में मुख्य हादसे
- नारनौल के खटोटी मोड़ पर स्कूटी सवार तीन युवाओं की मौत
- अटेली-महेंद्रगढ़ मार्ग पर बाइक सवार दो युवाओं की मौत
- नारनौल के निजामपुर में नांगल चौधरी रोड पर बाइक सवार दो युवाओं की मौत
- नारनौल के सिंघाना बाईपास पर स्कूटी सवार मां बेटी की मौत
- नारनौल में कुलताजपुर रोड पर बाइक सवार दो युवाओं की मौत
- महेंद्रगढ़ में कार सवार पति पत्नी की मौत
- महेंद्रगढ़ में दो दिन पूर्व बाइक सवार की मौत
- धौलेड़ा में बाइक सवार युवक की मौत
यह है हादसों का आंकड़ा
वर्ष हादसे मौत घायल
2015 435 210 505
2016 460 236 461
2017 453 229 451
- आंकड़े पुलिस विभाग से लिए गए हैं।
पुलिस युवाओं व लोगों को हादसों से जागरूक करने के लिए समय-समय पर सेमिनार का आयोजन करती है। हाल ही में जनवरी माह में भी पुलिस प्रशासन द्वारा सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया गया था। वहीं ट्रैफिक नियमों पर भी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आदि कराई जाती है।
- राजेंद्र कौशल, ट्रैफिक एसएचओ, जिला महेंद्रगढ़
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नारनौल। महेंद्रगढ़ जैसे कम यातायात वाले जिले में भी हादसों की संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है। यहां पर हर साल 200 से अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में काल का ग्रास बन रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या दुपहिया वाहन चालकों की है। पुलिस विभाग के अनुसार करीब 70 प्रतिशत लोगों की मौत दुपहिया वाहन के कारण होती है। इनमें अधिकतर लोग हेलमेट का प्रयोग नहीं करते। जिला में गत तीन सालों में 1348 सड़क हादसे हुए। जिसमें 675 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 1317 लोग इनमें घायल हुए।
जिला की सड़कें हादसों से लाल हो रही हैं। इनमें सबसे ज्यादा मरने वालों में दुपहिया वाहन चालक शामिल हैं, जो हेलमेट का इस्तेमाल नहीं करते। पुलिस विभाग के आंकड़ों के हिसाब से हादसों में मरने वाले लोगों में से 70 प्रतिशत दुपहिया वाहन चालक होते हैं। इनमें से अधिकतर हेलमेट नहीं पहनते। जिला प्रशासन लोगों को हेलमेट लगाने के लिए समय-समय पर शिविर भी लगाता है। वहीं साल में दो बार एक बार पुलिस प्रशासन व एक बार आरटीए विभाग द्वारा सड़क सुरक्षा सप्ताह भी मनाया जाता है। इसके बावजूद लोग सड़क सुरक्षा के नियमों की पालना नहीं कर रहे। यही कारण है कि इतनी संख्या में लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं।
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डंपर हैं हादसों का ज्यादा कारण
जिला में रोजाना हजारों की संख्या में डंपर चलते हैं। इनमें ओवरलोड व तेज गति से चलने वाले डंपर बाइक चालकों को रौंद देते हैं। जिले में बाइक सवार मरने वालों में अधिकांश हादसों का शिकार डंपर से ही हुए हैं। जिला में खनन का काम ज्यादा होने के कारण यहां पर डंपरों की संख्या भी अधिक रहती है।
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हेलमेट न पहनना भी है कारण
जिला के बड़े हादसों को देखा जाए तो हेलमेट न पहनना भी दुपहिया वाहनों पर सवार लोगों की मौत का सबसे बड़ा कारण है। कुछ माह पूर्व खटोटी मोड़ पर हुए हादसे में एक स्कूटी पर तीन लोग सवार थे। जिनमें से केवल एक ने ही हेलमेट पहना था। हादसों में तीनों की मौत हो गई थी। वहीं अन्य हादसों में भी ज्यादातर युवा हेलमेट नहीं पहनते।
युवा हो रहे हैं हादसों का ज्यादा शिकार
जिला के युवा ही हादसों का ज्यादा शिकार हो रहे हैं। युवा वर्ग बाइक व स्कूटी बिना हेलमेट के चलता है। जिसके कारण उनकी मौत हो जाती है। जिला में दुपहिया वाहन से मरने वालों में 80 प्रतिशत युवा ही शामिल हैं।
ये हुए हैं छह माह में जिला में मुख्य हादसे
- नारनौल के खटोटी मोड़ पर स्कूटी सवार तीन युवाओं की मौत
- अटेली-महेंद्रगढ़ मार्ग पर बाइक सवार दो युवाओं की मौत
- नारनौल के निजामपुर में नांगल चौधरी रोड पर बाइक सवार दो युवाओं की मौत
- नारनौल के सिंघाना बाईपास पर स्कूटी सवार मां बेटी की मौत
- नारनौल में कुलताजपुर रोड पर बाइक सवार दो युवाओं की मौत
- महेंद्रगढ़ में कार सवार पति पत्नी की मौत
- महेंद्रगढ़ में दो दिन पूर्व बाइक सवार की मौत
- धौलेड़ा में बाइक सवार युवक की मौत
यह है हादसों का आंकड़ा
वर्ष हादसे मौत घायल
2015 435 210 505
2016 460 236 461
2017 453 229 451
- आंकड़े पुलिस विभाग से लिए गए हैं।
पुलिस युवाओं व लोगों को हादसों से जागरूक करने के लिए समय-समय पर सेमिनार का आयोजन करती है। हाल ही में जनवरी माह में भी पुलिस प्रशासन द्वारा सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया गया था। वहीं ट्रैफिक नियमों पर भी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आदि कराई जाती है।
- राजेंद्र कौशल, ट्रैफिक एसएचओ, जिला महेंद्रगढ़