{"_id":"69a1e00156901421240c5c0e","slug":"comedy-drama-enthralled-the-audience-at-the-folk-art-festival-narnol-news-c-203-1-sroh1011-124436-2026-02-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mahendragarh-Narnaul News: लोक कला उत्सव में हास्य नाटक ने दर्शकों का खूब हंसाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mahendragarh-Narnaul News: लोक कला उत्सव में हास्य नाटक ने दर्शकों का खूब हंसाया
विज्ञापन
फोटो संख्या:85- विरासत लोक कला उत्सव में नाटक फ्लर्ट का मचन करते कलाकार--स्रोत स्वयं
महेंद्रगढ़। शहर के बुचौली रोड स्थित ऑडिटोरियम में पांचवें दिन शुक्रवार को लोक कला उत्सव में हास्य नाटक की प्रस्तुति ने दर्शकों को जमकर गुदगुदाया। पदमश्री नरेंद्र कोहिली की कहानी पर आधारित नाटक फ्लर्ट के कलाकारों ने अपने-अपने अभिनय से दर्शकों को प्रत्येक संवाद के साथ तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।
उत्तर-मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज व निजी स्कूल के संयुक्त तत्त्वाधान में 23 फरवरी से एक मार्च तक विरासत लोककला उत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के कुलपति असीम मिगलानी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में हकेंवि के प्रो. डॉ. दिनेश चहल विशिष्ट अथिति के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व विधायक राव बहादुर सिंह ने की।
विज्ञापन
असीम मिगलानी ने कहा कि अनेकता में एकता के मिश्रण को विशेषकर कलाकार बनाए रखता है। छात्र जीवन से ही प्रेरणा लेकर हमें संस्कारों को जीवित रखने के प्रयास करने चाहिए। डॉ. दिनेश चहल ने कहा कि हार-जीत हमारे परिश्रम पर प्रभाव नहीं डालते। हमें हार में जीत का जजबा तलाशना होगा। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन डॉ. धर्मेश कौशिक ने किया।
विज्ञापन
उत्तर-मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज व निजी स्कूल के संयुक्त तत्त्वाधान में 23 फरवरी से एक मार्च तक विरासत लोककला उत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
विज्ञापन
इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के कुलपति असीम मिगलानी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में हकेंवि के प्रो. डॉ. दिनेश चहल विशिष्ट अथिति के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व विधायक राव बहादुर सिंह ने की।
विज्ञापन
असीम मिगलानी ने कहा कि अनेकता में एकता के मिश्रण को विशेषकर कलाकार बनाए रखता है। छात्र जीवन से ही प्रेरणा लेकर हमें संस्कारों को जीवित रखने के प्रयास करने चाहिए। डॉ. दिनेश चहल ने कहा कि हार-जीत हमारे परिश्रम पर प्रभाव नहीं डालते। हमें हार में जीत का जजबा तलाशना होगा। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन डॉ. धर्मेश कौशिक ने किया।