मंगलवार से शुरू हो रहे चैत्र नवरात्र के लिए बाजारों में दुकानें सज गई हैं। मंदिरों को श्रद्धालुुओं के लिए विशेष निर्देशों के साथ खोला जाएगा। मंदिर प्रबंधक सामाजिक दूरी, मास्क, सैनिटाइजर के उपयोग की पालना कराएंगे। मंदिर में श्रद्धालुओं को एक साथ बैठने की अनुमति नहीं होगी।
हिंदू धर्म में नवरात्र का बहुत महत्व है। वर्ष में दो गुप्त और दो प्राकट्य नवरात्र आते हैं। प्राकट्य नवरात्र में प्रमुख चैत्र नवरात्र हैं। जो मंगलवार 13 अप्रैल से शुरू हो रहे हैं। ज्योर्तिविद पं. कृष्ण कुमार शर्मा नावां ने बताया कि नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा और साधना का बहुत अधिक फल मिलता है क्योंकि नवरात्र में मां दुर्गा पृथ्वी पर आती है। भक्तों की साधना और पूजा-पाठ से प्रसन्न होकर आशीर्वाद देती है। उन्होंने बताया कि चैत्र नवरात्र का धार्मिक महत्व भी है। मान्यतानुसार चैत्र नवरात्र के पहले दिन आदिशक्ति प्रकट हुई थीं। देवी के कहने पर भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि का निर्माण शुरू किया था। इसलिए चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिंदू नव संवत्सर शुरू होता है। उन्होंने बताया कि नवरात्र में घट स्थापना का शुभ मुहूर्त अति आवश्यक है। देवी पुराण में प्रात: काल का समय इसके लिए श्रेष्ठ बताया गया है। मंगलवार को प्रात: 6:11 बजे से सुबह 10:17 बजे तक का समय घट स्थापना के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त है। उन्होंने बताया कि इस बार नवरात्र में अमृत सिद्धी, दो सर्वार्थ सिद्धि, पांच रवि योग और एक शक्तिशाली त्रिपुष्कर योग बन रहे हैं। जो नवरात्र की शुभता को और बढ़ाएंगे। 21 अप्रैल को रामनवमी पर्व मनाया जाएगा।