फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Mahendragarh/Narnaul News ›   Carrot grass also pollutes the environment: Dr. Jayalal

गाजर घास पर्यावरण को भी दूषित करती है : डाॅ. जयलाल

Sat, 23 Aug 2025 12:01 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Sat, 23 Aug 2025 12:01 AM IST
विज्ञापन
Carrot grass also pollutes the environment: Dr. Jayalal
फोटो संख्या:55- कृ​षि विज्ञान केंद्र की ओर से किसानों को जागरूक  करते कृ​षि विशेषज्ञ--स्राेत- क
महेंद्रगढ़। कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों व आमजन को गाजर घास के दुष्प्रभाव व स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों और उन्मूलन जागरूकता सप्ताह का समापन शुक्रवार को किया।
विज्ञापन


केंद्र के वरिष्ठ संयोजक डाॅ. जयलाल यादव ने बताया कि गाजर घास जहां एक ओर मानव स्वास्थ्य और पशुओं में समस्याएं पैदा करती है। वहीं पर्यावरण को भी दूषित करती है। उत्पादकता को कम करते हुए जैव विविधता को भी भारी नुकसान पहुंचाती है। जागरूकता अभियान के दौरान वरिष्ठ शस्य वैज्ञानिक डाॅ. आशीष शिवरान ने गाजर घास के लिए यांत्रिक, रासायनिक व जैविक विधियों की जानकारी दी।
विज्ञापन


उन्होंने बताया कि गाजर घास का नियंत्रण फूल आने से पहले उखाड़कर गड्ढे में डालकर इसका उपयोग बहुत अच्छा कंपोस्ट बनाने में कर सकते हैं। इसे उखाड़ते समय हाथ में दस्तानों तथा सुरक्षात्मक कपड़ों का प्रयोग करना चाहिए। गाजर घास का पौधा हर तरह के वातावरण में उगने की क्षमता रखता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

पशुओं के लिए गाजर घास विषाक्त है। इसे खाने के बाद दुधारू पशुओं के दूध में कड़वाहट के साथ दूध में भी कमी आने लगती है। गाजर घास को छूने या लगातार इसके संपर्क में रहने से मानव में विभिन्न प्रकार की बीमारियां जैसे खुजली, दमा, त्वचा पर लाल दाने व जलन आदि उत्पन्न हो जाती है। जब गाजर घास के परागकण श्वास के साथ मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं तो मनुष्य अस्थमा से ग्रसित हो जाता है।

मृदा वैज्ञानिक डाॅ. राजपाल ने कहा कि गाजर घास में जहरीले रसायनों की उपस्थिति के कारण मृदा में उपयोगी सूक्ष्म जीवाणुओं की संख्या में काफी कमी हो जाती है। इसके प्रभाव में पोषक तत्वों एवं खनिज लवणों का बहुत बड़ा हिस्सा पौधों के प्राप्त नहीं होता। उन्होंने बताया कि गाजर घास की पत्तियों में क्लोरोफिल की उपलब्धता को प्रभावित करती है।


इससे फसलों की वृद्धि व विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। जागरूकता सप्ताह के दौरान केंद्र द्वारा गोद लिए गांवों नांवां, श्यामपुरा स्कूली बच्चों के लिए राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय महेन्द्रगढ़ व कृषि विज्ञान केंद्र में कार्यक्रम आयोजित किए गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed