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Mahendragarh-Narnaul News: गांव में दे दिया बाईपास, शहर के बीच से गुजरेगा स्टेट हाईवे
Sat, 11 Mar 2023 11:27 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 11 Mar 2023 11:27 PM IST
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महेंद्रगढ़। नारनौल से महेंद्रगढ़-दादरी तक बनने वाले स्टेट हाईवे पर गांव नांगल सिरोही में बाईपास दे दिया जबकि महेंद्रगढ़ शहर के बीचोंबीच से गुजरेगा। दिसंबर में 398 करोड़ का बजट तैयार कर 40 किलोमीटर लंबे स्टेट हाईवे का निर्माण शुरू कर दिया था। इस समय जिले की सीमा से गांव सिसोठ तक प्रथम चरण के निर्माण को पूरा किया जा चुका है। शहर में बाईपास नहीं देने से अब लोगों को भी स्टेट हाईवे से भय सताने लगा है कि यह राहत की बजाए कहीं आफत न बन जाए।
बता दें कि एचएसआरडीसी द्वारा महेंद्रगढ़ से आठ किलोमीटर दूर नारनौल की तरफ के गांव नांगल सिरोह में बाईपास दे दिया जबकि शहर में कोई बाइपास नहीं दिया। शहर के बीचोंबीच से गुजरने वाले इस स्टेट हाईवे का निर्माण पूरा होने के बाद यातायात का ओर अधिक भार इस पर बढ़ जाएगा। साथ ही शहर की एक तिहाई आबादी को आवागम करने में बाधाएं होंगी। इस मार्ग से प्रतिदिन करीब 10 हजार वाहन गुजरते हैं लेकिन पिछले दस सालों से बदहाल होने के कारण वाहन चालक भी इस मार्ग से आने की बजाए वैकल्पिक मार्ग तलाशते हैं। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इस मार्ग पर यातायात का भार भी दो गुणा बढ़ जाएगा। इस मार्ग का करीब पांच किलोमीटर का हिस्सा शहर से गुजर रहा है। इसी मार्ग पर तीन कालेज, लघु सचिवालय, पेट्रोल पंप, अस्पताल व अनेक व्यापारिक केंद्र होने के कारण लोगों का आवागमन रहेगा जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहेगी।
गांव नांगल सिरोही में दे दिया बाईपास
एचएसआरडीसी द्वारा जब इस मार्ग के निर्माण की तैयारी की गई थी तो लोगों को लग रहा था कि महेंद्रगढ़ शहर से बाईपास निकाला जाएगा जिससे यातायात का भार भी कम रहेगा लेकिन बाईपास का कोई जिक्र तक नहीं है जबकि महज आठ किलोमीटर दूर स्थित गांव नांगल सिरोही में भी बाईपास दे दिया। स्टेट हाईवे निर्माण के लिए प्रथम चरण में गांव पालड़ी नहर के निर्माण शुरू किया गया था। जब यह निर्माण शहर के नजदीक पहुंचा तो लोगों ने भी बाईपास की मांग उठानी शुरू कर दी। जिम्मेदारों का दावा है कि नांगल सिरोही बाईपास व रिवासा आरओबी को छोड़कर शेष काम एक वर्ष के समय में पूरा कर लिया जाएगा। स्टेट हाईवे पर पांच मीटर बीच के डिवाइडर के अलावा दोनों ओर से साढ़े सात मीटर के डबल लाइनों के मार्ग होंगे। वहीं पांच मीटर के डिवाइडर के अंदर फूलदार एवं आकर्षक पौधे लगाए जाएंगे। दोनों ओर करीब 25-25 फुट चौड़ाई में दो लाइनें होंगी।
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40 किलोमीटर लंबे इस मार्ग की 19 सालों बाद सुध ली
बता दें कि आकोदा से नारनौल तक 40 किलोमीटर लंबे इस मार्ग की 19 सालों बाद सुध ली है। वर्ष 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी ओमप्रकाश चौटाला की सरकार में इसका निर्माण किया था। इसके बाद साल-दर साल बदहाल होता गया। पिछले 19 सालों में स्थानीय नेताओं से लेकर मुख्यमंत्री एवं उप मुख्यमंत्री द्वारा भी खूब घोषणाएं की गई। अब निर्माण शुरू होने से जिले के लोगों ने राहत की सांस ली है।
हिमाचल से राजस्थान व प्रदेश के 16 जिलों को जोड़ने में सक्षम
बता दें कि इस मार्ग से प्रदेश के 16 जिलों के साथ-साथ राजस्थान, पंजाब व हिमाचल तक आवागमन में इस मार्ग का प्रयोग होता है। वहीं प्रदेश के चरखी दादरी, भिवानी, रोहतक झज्जर, हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, जींद, करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला, पंचकूला, यमुनानगर, पानीपत, सोनीपत व कैथल को आपस में जोड़ने के लिए मुख्य मार्ग है।
