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Mahendragarh-Narnaul News: दो सब इंस्पेक्टर सहित 7 पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज
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नारनौल। चीफ ज्यूडशियल मजिस्ट्रेट के निर्देश व सुरेंद्र सिंह ढिल्लो एडवोकेट की शिकायत पर दो एसआई, एक एएसआई सहित अन्य पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत शहर थाना में मामला दर्ज किया गया है। न्यायालय में लगाई गुहार में वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह ढिल्लो ने बताया था कि पुलिस द्वारा उस पर एक महिला शिकायतकर्ता व विक्रम के साथ मिलकर 24 अगस्त 2022 को झूठा मुकदमा शहर थाना में दर्ज कर दिया था। इसमें उसने सीसीटीवी फुटेज बतौर सबूत पुलिस को सौंप दी थी। पुलिस द्वारा महिला थाना में 4 अगस्त 2022
व शहर थाना में 17 मई 2022 को दर्ज मामलों में वह बतौर गवाह है। इन मामलों में राजीनामा करने के लिए दबाव बनाने की नियत से उस पर झूठा मुकदमा 24 अगस्त को दर्ज किया गया। झूठा मामला दर्ज किए जाने पर 18 सितंबर 2022 को सायं करीब 5 बजे उसे सूचना लगी कि डीजीपी लघु सचिवालय नारनौल में आए हुए हैं। इस पर वह लघु सचिवालय पहुंचा लेकिन पुलिस ने उसे अंदर नहीं जाने दिया। जब उसने डीजीपी को शिकायत देने की बात कही तो तत्कालीन एसएचओ कृपाल ने उसे अपनी तरफ बुलाकर कहा कि वह आपकी शिकायत पर कार्रवाई करवा देंगे। वहीं डीएसपी जितेंद्र कुमार व राजेश कुमार ने भी उन्हें कार्रवाई करने की बात कही थी मगर जब उसने डीजीपी से मिलने की बात कही तो डीएसपी राजेश कुमार व एसएचओ कृपाल ने इशारा किया और एक सफेद रंग की गाड़ी आई जिस पर बत्ती लगी हुई थी। इसमें हवलदार नरेंद्र कुमार व दो अन्य सिविल ड्रेस में तैनात कर्मचारियों ने उसे जबरदस्ती गाड़ी में डालकर शहर थाना में ले गए। जहां उसे जबरदस्ती बैठाए रखा। इसके बाद उसे महावीर चौकी ले गए। जहां एसआई अश्वनी, कृपाल सिंह ने अपने मातहत एसआई जयपाल से उसके खिलाफ झूठा व मनगढ़ंत तथ्यों की रिपोर्ट तैयार कर उसे रात आठ बजे लघु सचिवालय नारनौल में एसडीएम न्यायालय में पेश किया। मगर एसडीएम न्यायालय में न तो एसडीएम थे और अन्य कोई अधिकारी। एसडीएम न्यायालय में केवल रीडर मौजूद था। इस प्रकार पुलिस की उक्त कार्रवाई से उसे व उसके परिजनों को मानसिक आघात पहुंचा। अधिवक्ता ने पुलिस महानिदेशक हरियाणा व पुलिस महानिरीक्षक दक्षिण रेंज रेवाड़ी को भी कार्रवाई के लिए शिकायत पेश की है। वहीं अधिवक्ता ने न्यायालय में गुहार लगाई थी। इस पर न्यायालय ने पुलिस को उक्त अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करने के निर्देश दिए। न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने शहर थाना में उक्त लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने, कानून का उल्लंघन करने, अपहरण करने, रास्ता रोकने, मानहानि सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बाक्स
सुरक्षा की मांग भी की
अधिवक्ता ने इस प्रकार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शिकायत होने से उसे किसी न किसी झूठे मुकदमे में फंसा देने की आशंका जाहिर की। उसने उसे सुरक्षा प्रदान करने की मांग भी की है।
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व शहर थाना में 17 मई 2022 को दर्ज मामलों में वह बतौर गवाह है। इन मामलों में राजीनामा करने के लिए दबाव बनाने की नियत से उस पर झूठा मुकदमा 24 अगस्त को दर्ज किया गया। झूठा मामला दर्ज किए जाने पर 18 सितंबर 2022 को सायं करीब 5 बजे उसे सूचना लगी कि डीजीपी लघु सचिवालय नारनौल में आए हुए हैं। इस पर वह लघु सचिवालय पहुंचा लेकिन पुलिस ने उसे अंदर नहीं जाने दिया। जब उसने डीजीपी को शिकायत देने की बात कही तो तत्कालीन एसएचओ कृपाल ने उसे अपनी तरफ बुलाकर कहा कि वह आपकी शिकायत पर कार्रवाई करवा देंगे। वहीं डीएसपी जितेंद्र कुमार व राजेश कुमार ने भी उन्हें कार्रवाई करने की बात कही थी मगर जब उसने डीजीपी से मिलने की बात कही तो डीएसपी राजेश कुमार व एसएचओ कृपाल ने इशारा किया और एक सफेद रंग की गाड़ी आई जिस पर बत्ती लगी हुई थी। इसमें हवलदार नरेंद्र कुमार व दो अन्य सिविल ड्रेस में तैनात कर्मचारियों ने उसे जबरदस्ती गाड़ी में डालकर शहर थाना में ले गए। जहां उसे जबरदस्ती बैठाए रखा। इसके बाद उसे महावीर चौकी ले गए। जहां एसआई अश्वनी, कृपाल सिंह ने अपने मातहत एसआई जयपाल से उसके खिलाफ झूठा व मनगढ़ंत तथ्यों की रिपोर्ट तैयार कर उसे रात आठ बजे लघु सचिवालय नारनौल में एसडीएम न्यायालय में पेश किया। मगर एसडीएम न्यायालय में न तो एसडीएम थे और अन्य कोई अधिकारी। एसडीएम न्यायालय में केवल रीडर मौजूद था। इस प्रकार पुलिस की उक्त कार्रवाई से उसे व उसके परिजनों को मानसिक आघात पहुंचा। अधिवक्ता ने पुलिस महानिदेशक हरियाणा व पुलिस महानिरीक्षक दक्षिण रेंज रेवाड़ी को भी कार्रवाई के लिए शिकायत पेश की है। वहीं अधिवक्ता ने न्यायालय में गुहार लगाई थी। इस पर न्यायालय ने पुलिस को उक्त अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करने के निर्देश दिए। न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने शहर थाना में उक्त लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने, कानून का उल्लंघन करने, अपहरण करने, रास्ता रोकने, मानहानि सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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सुरक्षा की मांग भी की
अधिवक्ता ने इस प्रकार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शिकायत होने से उसे किसी न किसी झूठे मुकदमे में फंसा देने की आशंका जाहिर की। उसने उसे सुरक्षा प्रदान करने की मांग भी की है।
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