इस प्रोजेक्ट करीब तीन वर्ष पूर्व बनाया गया था। उस समय गांव नांगल सिरोह में स्टेट हाईवे के लिए महज 66 फुट की जगह थी तथा दो किलोमीटर के करीब आबादी की बसी है। ऐसे में स्टेट हाईवे निकालना संभव नहीं थी। वहीं शहर में 104 फुट से अधिक चौड़ाई की जगह है साथ ही सर्विस रोड भी बनाया जा सकता है जिससे यातायात बाधित भी नहीं होगा। शहर से गुजरने वाले स्टेट हाईवे के लिए पर्याप्त जगह है।
-कृष्ण कुमार यादव, उपमंडल अधिकारी, लोक निर्माण विभाग, महेंद्रगढ़।
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बता दें कि एचएसआरडीसी द्वारा महेंद्रगढ़ से आठ किलोमीटर दूर नारनौल की तरफ के गांव नांगल सिरोह में बाईपास दे दिया जबकि शहर में कोई बाइपास नहीं दिया। शहर के बीचोंबीच से गुजरने वाले इस स्टेट हाईवे का निर्माण पूरा होने के बाद यातायात का ओर अधिक भार इस पर बढ़ जाएगा। साथ ही शहर की एक तिहाई आबादी को आवागम करने में बाधाएं होंगी। इस मार्ग से प्रतिदिन करीब 10 हजार वाहन गुजरते हैं लेकिन पिछले दस सालों से बदहाल होने के कारण वाहन चालक भी इस मार्ग से आने की बजाए वैकल्पिक मार्ग तलाशते हैं। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इस मार्ग पर यातायात का भार भी दो गुणा बढ़ जाएगा। इस मार्ग का करीब पांच किलोमीटर का हिस्सा शहर से गुजर रहा है। इसी मार्ग पर तीन कालेज, लघु सचिवालय, पेट्रोल पंप, अस्पताल व अनेक व्यापारिक केंद्र होने के कारण लोगों का आवागमन रहेगा जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहेगी।
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गांव नांगल सिरोही में दे दिया बाईपास
एचएसआरडीसी द्वारा जब इस मार्ग के निर्माण की तैयारी की गई थी तो लोगों को लग रहा था कि महेंद्रगढ़ शहर से बाईपास निकाला जाएगा जिससे यातायात का भार भी कम रहेगा लेकिन बाईपास का कोई जिक्र तक नहीं है जबकि महज आठ किलोमीटर दूर स्थित गांव नांगल सिरोही में भी बाईपास दे दिया। स्टेट हाईवे निर्माण के लिए प्रथम चरण में गांव पालड़ी नहर के निर्माण शुरू किया गया था। जब यह निर्माण शहर के नजदीक पहुंचा तो लोगों ने भी बाईपास की मांग उठानी शुरू कर दी। जिम्मेदारों का दावा है कि नांगल सिरोही बाईपास व रिवासा आरओबी को छोड़कर शेष काम एक वर्ष के समय में पूरा कर लिया जाएगा। स्टेट हाईवे पर पांच मीटर बीच के डिवाइडर के अलावा दोनों ओर से साढ़े सात मीटर के डबल लाइनों के मार्ग होंगे। वहीं पांच मीटर के डिवाइडर के अंदर फूलदार एवं आकर्षक पौधे लगाए जाएंगे। दोनों ओर करीब 25-25 फुट चौड़ाई में दो लाइनें होंगी।
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40 किलोमीटर लंबे इस मार्ग की 19 सालों बाद सुध ली
बता दें कि आकोदा से नारनौल तक 40 किलोमीटर लंबे इस मार्ग की 19 सालों बाद सुध ली है। वर्ष 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी ओमप्रकाश चौटाला की सरकार में इसका निर्माण किया था। इसके बाद साल-दर साल बदहाल होता गया। पिछले 19 सालों में स्थानीय नेताओं से लेकर मुख्यमंत्री एवं उप मुख्यमंत्री द्वारा भी खूब घोषणाएं की गई। अब निर्माण शुरू होने से जिले के लोगों ने राहत की सांस ली है।
हिमाचल से राजस्थान व प्रदेश के 16 जिलों को जोड़ने में सक्षम
बता दें कि इस मार्ग से प्रदेश के 16 जिलों के साथ-साथ राजस्थान, पंजाब व हिमाचल तक आवागमन में इस मार्ग का प्रयोग होता है। वहीं प्रदेश के चरखी दादरी, भिवानी, रोहतक झज्जर, हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, जींद, करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला, पंचकूला, यमुनानगर, पानीपत, सोनीपत व कैथल को आपस में जोड़ने के लिए मुख्य मार्ग है।
इस प्रोजेक्ट करीब तीन वर्ष पूर्व बनाया गया था। उस समय गांव नांगल सिरोह में स्टेट हाईवे के लिए महज 66 फुट की जगह थी तथा दो किलोमीटर के करीब आबादी की बसी है। ऐसे में स्टेट हाईवे निकालना संभव नहीं थी। वहीं शहर में 104 फुट से अधिक चौड़ाई की जगह है साथ ही सर्विस रोड भी बनाया जा सकता है जिससे यातायात बाधित भी नहीं होगा। शहर से गुजरने वाले स्टेट हाईवे के लिए पर्याप्त जगह है।
-कृष्ण कुमार यादव, उपमंडल अधिकारी, लोक निर्माण विभाग, महेंद्रगढ़।